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Thursday, September 6, 2012

अब बिल्डर करें सस्ते मकान की बात

गुजरात के चुनावी मौसम में सस्ते मकानों का चर्चा सभी की जुबान पर है. कांग्रेस ने शहरों में सस्ते मकान और गावों में मकान के लिये मुफ्त जमीन का सुर्रा क्या छोड़ा अब सभी मकान की बातें कर रहे हैं. जिनके पास हैं वे सोच रहे हैं कि जुगाड़ हो जाये तो पैसे कमा लेंगे, जिनके पास मकान नही है वो सोच रहे हैं कोशिश करने मे क्या जाता है.
मोदीजी ने बरसों से मरे पड़े गुजरात हाउसिंग बोर्ड को जिन्दा कर दिया है और उनकी आशा है कि अलादीन के चिराग की तरह यह बोर्ड सभी के खुश कर देगा. मोदीजी और उनकी भाजपा के नेता लोगों को कांग्रेस से चेता रहे हैं कि बिना भरोसे की पार्टी है मकान वकान नही देगी और तुम्हारा अमुल्य मत ले लेगी.
आज महंगी महंगी स्कीमें बेचने वाले बिल्डर भी मैदान मे उतर आये. पत्रकारों से कहा कि सीमेंट और अन्य वस्तुओं के भाव बड़ते जा रहे हैं इसलिये मकानों के भाव बढ़्ते जा रहे हैं. उनकी संस्था गुजरात इन्स्टीट्यूट ओफ हाउसिंग एंड एस्टेट डेवेलोपर्स का कहना है कि २००९ मे एक वर्ग फुट निर्माण की लागत थी रु ७०० से ७५० जो आज रु ११०० से १२०० के बीच हो गई है.
उनका कहना है कि पिछले तीन महिने मे सीमेंट के थोक के भाव में ५० किलो की थैली पर र्य ८० से ९० तक बढ़ गये हैं. और अगर सरकार ने इस पर अंकुश नही लगाया तो भाव और बढ जायेंगे. उनका कहना है कि जून से सितम्बर के बीच सीमेंट के दाम नही बढते क्योंकि मांग कम होती है. पर इस बार तो गजब हो गया है. बरसात के मौसम में सीमेंट के दाम बढ गये.
पत्रकारों ने जब यह कहा कि तुम्हे क्या, तुम तो मकान के खरीदारों से वसूलोगे. उन्हे मालूम था कि इस प्रकार का सवाल आयेगा ही और उन्होंने जवाब भी तैयार रखा था. यह हम लोगों के हित मे कह रहें हैं.
हमारे देश में सभी लोगों के लिये ही काम करते हैं. यह बात अलग है कि आम आदमी आज भी आम की गुठली खा रहा है और गूदे की मौज तो ये काम करने वाले ले रहे हैं.
बिल्डरों के किस्से मे भी हकीकत तो यह है कि वैसे ही मकान बिक नही रहे हैं और उधार देने वाले रोज पैसे की उगाही के लिये चक्कर लगाते हैं. ऐसे में लागत बढने का मतलब , धंधा और भी मंदा! दूसरी तरफ चुनावी चक्कर मे पार्टीयां भी लोगों को सस्ते मकान का लालच दे रही हैं.

3 comments:

Kamalendra Arora said...

Builders think about their own profit. They offer something and give something else. Best is the trick of carpet area. builders include even margin area while selling house.

jitendra dave said...

The developers do not count land appreciation in their profit. Moreover, they do not talk about the super built up area which is nothing but pure profit. They do not take into consideration extra FSI they are getting at rate of jantri. Even at the current market rate and construction cost, the profit will be in range of 40%.

Yogesh Sharma said...

That is precisely the reason that they are able to withstand negative market. They have such a great margin that they are not bothered to reduce price to attract buyers.

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