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Thursday, December 26, 2013

आयुर्वेद चिकित्सकों का दो दिवसीय महा सम्मेलन

अहमदाबाद में शनिवार को आयुर्वेद चिकित्सकों का दो दिवसीय महा सम्मेलन शुरू हो रहा है जिसमे देश के लगभग १५०० आयुर्वेद चिकित्सक और छात्र भाग लेंगें। इस कार्यक्रम में एक निशुल्क चिकित्सका कैम्प का आयोजन भी किया गया है। इस महा सम्मेलन का आयोजन आयुर्वेद व्यासपीठ गुजरात द्वारा किया गया है।
यह जानकारी देते हुए आयुर्वेद व्यासपीठ गुजरात के अध्यक्ष वैद्य हितेश जानी ने कहा कि यह इस प्रकार का पहला सम्मेलन है और इसका मुख्य उद्देश्य लोगों में आयुर्वेद का प्रचार प्रसार करना है। महा सम्मेलन में विभिन्न विषयों पर आयुर्वेद चिकित्सक उनके अनुसन्धान के बारे में जानकारी देंगें।
एक प्रश्न के उत्तर में महा सम्मेलन के ओर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी वैद्य राजेश ठक्कर ने कहा कि इस कार्यक्रम में आयुर्वेद के क्षेत्र में अच्छा काम करने वाले १५१ लोगों का सम्मान किया जाएगा। स्वस्थ जीवन शैली प्रदर्शनी और एक्स्पो में दिनचर्या और ऋतुचर्या प्रदर्शन से ले गाय के चिकित्सीय महत्व के प्रदर्शन का आयोजन किया गया है।
निशुल्क कैम्प में दर्द रहित दांत निकालना, लीच थैरेपी द्वारा चर्म चिकित्सा, गर्भ संस्कार, कर्ण वेधन द्वारा अस्थमा निदान आयुर्वेद द्वारा व्यसन मुक्ति, आंख के रोगों के लिए तर्पण चिकित्सा, ह्र्दय रोग में पंच कर्म जैसे विषय हैं।

इस कार्यक्रम का आयोजन स्वामीनारायण गुरुकुल छारोड़ी में किया गया है। 

Friday, February 22, 2013




इन्टेलीजेंस एजेंसियों का इन्टेलीजेंट खेल !

भारत में कोई भी आतंकवाद की घटना के साथ दो चीज जरूर जुड़ी हुई हैं । पहला तो यह कि इस घटना की जानकारी इन्टेलीजेंस एजेंसी को थी और यह जानकारी सम्बन्धित सरकार की दी गई थी। और दूसरा इलेक्ट्रोनिक मीडिया से ले सोशल मीडिया तक सभी जगह सरकार को गालियां और हिंसा के रोंगटे खड़े कर देने वाले दृश्य। हैदराबाद की घटना मे भी यही सब कुछ हुआ।
इस घटना से कुछ घंटे पहले विधान सभा में मज़ेदार बात हुई। गृह सचिव एस के नन्दा को पत्रकारों ने घेर लिया। वे आई पी एस सिन्घल के गिरफ्तारी के बारे में जानना चाहते थे । पत्रकारों का कहना था सिन्घल  को सी बी आई ने गिरफ्तार कर लिया है। नन्दाजी का कहना था कि गिरफ्तारी के पूरे आसार हैं।
कुछ देर बाद जब नन्दाजी लिफ्ट में नीचे उतर रहे थे एक इन्टेलीजेंस का बंदा लिफ्ट में आया और नन्दाजी को एक एस एम एस पढ़ाया। बाद में मालूम पड़ा कि वह संदेश सिन्घल के गिरफ्तार होने के बारे में था। आप सोच सकते हैं कि अपने इन्टेलीजेंस वाले किस तरह से काम करते हैं।
तीन दशक की पत्रकारिता में इस प्रकार की बहुत सारी घटनाएं देखी हैं। हर प्रकार की जानकारी इन्टेलीजेंस के नाम पर इधर उधर होती रहती है। अगर वह जानकारी घटना मे तबदील होती है तो इन्टेलीजेंस के बंदे दावा करते हैं कि यह जानकारी उन्हें पहले से थी।
हमारे मित्र, एक उच्च पुलिस अधिकारी,  का कहना है कि यदि इन्टेलीजेंस की जानकारी पर काम करने बैठें तो कुछ और काम हो ही नही और जानकारी पर भी पूरा काम नही हो पाये। हमारी इन्टेलीजेंस की समस्या है कि उसकी जानकारी आधी अधूरी होती है। उस पर कोई भी कार्रवाई लगभग असम्भव होती है।
1994 के करीब की बात है। डी जे पांडियन उस समय गृह विभाग में डेप्युटी सेक्रेटरी थे। उनका एक काफी प्रिय जोक था। उनका कहना था कि सुबह अगर वो लॉ एन्ड ऑर्डर की किसी समस्या की चर्चा करते हुए कोई अटकल करते हैं तो शाम को वही बात उनकी टेबल पर इन्टेलीजेंस के रूप में आ जाती है!
देखा । अगर कुछ हुआ तो इन्टेलीजेंस एजेंसी सही और सरकार गलत और नही हुआ तो इन्टेलीजेंस वाले कह सकते हैं कि सामने वालों को मालूम हो गया है कि हमें मालूम हो गया है इसलिये उन्होने प्लान बदल दिया!!!

