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Friday, February 7, 2014

ऑटोमैटिक सेलेरियो गेम चेंजर कार बनेगी 23.1 के सहारे

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारूति का दावा है कि उसकी नई कार ऑटोमैटिक गीयर वाली सेलेरियो यात्री कार के क्षेत्र में एक नया प्रवाह शुरू करेगी। कंपनी का मानना है कि जिस प्रकार 90 के दशक में एसी आया, 2000 में पॉवर स्टीयरिंग उसी तरह से अब ऑटोमैटिक गीयर वाली कारों का बाज़ार विकसित होगा।
अहमदाबाद में आज यह कार लांच हुई। इस अवसर पर कंपनी के पंकज निरुला ने कहा कि इस कार की दो विशेषताएं लोगों को आकर्षित कर रहीं हैं। प्रथम तो यह कि शहर के भीड़ भाड़ वाले क्षेत्रों मे यह चालक को बार बार गीयर बदलनें की झंझट से मुक्ति दिलायेगी।
दूसरा यह कि इसकी 23.1 किमी की एवरेज इसे इस क्षेत्र की कारों में सबसे अलग उभारती है। इससे भी विशेष यह है कि जहां अन्य ऑटोमैटिक गीयर वाली कारें छह लाख की रेंज में है यह कार पांच लाख की रेंज में है।
कंपनी का दावा है कि इसमे चालक और यात्री दोनों की सुविधाओं का काफी ध्यान रखा गया है।

कुछ भी हो इसके दाम और इसकी एवरेज दोनो ने ही कार इच्छुकों में काफी जिज्ञासा जगाई है।

Monday, February 3, 2014

51 शक्तिपीठ एक स्थल पर अंबाजी में

यदि कोई व्यक्ति सभी 51 शक्तिपीठों का एक ही स्थल पर दर्शन करना चाहता है तो देश में गुजरात में अंबाजी शक्तिपीठ एकमात्र ऐसा स्थल है जहां वह यह कर सकता है।
इन 51 शक्तिपीठों की प्राणप्रतिष्ठा अगले सप्ताह की जाएगी और फिर अंबाजी की तलहटी की यह 51 शक्तिपीठों की परिक्रमा लोगों के दर्शन पूजन के लिए खोल दी जाएगी।
इसकी कई विशेषताएं हैं । प्रथम तो यह कि पूरे देश में यह अपने प्रकार का पहला प्रयोग है। 51 शक्तिपीठ देश के 17 राज्यों और विदेशों में स्थित हैं। सभी के लिए इन स्थलों पर जाना संभव नहीं है इसलिए यह एक बहुत बड़ा आकर्षण बन जाएगा।
हालांकि ये सभी शक्तिपीठ प्रतिकृतियां हैं , पर यहां पूजन अर्चन भी किया जा सकता है और वह भी मूल शक्तिपीठ की शैली और परम्परा में। आरासुरी अंबाजी ट्र्स्ट जिसने यह परियोजना कार्यान्वित की है, उसने भारत में स्थित सभी शक्तिपीठों में ब्राह्म्ण भेज उन्हें शक्तिपीठ की पूजा शैली में एक माह का प्रशिक्षण दिलवाया है।
अब ये प्रशिक्षित पंडित यहां पर प्रत्येक शक्तिपीठ की पूजा अर्चना वहीं की शैली में करवाएंगें। ये शक्तिपीठ तलहती की 2.8 किमी की परिक्रमा के स्थित है। यहां हर प्रकार की जन सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

11,12 और13 फरवरी को इन शक्तिपीठों की प्राणप्रतिष्ठा होगी।

Wednesday, January 29, 2014

अहमदाबाद में शास्त्रीय संगीत का मिनी सप्तक

इस शुक्रवार से शहर में बाल एवं युवा कलाकारों का अनोखा शास्त्रीय कार्यक्रम शुरू हो रहा है। इस तीन दिन के कार्यक्रम में ५० कलाकार तबला, सितार , वायोलिन , सोलो तबला और फ्यूजन संगीत के कार्यक्रम पेश करेंगें। इसकी विशेषता यह है कि इसमे सबसे छोटे कलाकार १२ वर्ष के हैं और वे पिछले लगभग छह वर्ष से इसका अभ्यास कर रहे हैं।

