Tuesday, December 11, 2007

मोदीजी के लियी दिल्ली नही आसां

भाजपा ने आडवाणी को उसके प्रधानमंत्री के रूप मे जनता के सामने पेश किया है। सभी अचम्भे में हैं कि यह क्यॊ हो रहा है? दिल्ली के अखबार इसे मोदी के लिये स्पष्ट संकेत के रूप मे देख रहे हैं कि भैया दिल्ली दूर है गांधीनगर मे ही संतुष्ट रहो। गुजरात मे चुनाव के प्रथम चरण की पूर्व संध्या पर इस प्रकार का निवेदन वास्तव मे काफ़ी रहस्यमय है।

ऎसे मे प्रधान मंत्री मन मोहन सिंह भी चुस्की लेने से बाज नही आये। जब वडोदरा मे पत्रकारों ने उनसे पूछा कि यह क्या है, तो तपाक से बोले कि यह मोदी को दिल्ली से दूर रखने का उपाय है। भाजपा के नेता खुद मोदी से डरे हुए हैं ।इससे अधिक वेधक और कोई जवाब शायद ही हो सकता था।

अहमदाबाद मे आये तो यहा भी यह सवाल उन्हे पूछा गया। उनका जवाब था कि यह भाजपा का अंदरूनी मामला है। उसी सांस मे बोले कि भाजपा ने आडवाणी को ऎसे पद के लिये उम्मीदवार बनाया है जो अभी खाली ही नही हुआ है !

अंदर का मामला कुछ भी हो, एक बात तो साफ़ है कि अरूण शौरी से ले और सभी नेता जो मोदी को प्रधानमंत्री के रूप मे बता रहे थे उनकी बोलती बंद हो जायेगी। भाजपा जहां खाना खाने जैसा काम भी रण्नीति का ही एक भाग होता है, वहां उसके नेता शायद अभी से ही दिल्ली वालॊं के लिये दिल्ली रिजर्व कर रहे हैं। मोदी अगर गुजरात हार जाते हैं तो उनका खाली दिमाग दिल्ली की कुर्सी के लिये षडयंत्र रचना शुरू न कर दे!!!!

1 comments:

Shiv Kumar Mishra said...

बड़ी अजीब बात है....एक तरफ़ तो लोग कहते हैं कि मोदी गुजरात में हार जायेंगे, दूसरी तरफ़ ये भी कहते हैं कि उनका कद इतना बड़ा हो जाएगा कि दिल्ली तक पंहुच जायेंगे....पता नहीं कैसे सोचते हैं लोग.

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