Thursday, February 21, 2013



विधान सभा की भगवा छटा

गुजरात विधान सभा का यह सत्र कई अर्थों में नया है। पिछले सात टर्म से भी अधिक समय से गुजरात विधान सभा के सदस्य और वित्त मंत्री रह चुके वजुभाई वाला अब विधान सभा अध्यक्ष हैं।

बार बार विधान सभा में तरह तरह के कोमेंट के लिये मशहूर अपने नितिनभाई अब वित्त मंत्री जैसी भारी पोस्ट पर बैठ सरकार को बचाने के फायर फाईटिंग ऑपरेशन में इस तरह फंसे दिखाई देते हैं कि कोमेंट वोमेंट कम ही कर्ते दिखलाई देते हैं।

खैर मुद्दा तो भगवा छटा का है। प्रतिपक्ष के नेता शंकरसिंह वाघेला  किसी जमाने के भाजपा के कद्दावर नेता हैं। गुजरात में भाजपा की नींव रखने वाले शंकरसिंह वाघेला  ने गुजरात में भाजपा को तोड़ यह भी बता दिया कि भाजपा अटूट नही हैं। वह भी और दलों की तरह ही है। हां पर भाजपा में शंकरसिंह वाघेला  की टक्कर का कोई और नेता नही है। पूरे देश में।

दो बार मुख्य मंत्री रह चुके अपने केशूभाई पटेल विरोध का दूसरा छोर हैं। दो सदस्यों वाली गुजरात परिवर्तन पार्टी के नेता हैं। पूरी जिंदगी आर एस एस से जुड़े रहे अपने केशूभाई पटेल ने मुख्य मंत्री नरेन्द्र मोदी को कोसते हुए भाजपा छोड़ दी और चुनाव से कुछ महीने पहले गुजरात परिवर्तन पार्टी बना ली।

पर केशुबापा के नाम से मशहूर अपने केशूभाई पटेल की किस्सा तो पहले प्यार के टूटने वाले आशिक जैसा है। दिल तो उनका अभी भी भगवा ही है। इसलिये चुनाव के दौरान वे यह कहते थे कि असली भाजपा तो उनकी है।

आप विधान सभा अध्यक्ष वजुभाई वाला की हालत की कल्पना कर सकते हैं। सदन मे वे जहां भी नज़र करते हैं , बुलन्दी पर भगवा ही दिखलाई देता है। फिर चाहे वो उनके अपने भाजपा वाले मुख्य मंत्री नरेन्द्र मोदी हों या फिर भूपू भाजपाई शंकरसिंह वाघेला  और केशूभाई पटेल हों।

तीनों की विषेशता यह है कि , तीनों एक ही स्कूल की प्रोडेक्ट हैं। विचार से ले भाषण देने की कला तक।

इसलिये आज जब शंकरसिंह वाघेला  ने अपना धांसू भाषण दिया तो भाजपाईयों के पास उसका कोई तोड़ ही नही था। क्योंकि छटा तो भगवा थी!

