गुजरात के बारे मे आम धारणा है कि यहां के लोग दाल चावल खने वाले है। फ़ौज मे लडना इनके बस की बात नही है...। पर अब अपने आदिवासी क्षॆत्र के बाबूभाइ ने यह सिद्ध कर दिया है कि यस सब गलत धारणाये है।
२९ साल के बाबूभाई फ़ौज मे हवलदार है। शाकाहारी है, पर फ़िर भी अंतर्राष्ट्रिय स्तर के रेस वाकर हैं। एक महिने मे ही दो बार राष्ट्रिय रेकोर्ड बनाये है अपने बाबूभाई ने। १घंटे २३ मिनट ४० सेकंड मे बाबूभाई २० कि.मी. चले। अपने बाबूभाई ने चार महिने मे उनका परिणाम पूरे सत्रह मिनट सुधारा!!!
उनका नया रेकोर्ड पिछले ऒलंपिक के तीसरे खिलाडी के काफ़ी नजदीक है। भारत मे वे स्टेडियम मे चक्कर काट कर २० कि.मी. चलते है, पर ऒलंपिक मे तो सडक पर चलना होता है। साफ़ है कि उनका रेकोर्ड और सुधरेगा। और जिस तरह उन्होने चार महिने मे उनका परिणाम पूरे सत्रह मिनट सुधारा उससे साफ़ है कि अगले आठ महिने मे इसमे भी सुधार आयेगा। अपना बाबूभाई बेजिंग मे जरूर रंग दिखलायेगा।
जरूरत है कि क्रिकेट के खिलाडियों की तरह लोग अपने बाबूभाई को कहेंगे, चक दे इंडिया ऒलंपिक मे
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Tuesday, October 30, 2007
Monday, October 29, 2007
मोदी जी के मौत के सौदागर
अभी कुछ देर पहले ही अपने मोदीजी का इंटरव्यू सहारा चैनल पर देखा। लगा कि मोदीजी से पहले तो सभी मुख्यमंत्री घसियारे थे। अपने मोदीजी तो विकास पुरूष है। पूरा गुजारात उनका परिवार है। I love Gujarat ही दिख रहा था।
अपने इंटरव्यू लेने वाले प्रसूनभाई की अपने भाई के साथ उनकी दाढी के अलावा और भी कई समानताये देखने को मिली। अपने गुजरात के साढे पांच करोड के एक मात्र भाई नरेन्द्र भाई की तरह वे भी काफ़ी विकास केद्रित लगे। इंटरव्यू मे वे मोदीजी के विकासशील पहलू को उभारने मे उनकी पत्रकारिता की सभी दक्षताऒ को लगा रहे थे। सही बात है कि इंटरव्यू लेने वाले को सामने वाले के अच्छे पहलू उभारने चाहिये.
और अपने मोदीजी भी शांति से हर बात का उनके अपने अंदाज मे जवाब दे रहे थे। लगता नही था कि मोदीजी कभी किसी पत्रकार से बदसलूकी कर सकते है। चेहरे पर एक मुस्कान, होठो पर प्रजा को समर्पण के बोल। जरूर राजदीप बडा बदतमीज आदमी होगा जो अपने मोदीजी को गुस्सा आ गया। करण थापर ने जरूर बद्सलूकी की होगी जो अपने शांत और सौम्य मोदीजी इंटरव्यू छोड चले गये होंगे।
प्रसूनजी ने भी विवादास्पद सवाल किया। आखीर यह इंटरव्यू असली था। उन्होने पूछा २००२ के दंगो का क्या? मोदीजी ने बताया कि उसके बाद चुनाव भी हुए और वो जीत कर आये। और फ़िर मोदीजी शुरू हो गये "मै मौत के सौदागरों को नही छोडूंगा"। प्रसून ने अंग्रेजी स्कूल के अच्छे छात्र की तरह हिंदी मे सवाल किया। फ़र्जी मुठभेड का क्या? पर मोदीजी तो बोलते ही रहे। "मै मौत के सौदागरों को नही छोडूंगा"। कई बार दोहरया। प्रसून्जी भक्ति भाव से उनके विकास पुरूष के सुनते रहे। चुपचाप अच्छे बच्चे की तरह।
राम जाने मोदीजी के मौत के सौदागर कौन हैं!!!!!!!
