Friday, October 2, 2009
Thursday, October 1, 2009
मोदीजी ने फ़िर सुर्रा छोड़ा
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Yogesh Sharma
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10:01 AM
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Wednesday, September 30, 2009
गुजरात में चिल्ड्रेन साइंस कांग्रेस
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11:14 AM
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ब्रिटानिया का वेज केक
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10:26 AM
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Monday, September 28, 2009
लम्बे अरसे के बाद
मित्रो मै कई महिनो के बाद मेरे इस लोकप्रिय ब्लॉग पर लिख रहा हूँ कई बार सोचा की लिखू पर किन्ही कारणों से लिखना नही हो पाया पर आज एक बहुत बड़ा कारण है लिखने का
मै आप सभी मित्रो को गुजरात ग्लोबल के नए अवतार के बारे में बताना चाहता हूँ जूमला में है यह नया अवतार इसे पूरी तरह से उपयोग में लाने में अभी थोडा समय लगेगा
मै आपको इसकी एकाद खासियत के बारे में बताना चाहूंगा सर्व प्रथम है इसका द्वादश ज्योतिर्लिंग का विभाग शायद ही कहीं एक ही स्थल पर सभी द्वादश ज्योतिर्लिंग की जानकारी होगी यस सब जानकारी आम आदमी को केन्द्र में रख कर प्रस्तुत की गई है
इसमे मीडिया का अलग विभाग है अभी तक के सभी मीडिया न्यूज़लेटर का इस विभाग में समावेश किया गया है अब इसमे हर रोज मीडिया की जानकारी मिलेगी न्यूज़लेटर में भी जानकारी भेजी जायेंगी जिसमे मीडिया के समाचार विशेष रूप में मिलते रहेन्गे
मेरा आप सभी से आग्रह है की आप गुजरात ग्लोबल देख अपने सूचन दे अभी इतना ही
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3:16 AM
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Sunday, April 12, 2009
मोदी का बुढिया -गुढिया खेल
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9:10 PM
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Thursday, May 1, 2008
साबरमती जेल, मुठभेडिया पुलिस वालों का अखाडा
साबरमती जेल के सुरक्षाकर्मी आजकल काफी परेशान हैं। आए दिन जेल में दंगल हो जाता है। सामान्य कैदी हो तो धुलाई कर बैरक में डाल दे। पर ये सब ठहरे दिग्गज पुलिस वाले।
इन्हें कानून बखूबी मालूम है। गोली मार मुठभेड बताने में माहिर हैं। साफ है कि, इनसे निपटना किसी के बस की बात नहीं। कुछ महिने पहले कुछ पुलिसवालों ने दिग्गज वणजारा और पांडियन को हथकडी पहनाने की कोशिश की थी। बता दी कानून की किताब। कर दी अर्जी अदालत में। सुप्रीम कोर्ट के फैंसले से ले मानवाधिकार सभी कुछ पढा दिया। जीत गये। अदालत ने कह दिया, हथकडी नहीं। आरोप सिध्ध नहीं हुआ। इज्जतदार हैं!
इस हफ्ते सोहराबुद्दीन कांड के ये नायक वणजारा और नरेन्द्र अमीन गुत्थमगुथ्था हो गये। आई पी एस अधिकारी एक दूसरे पर ही टूट पडे क्योंकि, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी!
गुस्सा किस पर उतारते। और कैदी मिलकर उनकी धुलाई कर देते। हां, बाहर होते तो सोहराबुद्दीन जैसे एक दो को उडा गुस्सा ठंडा कर लेते। एकाद तमगा भी वर्दी पर लगवा देते।
कल दो और सब इंस्पेक्टरों में लठठम लठ्ठ हो गई। ये दोनों भी फर्जी मुठभेड के चक्कर में जेल में हैं। गुस्से में एक आई पी एस ने मुर्गे की रान चबाने के अंदाज में बैडमिंटन रैकेट के तार ही फाड डाले। आम किस्से में कैदियों को दूसरी जेल में भेज देते हैं। पर इन्हें कही भी भेजें तेवर तो पुलिसिया ही रहेंगें।
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