Wednesday, February 20, 2013

बजट और टैक्स का खेल


पिछले कई वर्षों से सरकार का बजट बस आंकडों का मायाजाल बन कर रह गया है। सरकार करों मे वृद्धी और कटौती के खेल से आम आदमी को छलती रहती है। अब गुजरात सरकार के इस बार के बजट को ही ले लो।
वित्त मंत्री नितिन पटेल का यह पहला बजट था। वैसे इसका कोई खास फर्क नही पड़ता। बजट तो बाबू ही बनाते हैं। पर बाबू लोग भी क्या करें। कुछ रहा ही नहीं कर लादने के लिये। तो हर साल होता है संगीत कुर्सी जैसा खेल।
सिगरेट और तम्बाकू की लगभग हर दूसरे बजट मे शामत आ जाती है। हानिकारक बता इन चीजों पर कर का दर बढा दिया जाता है। इस बजट में सिगरेट पर कर २५ से ३० प्रतिशत कर दिया गया। सरकार को भी मालूम है कि स्वास्थय के लिये हानिकारक की चेतावनी के बावजूद लोग इन्हें नहीं छोड़ेंगे। लत जो लगी हुई है।
सरकार कर लगाने के नये नये रास्ते ढूंढती रहती है। अब कार्बन क्रेडिट का मुद्दा ही लो। यह सारा खेल दुनिया में प्रदूषण कम करने के लिये हो रहा है। कार्बन की खपत कम करने के लिये प्रोत्साहन दिये जा रहे हैं। इससे कार्बन क्रेडिट का अलग सट्टा बाज़ार शुरू हो गया है। लोग कमाने का कोई रास्ता ही नही छोड़ते।
उधर सरकार भी टैक्स लगाने की ताक लगाये रहती है। इस बार वित्त मंत्री नितिन पटेल ने साफ कर दिया कि अब कार्बन क्रेडिट के धंधे में सरकार भी अपना हिस्सा लेगी बतौर टैक्स के। ठोक दिया ५ प्रतिशत टैक्स। अब शुरू हो गया टैक्स का खेल। शायद अगले वर्ष यह बढ़ कर दस हो जाये फिर बारह …।
पिछले साल सरकार ने सेकन्ड हैन्ड कारों की खरीद फरोक्त पर टैक्स लगाया था। इस बार दुपहिया वाहनों पर ठोक दिया । अगली बार दोनो पर टैक्स बढ़ जायेगा अगर कोई नया मुद्दा नही मिला तो।
वर्षों हो गये यह सुने हुए कि सराकार ने मंत्रियों और बाबुओं के खर्च मे कटौती की है या फिर अब बाबू नजदीक की जगहों पर गाड़ी मे जायेंगे या फिर चार बाबू मिल कर एक ही गाड़ी का उपयोग करेंगे।
कैसे हो यह। बजट बनाने वाला बाबू और बजट मंजूर करने वाला मंत्री! इन दोनों के बीच मे फंसे हम और तुम।

Sunday, September 9, 2012

राज ठाकरे गुर्राए- अरनब मिमियाए !

टाइम्स नाउ पर राज ठाकरे का इंटरव्यू देखा. जोर जोर से गिट पिट अंग्रेजी बोल चर्चा मे भाग लेने वालों को घबरा देने वाले अपने अरनब गोस्वामीजी की तो कुछ ही क्षणों मे सिट्टी पिट्टी गुम हो गई.देख कर लगता था बेचारे अरनब भैया अब रो पड़ेंगें. वैसे रूमाल ठकरे के हाथ मे था और बार बार वो अपनी नाक पोंछ रहे थे.

खैर आगे कुछ लिखें उससे पहले यह स्पष्ट कर दे कि हम राज ठकरे के पक्ष मे नहीं लिख रहे हैं. हम तो अरनबजी ने इतने बडे चैनल के प्लट्फोर्म से मीडिया की जो किरकिरी करवाई उसे बयां कर रहे हैं. और इससे उन्होंने जिस तरह से ठाकरे गुट की ताकत को एक बार फिर ताजा किया वो बतला रहे हैं.

एक बात साफ थी. अरनब बार बार घबरा रहा था और हकला रहा था. यह उसके आत्मविश्वास की कमी थी या फिर ठाकरे की बार बार गुर्राहट और अंगुली उठाने का परिणाम था ये तो राम जाने या फिर अरनब जाने. पर यह तो साफ था कि अरनब ठीक तरह से होम वर्क किये बिना आये थे. कई बार तो ऐसा लगा कि राज ठाकरे अरनब का इंटरव्यू ले रहा है.

