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Monday, October 29, 2007

बेशरमी का तहलका

गुजरात मे आजकाल तहलका मचा हुआ है। हालांकि पूरी दुनिया मे इस तहलका की चर्चा है, गुजरात मे तो लोग इसे महसूस कर रहे है। आशंका प्रेरित भय लोगो के दिलो मे घर करता जा रहा है। लोगो मे एक प्रकार का डर बैठ गया है कि ना जाने क्या हो जायेगा? पुराने दिनो की यादे ताजा करवा रहे हैं ये भयावह द्र्श्य। दिल्ली या अमरीका मे बैठ किसी को इसका ख्याल नही आ सकता।

इसका एक कारण यह है कि पिछले छह वर्षो मे मोदी ने उसकी एक छाप खडी की है कि वो आज का चाणक्य है और वो ध्येय प्राप्ति के लिये कुछ भी करवा सकता है। मुख्य मंत्री मोदी के चाणक्य होने पर विवाद हो सकता है, पर उसकी कुछ भी कर्वा सकने कि क्षमता को उसके विरोधी भी मानते है। उसके समर्थक तो उसकी इस क्षमता का ढोल पीटते ही है। यह छाप गुजरात के लोगो मे दहशत फ़ैला रही है।

भाजपा और कांग्रेस दोनो ही लोगो के इस भय को महसूस कर रहे हैं। पर दोनो ही इस आग मे अपनी वोट की रोटी सेकने मे लगे हुए है। कांग्रेसी इस मुद्दे पर चुप्पी साध कर बैठी है। भाजपाईयो के निवेदन तो लोगो की आशंका को सही साबित कर्ने पर उतरे हुए हैं। प्रदेश प्रवक्ता रूपाणी का तो कहना है कि ट्रेन मे आग लगाने वालों का आपरेशन क्यों नही ? अब आप इसका क्या अर्थ लगायेंगे? हमने तो किया पर औरों का क्या?

उधर तीस्ता सेतल्वाड सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा रही है कि तहलका को एक सबूत के रूप मे लिया जाना चाहिये।

पर क्या किसी ने आम आदमी की दहशत का सोचा है? क्या किसी ने यह मांग की है कि इसका प्रसारण बंद किया जाये जनता के हित मे। कार्यक्रम के टेव मंगा आगे की कार्यवाही की जा सकती है।

2 comments:

संजय बेंगाणी said...

आप पहले पत्रकार है जो जनता के हित में प्रसारण बन्द करने की माँग कर रहे है. साधूवाद.

वैसे अब सब खत्म हो चुका है.

Sanjeet Tripathi said...

सही कह रहे है आप!!

वैसे मै कल यही सोच रहा था कि इस मुद्दे पर अभी तक आपकी कोई पोस्ट आई क्यों नही है!!

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