तालय संस्था द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का यह दूसरा वर्ष है। इसकी जानकारी देते हुए संस्था के प्रणेता मुंजाल महेता ने कहा कि संस्था का उद्देश्य उभरते युवा कलाकारों को एक मंच उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम में बारह से २८ वर्ष तक के कलाकार हैं ।
शास्त्रीय संगीत की बढ़्ती लोकप्रियता के बारे में उन्होने कहा कि आजकल काफी युवा कलाकार आगे आ रहे हैं। मुंजाल महेता स्वयं एक प्रसिद्ध तबला वादक हैं और पिछले लगभग २० वर्ष से अहमदाबाद में तबला वादन सिखा रहे हैं। पिछले वर्ष इस कार्यक्रम में ६५ युवा कलाकारों ने भाग लिया था। १५०० से अधिक श्रोता आये थे।
इस वर्ष का यह कार्यक्रम तीन बड़े संगीतकारों को समर्पित है। ये हैं उस्ताद हिदायत खान, उस्ताद रहमान खान और नन्दन महेता। यह कार्यक्रम “समुत्कर्ष” में शाम सात बजे शुरू होगा।

तालय के ट्र्स्टी डॉ. हेमन्त भट्ट ने कहा कि तालय कलाकारों के इस प्रश्न का जवाब है कि शास्त्रीय संगीत सीखने के बाद क्या? यह वो मंच है जो उन्हे एक पहचान और प्रोत्साहन दिलवाने के लिए बना है।

Thursday, December 26, 2013

आयुर्वेद चिकित्सकों का दो दिवसीय महा सम्मेलन

अहमदाबाद में शनिवार को आयुर्वेद चिकित्सकों का दो दिवसीय महा सम्मेलन शुरू हो रहा है जिसमे देश के लगभग १५०० आयुर्वेद चिकित्सक और छात्र भाग लेंगें। इस कार्यक्रम में एक निशुल्क चिकित्सका कैम्प का आयोजन भी किया गया है। इस महा सम्मेलन का आयोजन आयुर्वेद व्यासपीठ गुजरात द्वारा किया गया है।
यह जानकारी देते हुए आयुर्वेद व्यासपीठ गुजरात के अध्यक्ष वैद्य हितेश जानी ने कहा कि यह इस प्रकार का पहला सम्मेलन है और इसका मुख्य उद्देश्य लोगों में आयुर्वेद का प्रचार प्रसार करना है। महा सम्मेलन में विभिन्न विषयों पर आयुर्वेद चिकित्सक उनके अनुसन्धान के बारे में जानकारी देंगें।
एक प्रश्न के उत्तर में महा सम्मेलन के ओर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी वैद्य राजेश ठक्कर ने कहा कि इस कार्यक्रम में आयुर्वेद के क्षेत्र में अच्छा काम करने वाले १५१ लोगों का सम्मान किया जाएगा। स्वस्थ जीवन शैली प्रदर्शनी और एक्स्पो में दिनचर्या और ऋतुचर्या प्रदर्शन से ले गाय के चिकित्सीय महत्व के प्रदर्शन का आयोजन किया गया है।
निशुल्क कैम्प में दर्द रहित दांत निकालना, लीच थैरेपी द्वारा चर्म चिकित्सा, गर्भ संस्कार, कर्ण वेधन द्वारा अस्थमा निदान आयुर्वेद द्वारा व्यसन मुक्ति, आंख के रोगों के लिए तर्पण चिकित्सा, ह्र्दय रोग में पंच कर्म जैसे विषय हैं।

इस कार्यक्रम का आयोजन स्वामीनारायण गुरुकुल छारोड़ी में किया गया है। 

Friday, February 22, 2013




इन्टेलीजेंस एजेंसियों का इन्टेलीजेंट खेल !

