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Friday, May 1, 2015

गुजरात सरकार की हिन्दी की बिन्दी

अपनी गुजरात सरकार अनोखी है। मोदीजी द्वारा शुरू किए गए और अपनी आनन्दीबहन द्वारा चलाए जा रहे गुजरात मॉडल की धूम मची हुई है मोदीजी के हिन्दुस्तान में। यह बात अलग है कि गुजरात मॉडल पर किताबें लिखी जा रही हैं, पर कोई यह नहीं बता सकता कि यह मॉडल क्या बला है।
अपने राहुल बाबा की कांग्रेस वाले चीख चीख कर कहते हैं कि राज्य को पैसे वाले दोस्तों को बेच देना ही गुजरात मॉडल है। पर उनका विश्वास कौन करे?
एक बात तो है। अपने मोदीजी हिन्दी में भाषण देते देते गांधीनगर से 7 आर सी आर पहुंच गए है। हिन्दी की बदौलत उनकी यह प्रगति देख दिल्ली के कुछ बड़े बाबुओं ने तो सरकारी कामकाज में  हिन्दी का फतवा भी जारी करवा दिया था। पर जैसा कि मोदीजी की सरकार में आम तौर पर हो रहा है, इस मुद्दे पर सरकार गुलाट मार गई। अब तो कोई इस पर कोई चर्चा भी नहीं करता!
दिल्ली और गुजरात में आजकल एक नई तरह की जुगलबंदी शुरू हो गई है। अधिकतर विदेश के दौरे पर रहने वाले अपने प्रधान मंत्रीजी को गुजरात के बिना नहीं चलता। दिल्ली में गुजरात मॉडल के साथ साथ गुजरात के आई ए एस चर्चा में हैं। अपने मोदीजी ने पी एम ओ को विशुद्ध गुजराती बना दिया है। खानसामा से खास अफसरान सभी गुजरात के!!
इधर गुजरात सरकार मोदीजी के गुण गाते नहीं थकती। भले मोदीजी दिल्ली में हैं, गुजरात सरकार के विज्ञापनों में मोदीजी की तस्वीर ध्रुव तारे की तरह अटल स्थान ले रही है। है न जुगलबन्दी।
जब गुजरात सरकार ने देखा कि हिन्दी भाषणों तक ही ठीक है, तो सरकार ने हिन्दी को बिन्दी बनाने का कार्यक्रम शुरू कर दिया। सूचना विभाग मुख्यमंत्री के कुछ भाषणों की हिन्दी प्रेस विज्ञप्ति जारी करता है। इसका मापदंड हमें आज तक समझ नहीं आया है।
इससे भी बड़ी बात तो यह है कि अब सरकारी विज्ञापन अधिकतर कुछ गुजराती अखबारों तक ही सीमित कर दिए गए हैं । जब हमने एक आला अधिकारी से इस बारे में चर्चा कि तो वे तपाक से बोले सरकार क्या करे, विज्ञापन दाता विभाग केवल गुजराती के कुछ चुने हुए अखबारों में ही विज्ञापन देना चाहते हैं। तो भैय्ये विज्ञप्ति सभी अखबारों को क्यों भेजते हो?
खैर हम बात हिन्दी की बिन्दी की कर रहे थे। सरकार के अधिकतर विज्ञापन गुजराती में होते हैं भले फिर ये विज्ञापन अंग्रेजी या हिन्दी अखबारों में छपने के लिए हों। जय जय गरवी गुजरात।
इस बार गरवी गुजरात के स्थापना दिन का विज्ञापन हिन्दी में आया। पढ़ने के बाद हमे हमारे हिन्दी ज्ञान पर शंका हो गई। विज्ञापन कहता है

विकास में सभी की हिस्सेदारी हैं

गुजरात की आज और कल उज्ज्वल है

सभी गुजरातीयों को राज्यस्तरिय समारोह तापी जिले में

पहेली समझ ऊपर के वाक्यों मे गलतियां खोज अपना हिन्दी ज्ञान जांचे
है न गुजरात सरकार का हिन्दी को बिन्दी बनाओ अभियान

