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Wednesday, August 22, 2012
गुजरात परिवर्तन पार्टी पहचान की तलाश में
बुरे फंसे फलदू भैय्या
कांग्रेस गावों में मुफ्त जमीन देगी !
Tuesday, August 21, 2012
अहमदाबाद मे अनुवादित पुस्तकों का मेला
गुजरात
विद्यापीठ में बुधवार २२ अगस्त से अनुवादित पुस्तकों का एक अनोखा मेला शुरु हो रहा
है. लगभग २५०० पुस्तकें इस मेले में प्रदर्शित की जायेंगी. यह मेला २६ अगस्त तक चलेगा.
यह जानकारी देते हुए विद्यापीठ के रजिस्ट्रार रअजेन्द्र खीमानी और गुजरात सहित्य अकादमी
के राजेन्द्र पटेल ने कहा कि यह गुजरात मे इस प्रकार का पहला प्रदर्शन है और शायद देश
में भी इस प्रकार का कोई प्रदर्शन नही हुआ है.Monday, February 7, 2011
उमेद भवन के विप्र कमलेश
Wednesday, January 5, 2011
सफारी - विज्ञापन बिना का एक लोकप्रिय मासिक

आजकल किसी भी प्रकाशन की सफलता का अर्थ है उसकी विज्ञापन एकत्र करने की शक्ति का मजबूत होना। बिना विज्ञापन किसी प्रकाशन का होना कल्पना के बाहर की बात है। सिवाय की वह प्रकाशन किसी कंपनी का आतंरिक प्रकाशन हो या फिर किसी ट्रस्ट की ग्रांट पर निभने वाला प्रकाशन हो।
पर गुजरात का लोकप्रिय मासिक सफारी एक अपवाद है। इस माह इस मासिक ने २०० अंक पूरे किये हैं। १९८० में शुरू हुए इस मासिक को दो बार बंद भी करना पडा। आर्थिक तंगी इसका मुख्या कारण था। इन सबके बावजूद आज इस प्रकाशन ने २०० का अंक छू लिया है। यह केवल २०० अंक प्रकाशित करना नहीं है। इसके सम्पादक नगेन्द्र विजय का कहना है कि आज सफारी की ७१,००० से अधिक प्रतिया बिकती हैं।
उनकी बात पर कोई शंका की जरूरत नहीं है। सफारी की लोकप्रियता है। १९८० में बालको के प्रकाशन के रूप में शुरू हुए इस प्रकाशन ने आज गुजराती पाठक के दिल दिमाग में ज्ञान विज्ञान से भरपूर एक रोचक शैली वाले मासिक के रूप में जगह बना ली है। नगेन्द्र विजय कहते हैं कि यह असंभव नहीं है। मेरे लिए यह पैसा कमाने का जरिया नहीं अपितु लोगो को सरल और समझ में आने वाली भाषा में तरह तरह की जानकारी देना है। यही कारण है कि हर प्रकार की समस्याओं का सामना करते हुए भी आज इसके २०० अंक प्रकाशित हो चुके हैं।
औसतन अच्छे प्रकार के कागज़ पर रंगीन चित्रों से भरपूर लेखों वाले इस मासिक का दाम है २५ रूपये। नगेन्द्र विजय का कहना है कि यह थोड़ी ज्यादा कीमत है। अधिकतर लोगो के दिमाग में सफारी शब्द के साथ विज्ञान का प्रकाशन आता है। पर नगेन्द्र विजय स्पष्ट करते हैं कि इसमें इतिहास और अन्य रसप्रद विषयों पर भी लिखा जाता है।
समय के साथ इसकी सज्जा और लेखों आदि के विषय भी बदलते रहते हैं। यही इसकी पाठकों के बीच इसकी लोकप्रियता का राज है , वे कहते हैं। किसी जमाने में इसकी पहेली काफी लोकप्रिय थी। बाद में इसमें सुपर सवाल कालम शुरू हुआ वह भी काफी लोकप्रिय हुआ। भारत पाकिस्तान युद्ध की कहानियों ने भी पाठको को बांधे रखा।
तीन वर्ष पहले सफारी अंगरेजी में भी शुरू हुआ। पर वह अभी भी संघर्ष कर रहा है। उसका प्रसार १६००० कापियां है। इसका कारण बाजारू व्यवस्था है। इसके चलते नगेन्द्र विजय और उनके पुत्र ने उसे गुजरात के बाहर केवल चंदे के आधार पर बेचने का निर्णय किया है। सफारी के २०० अंकों की कहानी कुछ पैरों में बयान नहीं की जा सकती है। १५ वर्ष पूर्व सफारी ने अपनी वेबसाइट भी शुरू की। आज वह काफी लोकप्रिय है।
