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Monday, February 10, 2014

कच्छ के रण में अनोखी 101 किमी लम्बी दौड़

कच्छ के रण में ऐतिहासिक पुरातात्विक स्थल धोलावीरा के इर्द गिर्द एक अनोखी दौड़ का आयोजन किया गया है। उबड़ खाबड़ रास्तों पर देश और दुनिया के लोग दौड़ेंगे। हालांकि विदेशों में इस प्रकार की दौड़ काफी लोकप्रिय हो रही हैं, भारत में यह एक काफी नया प्रयोग है।
तकनीकी भाषा में इसे अल्ट्रा ट्रेल रन कहा जाता है। आम भाषा में कहा जाए तो उबड़ खाबड़ रास्तों पर होने वाली लम्बी दौड़ यानी कि अल्ट्रा ट्रेल रन। दौड़ का आनन्द ही इसमें भाग लने वालों के लिए पुरूस्कार है। इसमें भाग लेने वालों को किसी प्रकार का कोई पुरुस्कार नहीं होगा, गुजरात के पर्यटन मंत्री सौरभ पटेल, एक प्रश्न के उत्तर में स्पष्ट करते हैं।
उबड़ खाबड़ रास्तों पर दौड़, किसी प्रकार का कोई भौतिक पुरूस्कार नहीं, फिर भी इस 101 किमी लम्बी दौड़ में 11 देशों के 17 लोग भाग ले रहे हैं। दुनिया के सर्वोच्च 10 अल्ट्रा ट्रेल रनर में से छह इस दौड़ में भाग ले रहे हैं। इस दृष्टि से देखें तो यह इस प्रकार की भारत के पहली दौड़ है।

सौरभ पटेल का कहना है कि यह पहला प्रयोग होने के कारण यह एक प्रकार का अभ्यास है, इस दौड़ के लिए ढाचागत सुविधाएं तैयार करने का। हालांकि दौड़ का आयोजन विश्व के इस प्रकार की दौड़ के विख्यात दौड़ने वाले फ्रांस के गेल कौटियर हैं, फिर भी यह दौड़ रण प्रदेश में होने के कारण इसमें काफी कुछ सीखने को मिलेगा, उन्होने कहा।
अधिक से अधिक लोग भाग ले सकें इसलिए इस दौड़ को तीन श्रेणियों में रखा गया है। ये हैं 21, 42 और 101 किमी। इन तीनों के लिए समय भी निश्चित किया गया है। 21 किमी के लिए अधिकतम छह घंटे, 42 किमी के लिए 12 घंटे और 101 किमी के लिए 30 घंटे। गेल कौटियर कहते हैं कि रास्ते में विश्राम और चिकित्सक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
ऍक प्रश्न के उत्तर में उन्होने कहा कि सभी श्रेणियों मे लगभग आधा रास्ता पहाड़ी प्रकार का है।  बाकी के रास्ते में वेटलैंड जैसी चुनौती भरी स्थितियां भी हैं।
इस बार के लिए 100 की संख्या निश्चित की गई है। आज तक मे कुल 98 लोगों ने उनका नाम दर्ज कराया है। इसमें आठ महिलाएं भी हैं।
इसकी तैयारी की जानकारी देते हुए आऊटडोर जर्नल के अनिल नायर ने कहा कि पिछले कई सप्ताह से उस क्षेत्र में कई दौड़ने वाले व्यावहारिक समस्याओं का अभ्यास कर रहे हैं जिससे हर प्रकार की जरूरी सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

इस प्रसंग से जुड़ी संस्था ग्रेट एशियन आउटडोर की डायरेक्टर हिरल रावतिया ने कहा कि यह तीन दिन का कार्यक्रम 14 फरवरी से शुरू होगा। इसके लिए एक वेब साईट भी बनाई गई है, जहां इसकी सभी जानकारी उपलब्ध कराई गई है। यह है www.runtherann.com. 