भारत में कोई भी आतंकवाद की घटना के साथ दो चीज जरूर जुड़ी हुई हैं । पहला तो यह कि इस घटना की जानकारी इन्टेलीजेंस एजेंसी को थी और यह जानकारी सम्बन्धित सरकार की दी गई थी। और दूसरा इलेक्ट्रोनिक मीडिया से ले सोशल मीडिया तक सभी जगह सरकार को गालियां और हिंसा के रोंगटे खड़े कर देने वाले दृश्य। हैदराबाद की घटना मे भी यही सब कुछ हुआ।
इस घटना से कुछ घंटे पहले विधान सभा में मज़ेदार बात हुई। गृह सचिव एस के नन्दा को पत्रकारों ने घेर लिया। वे आई पी एस सिन्घल के गिरफ्तारी के बारे में जानना चाहते थे । पत्रकारों का कहना था सिन्घल  को सी बी आई ने गिरफ्तार कर लिया है। नन्दाजी का कहना था कि गिरफ्तारी के पूरे आसार हैं।
कुछ देर बाद जब नन्दाजी लिफ्ट में नीचे उतर रहे थे एक इन्टेलीजेंस का बंदा लिफ्ट में आया और नन्दाजी को एक एस एम एस पढ़ाया। बाद में मालूम पड़ा कि वह संदेश सिन्घल के गिरफ्तार होने के बारे में था। आप सोच सकते हैं कि अपने इन्टेलीजेंस वाले किस तरह से काम करते हैं।
तीन दशक की पत्रकारिता में इस प्रकार की बहुत सारी घटनाएं देखी हैं। हर प्रकार की जानकारी इन्टेलीजेंस के नाम पर इधर उधर होती रहती है। अगर वह जानकारी घटना मे तबदील होती है तो इन्टेलीजेंस के बंदे दावा करते हैं कि यह जानकारी उन्हें पहले से थी।
हमारे मित्र, एक उच्च पुलिस अधिकारी,  का कहना है कि यदि इन्टेलीजेंस की जानकारी पर काम करने बैठें तो कुछ और काम हो ही नही और जानकारी पर भी पूरा काम नही हो पाये। हमारी इन्टेलीजेंस की समस्या है कि उसकी जानकारी आधी अधूरी होती है। उस पर कोई भी कार्रवाई लगभग असम्भव होती है।
1994 के करीब की बात है। डी जे पांडियन उस समय गृह विभाग में डेप्युटी सेक्रेटरी थे। उनका एक काफी प्रिय जोक था। उनका कहना था कि सुबह अगर वो लॉ एन्ड ऑर्डर की किसी समस्या की चर्चा करते हुए कोई अटकल करते हैं तो शाम को वही बात उनकी टेबल पर इन्टेलीजेंस के रूप में आ जाती है!
देखा । अगर कुछ हुआ तो इन्टेलीजेंस एजेंसी सही और सरकार गलत और नही हुआ तो इन्टेलीजेंस वाले कह सकते हैं कि सामने वालों को मालूम हो गया है कि हमें मालूम हो गया है इसलिये उन्होने प्लान बदल दिया!!!

Thursday, February 21, 2013



विधान सभा की भगवा छटा

गुजरात विधान सभा का यह सत्र कई अर्थों में नया है। पिछले सात टर्म से भी अधिक समय से गुजरात विधान सभा के सदस्य और वित्त मंत्री रह चुके वजुभाई वाला अब विधान सभा अध्यक्ष हैं।

बार बार विधान सभा में तरह तरह के कोमेंट के लिये मशहूर अपने नितिनभाई अब वित्त मंत्री जैसी भारी पोस्ट पर बैठ सरकार को बचाने के फायर फाईटिंग ऑपरेशन में इस तरह फंसे दिखाई देते हैं कि कोमेंट वोमेंट कम ही कर्ते दिखलाई देते हैं।

खैर मुद्दा तो भगवा छटा का है। प्रतिपक्ष के नेता शंकरसिंह वाघेला  किसी जमाने के भाजपा के कद्दावर नेता हैं। गुजरात में भाजपा की नींव रखने वाले शंकरसिंह वाघेला  ने गुजरात में भाजपा को तोड़ यह भी बता दिया कि भाजपा अटूट नही हैं। वह भी और दलों की तरह ही है। हां पर भाजपा में शंकरसिंह वाघेला  की टक्कर का कोई और नेता नही है। पूरे देश में।

दो बार मुख्य मंत्री रह चुके अपने केशूभाई पटेल विरोध का दूसरा छोर हैं। दो सदस्यों वाली गुजरात परिवर्तन पार्टी के नेता हैं। पूरी जिंदगी आर एस एस से जुड़े रहे अपने केशूभाई पटेल ने मुख्य मंत्री नरेन्द्र मोदी को कोसते हुए भाजपा छोड़ दी और चुनाव से कुछ महीने पहले गुजरात परिवर्तन पार्टी बना ली।