मजेदार बात तो यह है कि राज ठाकरे बार बार यह कह रहा था कि उसकी नाराजगी हिन्दी चैनलों से है, पर अरनब ऐसे मुंडी लतका के बैठे थे कि मानो ठाकरे ने उन्हे अपने दरबार मे सजा के लिये बुलाया हो. अभी बोनी कपूर ठाकरे के दर्बार मे जा एक टेलीवीजन प्रोग्राम की मंजूरी ले कर आये हैं . शायद इसी का परीणाम हो!

ठाकरे ने तीन चार बार खुली धमकी दे डाली की चैनल अपनी तरह से समाचार दिखाये और वो चैनलों को देख लेंगे. मिमियाते अरनब पूछते हैं कि आप क्या कर लेंगे और गरजते ठाकरे कहते हैं देख लेना. देख कर लगता हे नहीं था कि ये वही अरनब हैं जो रोज शाम इतना चीखते हैं कि कमजोर दिल वाला आदमी तो घबरा जाये.

अरनब आशा ताई और अन्य का मुद्दा उठाते हैं जिसमे ठाकरे गुट ने फतवे जारी किये. ठाकरे ने उन्हे सही बताते हुए कहा कि आप कौन होते है हमे सिखलाने वाले कि हम क्या बोले क्या नहीं. अपने अरनब चुपचाप अगला सवाल पकड लेते हैं.

और आखिर मे अपने अरनब भैय्या राज भैय्या की हिन्दी की तारीफ करते हुए शरद यादव के मशहूर डब्बे से विदा लेते हैं. हमरे जिन पाठकों को डब्बे की कहानी नही मालूम उन्हें बतादे कि अन्ना हजारे के पहले आंदोलन के समय लोक सभा मे शरद यादव ने उनकी लाक्षणिक शैली मे चैनल वालों के लिये डब्बे वाले शब्द का प्रयोग किया था.

ठाकरे के सामने तो यह डब्बा डब्बा ही हो गया. खैर उस कार्यक्रम को रविवार को भी दिखलाय गया. आखिरकार ठाकरे से TRP बढती है फिर वो राज ठाकरे हों या अल ठाकरे, और इसके लिये भले ही अरनब की छवी मिट्टी मे मिले.

Friday, September 7, 2012

आडवाणी के रथ पर मोदीजी की विवेकानन्द यात्रा

भाजपा प्रवक्ता विजय रुपाणी काफी समय बाद आज प्रेस के समक्ष प्रकट हुए. ऐजंडा था मोदीजी की विवेकानन्द यात्रा के बारे में जानकारी देना. उन्होने बताया कि विवेकानन्दजी की १५०वीं जन्म जयन्ती के अवसर पर मोदीजी की यात्रा के साथ साथ १५० उप-यात्राएं भी निकलेंगीं.
भाजपा और उसके नेताओं का हर काम एक रणनीति  होता है. यात्रा ११ सितम्बर को शुरु होगी. यह वो दिन है जब विवेकानन्द ने अमरीका मे उनका ऐतिहासिक भाषण दिया था और हिन्दुत्व को गुंजा दिया था. उस जमाने में अमरीका जाने मे वीजा जैसा प्रोब्लम नही था. इसलिये विवेकानन्द चले गये थे.
खैर, अपने तकनीक चलित (Technology Driven) मोदीजी इसी महीने वीडियो तरंगो पर बैठ अमरीका में भारतीयों के एक कार्यक्रम को सम्बोधित कर आये हैं. अगर आयोजक यह कार्यक्रम ११ सितम्बर को रखते तो यह कैसा संयोग होता . एक नरेन्द्र (विवेकानन्द का सांसारिक नाम) शारीरिक रूप मे १५० वर्ष पूर्व अमरीका गया और भारत और उसकी संस्कृति का डंका बजा आया. आज अपना नरेन्द्र मोदी वीडियो तरंगो पर बैठ अमरीका में भारतीयों के एक कार्यक्रम को सम्बोधित करता. कोई बात नहीं , सितम्बर का महीना तो है.
यात्रा , रूपाणी ने बताया, बहुचराजी से शुरू होगी. यह देवी का स्थान है. पर इसके चयन का कारण अलग है. रूपाणीजी ने कहा कि यहां मारूति प्लांट डाल रही है. देखा बहुचराजी हिन्दुत्व और विकास का कैसा अनोखा प्रतीक बन गया है.
इस कार्यक्रम को भगवा झंडा दिखलायेंगे राजनाथ सिंग और मोदीजी के मित्र अरुण जेटली. आडवाणीजी नहीं आ रहें हैं. शायद एक महिने चलने वाली यात्रा मे किसी दिन आयें.
ज्यादह अटकलों की जरूरत नही है. हाल ही में गांधीनगर में शतरंज के एक महा कार्यक्रम में, आडवाणीजी न केवल मोदीजी के साथ बैठे, उन्होने मोदीजी की शतरंज योग्यता की भी काफी तारीफ की.
आडवाणीजी ने मोदीजी को आशीर्वाद दिया या नही, यह मालूम नहीं है. पर रूपाणीजी की घोषणा के अनुसार आडवाणीजी ने मोदीजी को यात्रा के लिये अपना रथ दिया है.
मोदीजी हर हफ्ते तीन चार दिन इस रथ पर बैठ विवेकानन्द युवा विकास यात्रा निकालेंगे. एक प्रश्न के उत्तर में रूपाणीजी ने कहा कि विवेकानन्द युवा और विकास के प्रतीक थे और मोदीजी भी उनके उन्ही गुणों को गुजरात में इस यात्रा द्वारा प्रस्थापित करेंगे.
देखें आडवाणीजी का रथ मोदीजी की दिल्ली यात्रा में उन्हें कहां तक ले जाता है.