उनके पुत्र हर्शल का कहना है कि वे हिंदी और मराठी में भी इसका प्रकाशन शुर करेंगे। मैं पिता पुत्र की इस जोड़ी से बात कर भाजपा के कार्यालय पहुंचा तो वहा मेरी मुलाक़ात मीडिया विभाग में मौलिक जोशी से हो गई। मैंने सफारी का जिक्र किया तो तपाक से बोले की बहुत अच्छा प्रकाशन है । इसी महीने २०० अंक पूरे हुए है। मेरे पिताजी और मैं हम दोनों ही इसके बड़े चाहक हैं। बोले कि वे तो पहले अंक से ही इसे पढ़ रहे है। और अगले आधा घंटे में उन्होंने मुझे सफारी की विशेषताओं के बारे में काफी गहराई से बताया। सरल भाषा में गूढ़ विषयों की रोचक शैली में जानकारी इसकी सब से बड़ी विशेषता है। इससे भी अधिक तो यह है कि यह पाठको में राष्ट्र प्रेम की भावना जगाती है।
यह है इस सफारी की सफलता की कहानी.
Friday, December 31, 2010
गुजरात की जान बचाने वाली १०८ सर्विस
इसके आंकड़े काफी रसप्रद जानकारी देते हैं।एक तिहाई किस्सों में प्रसव सम्बन्धी आपात कॉल इसे मिले। १६,००० से अधिक किस्सों में तो इस सेवा की एम्बुलेंस में ही प्रसुताओं ने बालक को एम्बुलेंस में ही जन्म दिया। ६,३७,१०७ कॉल प्रसुताओं के परिवार से मिले हैं इसे। गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री जयनारायण व्यास का कहना है कि प्रसव आपात में आप १०८ की एम्बुलेंस का उपयोग करें क्योकि इसमें आपकी सहायत के लिए चिकित्सा सुविधा है जो आपकी कार में नहीं मिल सकती।
गुजरात के किस्से में यह सेवा अगस्त २००७ में केवल १५ एम्बुलेंस से शुरू हुई थी। अहमदाबाद और गांधीनगर में ही थी यह सेवा। आज ४५३ एम्बुलेंस के द्वारा गुजरात के सभी २६ जिल्लों में ५.०५ करोड़ लोगो को यह सेवा उपलब्ध है। रोड एक्सिडेंट में भी यह काफी प्रभावी रही है। गुजरात में सड़क दुर्घटनाओं का प्रमाण काफी है। अब १०८ सेवा ने अधिक दुर्घटना वाले क्षेत्रो में और अधिक प्रभावी सेवा के कदम उठाने शुरू किये हैं।
जंगली प्रदेशों में सर्प दंश एक बहुत बड़ी समस्या है। वहां डॉक्टर भी आसानी से नहीं मिलते हैं। ऐसे में १०८ सेवा ही एकमात्र सहारा है। परिणाम स्वरुप इन तीन सालों में ७००० सर्प दंश के किस्सों में लोगो ने इस सेवा की सहायत ली है। सभी किस्सों में लोगो की जान बची है और जल्दी चिकित्सा सहायता मिलने के कारण लोगो को तकलीफ भी कम हुई है।
आप १०८ डायल कर आपात स्तिथी की जानकारी दें और अधिकतम १५-२० मिनट में घटना स्थल पर आप १०८ को पायेंगे। यह केवल चिकित्सा सुविधा के लिए ही नहीं हैं। आप पुलिस सहायता पा सकते है। आग लगने की घटना में आप को अग्निशमन की मदद तुरंत मिल सकती है। इसकी एम्बुलेंस में हॉस्पिटल पहुँचने तक में आपकी जरूरी जांच भी हो जाती है। अब गुजरात सरकार इन एम्बुलेंस में ब्रेन स्केनर लगाने जा रही है क्योकि सड़क दुर्घटनाओं में मस्तिष्क को चोट लगने की घटनाएँ काफी होती हैं।
आज जब सभी राज्यों में डाक्टरों की काफी कमी है तब यह सेवा एक वरदान सिद्ध हो रही है।