Saturday, February 8, 2014

फार्म फी कमाई का जोरदार फंडा

मेरे भारत महान में से भले ही पिछली सदी की राशन की दुकान क बाहर की लाइने अब दिखलाई नहीं देती, पर कतारें तो अब भी लगी रहती हैं। स्कूलों के बाहर कतार का मौसम शुरू हो गया है। आज हमारे घर के सामने सेंट स्कूल में नर्सरी के दखले के लिए फार्म मिलने शुरू हुए।
रात से ही लम्बी लाईन शुरू हो गई थी। एक से पूछा कि माजरा क्या है? उसने बताया कि 30 बच्चे लेने हैं , केवल 500 लोग आवेदन कर सकते हैं। एक फार्म का दाम 100 रू। वो बोला साबरमती के इस स्कूल के फार्म के दाम सबसे कम हैं। कई स्कूल तो 500 और कुछ तो 700 और 1000 भी लेते हैं।
मुद्दा यह है कि फार्म के दाम का गणित क्या है? किस आधार पर फार्म का दाम निश्चित किया जाता है।
नौकरी के क्षेत्र में तो इससे भी बुरा हाल है। गुजरात सरकार ने हाल ही में तलाटी(तहसीलदार) की 1500 रिक्तियों के लिए विज्ञापन दिया। दो लाख लोगों ने फार्म भरे ।फार्म के लिए फीस केवल रू 200। इस प्रकार सरकार के पास कुल रू 4 करोड़ इकट्ठे हुए!

आप सोच सकते हैं कि 4करोड़ में तो कई तहसीलदारों की कई महिने की तनख्वाह निकल सकती है। हमारा मुद्दा तो यह है कि यह एक प्रकार का जरूरतमंदों का शोषण है और इसके विरुद्ध आम आदमी के पास कोई आवाज नही है। 

Friday, February 7, 2014

मानव सेवा के लिए धरती रत्न अवार्ड

अहमदाबाद की आशीर्वाद एजुकेशन ट्रस्ट पिछले चार वर्षों से मानव सेवा के लिए धरती रत्न अवार्ड दे रही है। इस वर्ष यह अवार्ड गुजरात के विभिन्न जिलों के ग्यारह व्यक्तियों को दिया जा रहा है।
इस वर्ष विशेष यह है कि संस्था किडनी के क्षेत्र में अमूल्य योगदान देने वाले डॉ एच एल त्रिवेदी को विशिष्ट सम्मान दे रही है। काफी गरीबी में पले बढ़े और चार्टर्ड अकाउंटेंट बने आर सी पटेल द्वारा स्थापित यह संस्था १९७७ से विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत है।
श्री पटेल का कहना है कि वे विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर शिक्षा और चिकित्सा, में लोगों को और अन्य समाजसेवियों को अन्य की मदद के लिए प्रोत्साहित करना चाहते हैं जिससे औरों को उनकी तरह मुश्किलों का सामना न करना पड़े।
गुजरात की राज्यपाल शनीवार फरवरी ८ अहमदाबाद में एक कार्यक्रम में ये अवार्ड देंगी।

जिन्हें यह अवार्ड दिया जा रहा है वे हैं , अहमदाबाद के गोविंदभाई पटेल , राजकोट के प्रफुलकुमार व्यास, धरमपुर के डॉ दक्षाबेन पटेल, वीसनगर के भरतकुमार बी पटेल, अहमदाबाद के धर्मेश पटेल और गं स्व चंपाबेन पटेल, महेसाना के डॉ डी एम दवे, अहमदाबाद के उपेन्द्रभाई एम पटेल, दिनेशचन्द्र एम पटेल, योगेशभाई  डी रावल, अमरीशभाई त्रीपाठी और जगुदन के संजय भावसार और तुला पटेल।