पर केशुबापा के नाम से मशहूर अपने केशूभाई पटेल की किस्सा तो पहले प्यार के टूटने वाले आशिक जैसा है। दिल तो उनका अभी भी भगवा ही है। इसलिये चुनाव के दौरान वे यह कहते थे कि असली भाजपा तो उनकी है।

आप विधान सभा अध्यक्ष वजुभाई वाला की हालत की कल्पना कर सकते हैं। सदन मे वे जहां भी नज़र करते हैं , बुलन्दी पर भगवा ही दिखलाई देता है। फिर चाहे वो उनके अपने भाजपा वाले मुख्य मंत्री नरेन्द्र मोदी हों या फिर भूपू भाजपाई शंकरसिंह वाघेला  और केशूभाई पटेल हों।

तीनों की विषेशता यह है कि , तीनों एक ही स्कूल की प्रोडेक्ट हैं। विचार से ले भाषण देने की कला तक।

इसलिये आज जब शंकरसिंह वाघेला  ने अपना धांसू भाषण दिया तो भाजपाईयों के पास उसका कोई तोड़ ही नही था। क्योंकि छटा तो भगवा थी!

Wednesday, February 20, 2013

बजट और टैक्स का खेल


पिछले कई वर्षों से सरकार का बजट बस आंकडों का मायाजाल बन कर रह गया है। सरकार करों मे वृद्धी और कटौती के खेल से आम आदमी को छलती रहती है। अब गुजरात सरकार के इस बार के बजट को ही ले लो।
वित्त मंत्री नितिन पटेल का यह पहला बजट था। वैसे इसका कोई खास फर्क नही पड़ता। बजट तो बाबू ही बनाते हैं। पर बाबू लोग भी क्या करें। कुछ रहा ही नहीं कर लादने के लिये। तो हर साल होता है संगीत कुर्सी जैसा खेल।
सिगरेट और तम्बाकू की लगभग हर दूसरे बजट मे शामत आ जाती है। हानिकारक बता इन चीजों पर कर का दर बढा दिया जाता है। इस बजट में सिगरेट पर कर २५ से ३० प्रतिशत कर दिया गया। सरकार को भी मालूम है कि स्वास्थय के लिये हानिकारक की चेतावनी के बावजूद लोग इन्हें नहीं छोड़ेंगे। लत जो लगी हुई है।
सरकार कर लगाने के नये नये रास्ते ढूंढती रहती है। अब कार्बन क्रेडिट का मुद्दा ही लो। यह सारा खेल दुनिया में प्रदूषण कम करने के लिये हो रहा है। कार्बन की खपत कम करने के लिये प्रोत्साहन दिये जा रहे हैं। इससे कार्बन क्रेडिट का अलग सट्टा बाज़ार शुरू हो गया है। लोग कमाने का कोई रास्ता ही नही छोड़ते।
उधर सरकार भी टैक्स लगाने की ताक लगाये रहती है। इस बार वित्त मंत्री नितिन पटेल ने साफ कर दिया कि अब कार्बन क्रेडिट के धंधे में सरकार भी अपना हिस्सा लेगी बतौर टैक्स के। ठोक दिया ५ प्रतिशत टैक्स। अब शुरू हो गया टैक्स का खेल। शायद अगले वर्ष यह बढ़ कर दस हो जाये फिर बारह …।
पिछले साल सरकार ने सेकन्ड हैन्ड कारों की खरीद फरोक्त पर टैक्स लगाया था। इस बार दुपहिया वाहनों पर ठोक दिया । अगली बार दोनो पर टैक्स बढ़ जायेगा अगर कोई नया मुद्दा नही मिला तो।
वर्षों हो गये यह सुने हुए कि सराकार ने मंत्रियों और बाबुओं के खर्च मे कटौती की है या फिर अब बाबू नजदीक की जगहों पर गाड़ी मे जायेंगे या फिर चार बाबू मिल कर एक ही गाड़ी का उपयोग करेंगे।
कैसे हो यह। बजट बनाने वाला बाबू और बजट मंजूर करने वाला मंत्री! इन दोनों के बीच मे फंसे हम और तुम।

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