Thursday, September 6, 2012

अब बिल्डर करें सस्ते मकान की बात

गुजरात के चुनावी मौसम में सस्ते मकानों का चर्चा सभी की जुबान पर है. कांग्रेस ने शहरों में सस्ते मकान और गावों में मकान के लिये मुफ्त जमीन का सुर्रा क्या छोड़ा अब सभी मकान की बातें कर रहे हैं. जिनके पास हैं वे सोच रहे हैं कि जुगाड़ हो जाये तो पैसे कमा लेंगे, जिनके पास मकान नही है वो सोच रहे हैं कोशिश करने मे क्या जाता है.
मोदीजी ने बरसों से मरे पड़े गुजरात हाउसिंग बोर्ड को जिन्दा कर दिया है और उनकी आशा है कि अलादीन के चिराग की तरह यह बोर्ड सभी के खुश कर देगा. मोदीजी और उनकी भाजपा के नेता लोगों को कांग्रेस से चेता रहे हैं कि बिना भरोसे की पार्टी है मकान वकान नही देगी और तुम्हारा अमुल्य मत ले लेगी.
आज महंगी महंगी स्कीमें बेचने वाले बिल्डर भी मैदान मे उतर आये. पत्रकारों से कहा कि सीमेंट और अन्य वस्तुओं के भाव बड़ते जा रहे हैं इसलिये मकानों के भाव बढ़्ते जा रहे हैं. उनकी संस्था गुजरात इन्स्टीट्यूट ओफ हाउसिंग एंड एस्टेट डेवेलोपर्स का कहना है कि २००९ मे एक वर्ग फुट निर्माण की लागत थी रु ७०० से ७५० जो आज रु ११०० से १२०० के बीच हो गई है.
उनका कहना है कि पिछले तीन महिने मे सीमेंट के थोक के भाव में ५० किलो की थैली पर र्य ८० से ९० तक बढ़ गये हैं. और अगर सरकार ने इस पर अंकुश नही लगाया तो भाव और बढ जायेंगे. उनका कहना है कि जून से सितम्बर के बीच सीमेंट के दाम नही बढते क्योंकि मांग कम होती है. पर इस बार तो गजब हो गया है. बरसात के मौसम में सीमेंट के दाम बढ गये.
पत्रकारों ने जब यह कहा कि तुम्हे क्या, तुम तो मकान के खरीदारों से वसूलोगे. उन्हे मालूम था कि इस प्रकार का सवाल आयेगा ही और उन्होंने जवाब भी तैयार रखा था. यह हम लोगों के हित मे कह रहें हैं.
हमारे देश में सभी लोगों के लिये ही काम करते हैं. यह बात अलग है कि आम आदमी आज भी आम की गुठली खा रहा है और गूदे की मौज तो ये काम करने वाले ले रहे हैं.
बिल्डरों के किस्से मे भी हकीकत तो यह है कि वैसे ही मकान बिक नही रहे हैं और उधार देने वाले रोज पैसे की उगाही के लिये चक्कर लगाते हैं. ऐसे में लागत बढने का मतलब , धंधा और भी मंदा! दूसरी तरफ चुनावी चक्कर मे पार्टीयां भी लोगों को सस्ते मकान का लालच दे रही हैं.
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