ऑटोमैटिक सेलेरियो गेम चेंजर कार बनेगी 23.1 के सहारे

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारूति का दावा है कि उसकी नई कार ऑटोमैटिक गीयर वाली सेलेरियो यात्री कार के क्षेत्र में एक नया प्रवाह शुरू करेगी। कंपनी का मानना है कि जिस प्रकार 90 के दशक में एसी आया, 2000 में पॉवर स्टीयरिंग उसी तरह से अब ऑटोमैटिक गीयर वाली कारों का बाज़ार विकसित होगा।
अहमदाबाद में आज यह कार लांच हुई। इस अवसर पर कंपनी के पंकज निरुला ने कहा कि इस कार की दो विशेषताएं लोगों को आकर्षित कर रहीं हैं। प्रथम तो यह कि शहर के भीड़ भाड़ वाले क्षेत्रों मे यह चालक को बार बार गीयर बदलनें की झंझट से मुक्ति दिलायेगी।
दूसरा यह कि इसकी 23.1 किमी की एवरेज इसे इस क्षेत्र की कारों में सबसे अलग उभारती है। इससे भी विशेष यह है कि जहां अन्य ऑटोमैटिक गीयर वाली कारें छह लाख की रेंज में है यह कार पांच लाख की रेंज में है।
कंपनी का दावा है कि इसमे चालक और यात्री दोनों की सुविधाओं का काफी ध्यान रखा गया है।

कुछ भी हो इसके दाम और इसकी एवरेज दोनो ने ही कार इच्छुकों में काफी जिज्ञासा जगाई है।

Monday, February 3, 2014

51 शक्तिपीठ एक स्थल पर अंबाजी में

यदि कोई व्यक्ति सभी 51 शक्तिपीठों का एक ही स्थल पर दर्शन करना चाहता है तो देश में गुजरात में अंबाजी शक्तिपीठ एकमात्र ऐसा स्थल है जहां वह यह कर सकता है।
इन 51 शक्तिपीठों की प्राणप्रतिष्ठा अगले सप्ताह की जाएगी और फिर अंबाजी की तलहटी की यह 51 शक्तिपीठों की परिक्रमा लोगों के दर्शन पूजन के लिए खोल दी जाएगी।
इसकी कई विशेषताएं हैं । प्रथम तो यह कि पूरे देश में यह अपने प्रकार का पहला प्रयोग है। 51 शक्तिपीठ देश के 17 राज्यों और विदेशों में स्थित हैं। सभी के लिए इन स्थलों पर जाना संभव नहीं है इसलिए यह एक बहुत बड़ा आकर्षण बन जाएगा।
हालांकि ये सभी शक्तिपीठ प्रतिकृतियां हैं , पर यहां पूजन अर्चन भी किया जा सकता है और वह भी मूल शक्तिपीठ की शैली और परम्परा में। आरासुरी अंबाजी ट्र्स्ट जिसने यह परियोजना कार्यान्वित की है, उसने भारत में स्थित सभी शक्तिपीठों में ब्राह्म्ण भेज उन्हें शक्तिपीठ की पूजा शैली में एक माह का प्रशिक्षण दिलवाया है।
अब ये प्रशिक्षित पंडित यहां पर प्रत्येक शक्तिपीठ की पूजा अर्चना वहीं की शैली में करवाएंगें। ये शक्तिपीठ तलहती की 2.8 किमी की परिक्रमा के स्थित है। यहां हर प्रकार की जन सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

11,12 और13 फरवरी को इन शक्तिपीठों की प्राणप्रतिष्ठा होगी।

Wednesday, January 29, 2014

अहमदाबाद में शास्त्रीय संगीत का मिनी सप्तक

इस शुक्रवार से शहर में बाल एवं युवा कलाकारों का अनोखा शास्त्रीय कार्यक्रम शुरू हो रहा है। इस तीन दिन के कार्यक्रम में ५० कलाकार तबला, सितार , वायोलिन , सोलो तबला और फ्यूजन संगीत के कार्यक्रम पेश करेंगें। इसकी विशेषता यह है कि इसमे सबसे छोटे कलाकार १२ वर्ष के हैं और वे पिछले लगभग छह वर्ष से इसका अभ्यास कर रहे हैं।