Monday, February 17, 2014

मोदीजी के कौशल्य रथ

चुनावी मौसम यानि कि गुजरात में रथ का मौसम। हालांकि भाजपा की रथ प्रथा को अपने आडवाणीजी ने शुरू किया था, अब तो यह उनके शिष्य नरेन्द्र मोदीजी का ट्रेड मार्क है।
अभी कुछ दिन पहले अम्बाजी जाना हुआ। जाना क्या हुआ, अपने मोदीजी के सूचना विभाग के अधिकारी 51 शक्तिपीठ की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए ले गए थे। जब वहां पहुंचे उस समय इस तीर्थनगरी में एक लम्बा जुलूस निकल रहा था।
वहां रथ थे। उन पर यदि कोई वस्तु किसी की भी नजर खींचती थी तो वह थी मोदीजी की बड़ी बड़ी तस्वीरें। वैसे तो पूरे रस्ते हर दो पांच किमी के अंतर पर 51 शक्तिपीठ के विज्ञापन बोर्ड में से मोदीजी झांकते हुए दिख जाते थे।
किसी के भी दिमाग में यह सवाल उठ सकता है कि यह किस का विज्ञापन है? मोदीजी का या शक्तिपीठ स्थल का? खैर हम गुजरात में रहने वालों के दिमाग में यह कीड़ा अब नहीं कुलबुलाता। कारण? यह तो रोज की बात हो गई है।
आज सरकारी प्रवक्ता मंत्री सौरभ पटेलजी पत्रकारों से मिले। उन्होने बताया कि किस प्रकार अपने मोदीजी गुजरात के युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए पांचमुखी कार्यक्रम लाए हैं। इसका उद्देश्य है गुजरात के युवा के कौशल का इस प्रकार से विकास जिससे उसे रोजगारी मिल सके।
उन्होने कहा कि उद्योग उन्हे उसकी जरूरत के अनुसार ट्रेनिंग देगा। सरकार इस प्रशिक्षण का खर्च उठाएगी। उद्योग का, उद्योग के द्वारा और उद्योग के लिए। सब कुछ उद्योगमय! सौरभजी ने कहा कि छोटे छोटे गांव जहां आई टी आई नहीं हैं वहां कौशल्य रथ जाएगा।
पत्रकारों ने पूछा कि कितने रथ, कैसे रथ? वहां उपस्थित अधिकारी सोनल मिश्रा बोली फिलहाल तो चार रथों का आयोजन किया गया है। अधिकतर के दिमाग में एक प्रश्न था मोबाईल ट्रेनिंग सेंटर क्यो नहीं? रथ क्यों? पर किसी ने पूछा नहीं। कहीं सौरभभाई थैंक्यू थैंक्यू न बोल दें।

सोनलजी ने कहा कि यह चार क्षेत्रों में लगाया जाएगा और उसकी सफलता के आधार पर अन्य क्षेत्रों के बारे में सोचा जाएगा! कुछ भी हो। किसी को एक बात पूछने की जरूरत ही महसूस नहीं हुई। क्या इस रथ पर मोदी का फोटो होगा? सभी को यह लगा होगा कि फोटो तो रथ बनने से पहले ही लग जाएगा।

Saturday, February 15, 2014

आयुर्वेद आज की चिकित्सा पद्धति

आयुर्वेद कोई पुरानी घिसी पिटी चिकित्सा पद्धति नहीं है। आज के युग की बीमारियों के काफी प्रभावी हैं। जिस तरह लोग आज की एलोपथी चिकित्सा से तंग आ रहे हैं, आयुर्वेद एक प्रभावी विकल्प के रूप में उभर रहा है।
इसी मुद्दे को केन्द्र में रखते हुए अहमदाबाद में पिछले महिने एक आयुर्वेद सम्मेलन हुआ था। यह आरएसएस प्रायोजित एक संस्था द्वारा किया गया था। इस माह गुजरात सरकार आयुर्वेद पर एक राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित कर रही है। सरकार का दावा है कि इस प्रकार का यह पहला कार्यक्रम है। इसमें देश विदेश के 30 से अधिक विशेषज्ञ भाग लेने वाले हैं।
25 फरवरी को आयोजित इस कार्यक्रम में  सरकार का कहना है कि 7000 से अधिक आयुर्वेद से जुड़े लोग भाग लेने वाले हैं। इसके पहले सेशन में 21वी सदी में आयुर्वेद विषय पर गुजरात आयुर्वेद युनिवर्सिटी के उप कुलपति राजेश कोटेचा, जर्मनी से द रोसेनबर्ग यूरोपियन एकेडमी ओफ आयुर्वेद के निदेशक मार्क रोजेनबर्ग , ऑल इन्डिया इन्स्टीट्युट ओफ आयुर्वेद के के निदेशक अभिमन्यु कुमार और मेदांता के जी गीथाकृष्णन में उनके विचार रखेंगे।
बाद के दो सेशन में आठ रसप्रद विषय हैं। इसमे हैं मेटाबोलिक डिसऑर्डर्स, ऑटोइम्यून डिसऑर्डर्स, साइकिएट्रिक डिसऑर्डर्स, शल्य शालाक्य में हाल में हुई प्रगति और रसायन थेरेपी।
मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी इस सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे।

Friday, February 14, 2014

लज्जा गोस्वामी को वेलेन्टाइन डे गिफ्ट- पु इन्स्पेक्टर की नौकरी

गुजरात की लज्जा गोस्वामी पिछले चार वर्षों से उसके शूटिंग के कारनामों से सुर्खिओं में छा रहीं हैं। २०१० में कोमनवेल्थ गेम्स में उन्हें ब्रोंज मेडल मिला था तो पिछले वर्ष २०१३ में वर्ल्ड कप में उनके निशाने ने और ऊंची बुलंदियों को छू लिया।
मोदीजी ने उन्हें हर बार सराहा। पर आज वेलेन्टाइन डे के अवसर पर तो मोदीजी ने उन्हें एक ऐतिहासिक तोहफा दे डाला। इस बन्दूक वाली लज्जा को उन्होने पुलिस में इन्सपेक्टर की नौकरी दे दी। यह जिस तरह से हुआ वो काफी रोचक है।
अपने गृह सचिव एस के नन्दाजी ने आनन फानन में मीडिया वालों को आज दोपहर को बुला लिया और घोषणा कर डाली कि लज्जा को पुलिस में इन्सपेक्टर की नौकरी दे दी गई है और वे एक ब्रांड एम्बेसडर के रूप में काम करेंगी। महिला सशक्तिकरण का एक कदम आदि आदि।
इस मीडिया कांफ्रेंस में पुलिस के आला अफसर भी बैठे थे। नन्दाजी ने बताया कि स्पोर्ट कोटा में गुजरात पुलिस में भरती होने वाली वे पहली महिला हैं। मोदीजी महिला सशक्तिकरण के प्रखर हिमायती हैं। उन्हे मिले हुए तोहफों की नीलामी कर मोदीजी कन्या शिक्षा को प्रोत्साहन देने का काम बरसों से कर रहे हैं।

पर यह तो उन्होने जोरदार कर दिया। भले ही लज्जा को यह सब चार साल बाद मिला। भले ही इस प्रकार का कदम मोदीजी के १२ वर्ष के शासन के बाद आया। अरे भई मोदीजी अब ७ आर सी आर की मंजिल के सफर पर चल पड़े हैं।

Monday, February 10, 2014

कच्छ के रण में अनोखी 101 किमी लम्बी दौड़

कच्छ के रण में ऐतिहासिक पुरातात्विक स्थल धोलावीरा के इर्द गिर्द एक अनोखी दौड़ का आयोजन किया गया है। उबड़ खाबड़ रास्तों पर देश और दुनिया के लोग दौड़ेंगे। हालांकि विदेशों में इस प्रकार की दौड़ काफी लोकप्रिय हो रही हैं, भारत में यह एक काफी नया प्रयोग है।
तकनीकी भाषा में इसे अल्ट्रा ट्रेल रन कहा जाता है। आम भाषा में कहा जाए तो उबड़ खाबड़ रास्तों पर होने वाली लम्बी दौड़ यानी कि अल्ट्रा ट्रेल रन। दौड़ का आनन्द ही इसमें भाग लने वालों के लिए पुरूस्कार है। इसमें भाग लेने वालों को किसी प्रकार का कोई पुरुस्कार नहीं होगा, गुजरात के पर्यटन मंत्री सौरभ पटेल, एक प्रश्न के उत्तर में स्पष्ट करते हैं।
उबड़ खाबड़ रास्तों पर दौड़, किसी प्रकार का कोई भौतिक पुरूस्कार नहीं, फिर भी इस 101 किमी लम्बी दौड़ में 11 देशों के 17 लोग भाग ले रहे हैं। दुनिया के सर्वोच्च 10 अल्ट्रा ट्रेल रनर में से छह इस दौड़ में भाग ले रहे हैं। इस दृष्टि से देखें तो यह इस प्रकार की भारत के पहली दौड़ है।

सौरभ पटेल का कहना है कि यह पहला प्रयोग होने के कारण यह एक प्रकार का अभ्यास है, इस दौड़ के लिए ढाचागत सुविधाएं तैयार करने का। हालांकि दौड़ का आयोजन विश्व के इस प्रकार की दौड़ के विख्यात दौड़ने वाले फ्रांस के गेल कौटियर हैं, फिर भी यह दौड़ रण प्रदेश में होने के कारण इसमें काफी कुछ सीखने को मिलेगा, उन्होने कहा।
अधिक से अधिक लोग भाग ले सकें इसलिए इस दौड़ को तीन श्रेणियों में रखा गया है। ये हैं 21, 42 और 101 किमी। इन तीनों के लिए समय भी निश्चित किया गया है। 21 किमी के लिए अधिकतम छह घंटे, 42 किमी के लिए 12 घंटे और 101 किमी के लिए 30 घंटे। गेल कौटियर कहते हैं कि रास्ते में विश्राम और चिकित्सक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
ऍक प्रश्न के उत्तर में उन्होने कहा कि सभी श्रेणियों मे लगभग आधा रास्ता पहाड़ी प्रकार का है।  बाकी के रास्ते में वेटलैंड जैसी चुनौती भरी स्थितियां भी हैं।
इस बार के लिए 100 की संख्या निश्चित की गई है। आज तक मे कुल 98 लोगों ने उनका नाम दर्ज कराया है। इसमें आठ महिलाएं भी हैं।
इसकी तैयारी की जानकारी देते हुए आऊटडोर जर्नल के अनिल नायर ने कहा कि पिछले कई सप्ताह से उस क्षेत्र में कई दौड़ने वाले व्यावहारिक समस्याओं का अभ्यास कर रहे हैं जिससे हर प्रकार की जरूरी सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

इस प्रसंग से जुड़ी संस्था ग्रेट एशियन आउटडोर की डायरेक्टर हिरल रावतिया ने कहा कि यह तीन दिन का कार्यक्रम 14 फरवरी से शुरू होगा। इसके लिए एक वेब साईट भी बनाई गई है, जहां इसकी सभी जानकारी उपलब्ध कराई गई है। यह है www.runtherann.com. 
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