तालय संस्था द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का यह दूसरा वर्ष है। इसकी जानकारी देते हुए संस्था के प्रणेता मुंजाल महेता ने कहा कि संस्था का उद्देश्य उभरते युवा कलाकारों को एक मंच उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम में बारह से २८ वर्ष तक के कलाकार हैं ।
शास्त्रीय संगीत की बढ़्ती लोकप्रियता के बारे में उन्होने कहा कि आजकल काफी युवा कलाकार आगे आ रहे हैं। मुंजाल महेता स्वयं एक प्रसिद्ध तबला वादक हैं और पिछले लगभग २० वर्ष से अहमदाबाद में तबला वादन सिखा रहे हैं। पिछले वर्ष इस कार्यक्रम में ६५ युवा कलाकारों ने भाग लिया था। १५०० से अधिक श्रोता आये थे।
इस वर्ष का यह कार्यक्रम तीन बड़े संगीतकारों को समर्पित है। ये हैं उस्ताद हिदायत खान, उस्ताद रहमान खान और नन्दन महेता। यह कार्यक्रम “समुत्कर्ष” में शाम सात बजे शुरू होगा।

तालय के ट्र्स्टी डॉ. हेमन्त भट्ट ने कहा कि तालय कलाकारों के इस प्रश्न का जवाब है कि शास्त्रीय संगीत सीखने के बाद क्या? यह वो मंच है जो उन्हे एक पहचान और प्रोत्साहन दिलवाने के लिए बना है।

Thursday, December 26, 2013

आयुर्वेद चिकित्सकों का दो दिवसीय महा सम्मेलन

अहमदाबाद में शनिवार को आयुर्वेद चिकित्सकों का दो दिवसीय महा सम्मेलन शुरू हो रहा है जिसमे देश के लगभग १५०० आयुर्वेद चिकित्सक और छात्र भाग लेंगें। इस कार्यक्रम में एक निशुल्क चिकित्सका कैम्प का आयोजन भी किया गया है। इस महा सम्मेलन का आयोजन आयुर्वेद व्यासपीठ गुजरात द्वारा किया गया है।
यह जानकारी देते हुए आयुर्वेद व्यासपीठ गुजरात के अध्यक्ष वैद्य हितेश जानी ने कहा कि यह इस प्रकार का पहला सम्मेलन है और इसका मुख्य उद्देश्य लोगों में आयुर्वेद का प्रचार प्रसार करना है। महा सम्मेलन में विभिन्न विषयों पर आयुर्वेद चिकित्सक उनके अनुसन्धान के बारे में जानकारी देंगें।
एक प्रश्न के उत्तर में महा सम्मेलन के ओर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी वैद्य राजेश ठक्कर ने कहा कि इस कार्यक्रम में आयुर्वेद के क्षेत्र में अच्छा काम करने वाले १५१ लोगों का सम्मान किया जाएगा। स्वस्थ जीवन शैली प्रदर्शनी और एक्स्पो में दिनचर्या और ऋतुचर्या प्रदर्शन से ले गाय के चिकित्सीय महत्व के प्रदर्शन का आयोजन किया गया है।
निशुल्क कैम्प में दर्द रहित दांत निकालना, लीच थैरेपी द्वारा चर्म चिकित्सा, गर्भ संस्कार, कर्ण वेधन द्वारा अस्थमा निदान आयुर्वेद द्वारा व्यसन मुक्ति, आंख के रोगों के लिए तर्पण चिकित्सा, ह्र्दय रोग में पंच कर्म जैसे विषय हैं।

इस कार्यक्रम का आयोजन स्वामीनारायण गुरुकुल छारोड़ी में किया गया है। 
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