अपने इंटरव्यू लेने वाले प्रसूनभाई की अपने भाई के साथ उनकी दाढी के अलावा और भी कई समानताये देखने को मिली। अपने गुजरात के साढे पांच करोड के एक मात्र भाई नरेन्द्र भाई की तरह वे भी काफ़ी विकास केद्रित लगे। इंटरव्यू मे वे मोदीजी के विकासशील पहलू को उभारने मे उनकी पत्रकारिता की सभी दक्षताऒ को लगा रहे थे। सही बात है कि इंटरव्यू लेने वाले को सामने वाले के अच्छे पहलू उभारने चाहिये.
और अपने मोदीजी भी शांति से हर बात का उनके अपने अंदाज मे जवाब दे रहे थे। लगता नही था कि मोदीजी कभी किसी पत्रकार से बदसलूकी कर सकते है। चेहरे पर एक मुस्कान, होठो पर प्रजा को समर्पण के बोल। जरूर राजदीप बडा बदतमीज आदमी होगा जो अपने मोदीजी को गुस्सा आ गया। करण थापर ने जरूर बद्सलूकी की होगी जो अपने शांत और सौम्य मोदीजी इंटरव्यू छोड चले गये होंगे।
प्रसूनजी ने भी विवादास्पद सवाल किया। आखीर यह इंटरव्यू असली था। उन्होने पूछा २००२ के दंगो का क्या? मोदीजी ने बताया कि उसके बाद चुनाव भी हुए और वो जीत कर आये। और फ़िर मोदीजी शुरू हो गये "मै मौत के सौदागरों को नही छोडूंगा"। प्रसून ने अंग्रेजी स्कूल के अच्छे छात्र की तरह हिंदी मे सवाल किया। फ़र्जी मुठभेड का क्या? पर मोदीजी तो बोलते ही रहे। "मै मौत के सौदागरों को नही छोडूंगा"। कई बार दोहरया। प्रसून्जी भक्ति भाव से उनके विकास पुरूष के सुनते रहे। चुपचाप अच्छे बच्चे की तरह।
राम जाने मोदीजी के मौत के सौदागर कौन हैं!!!!!!!
बेशरमी का तहलका
गुजरात मे आजकाल तहलका मचा हुआ है। हालांकि पूरी दुनिया मे इस तहलका की चर्चा है, गुजरात मे तो लोग इसे महसूस कर रहे है। आशंका प्रेरित भय लोगो के दिलो मे घर करता जा रहा है। लोगो मे एक प्रकार का डर बैठ गया है कि ना जाने क्या हो जायेगा? पुराने दिनो की यादे ताजा करवा रहे हैं ये भयावह द्र्श्य। दिल्ली या अमरीका मे बैठ किसी को इसका ख्याल नही आ सकता।
इसका एक कारण यह है कि पिछले छह वर्षो मे मोदी ने उसकी एक छाप खडी की है कि वो आज का चाणक्य है और वो ध्येय प्राप्ति के लिये कुछ भी करवा सकता है। मुख्य मंत्री मोदी के चाणक्य होने पर विवाद हो सकता है, पर उसकी कुछ भी कर्वा सकने कि क्षमता को उसके विरोधी भी मानते है। उसके समर्थक तो उसकी इस क्षमता का ढोल पीटते ही है। यह छाप गुजरात के लोगो मे दहशत फ़ैला रही है।
भाजपा और कांग्रेस दोनो ही लोगो के इस भय को महसूस कर रहे हैं। पर दोनो ही इस आग मे अपनी वोट की रोटी सेकने मे लगे हुए है। कांग्रेसी इस मुद्दे पर चुप्पी साध कर बैठी है। भाजपाईयो के निवेदन तो लोगो की आशंका को सही साबित कर्ने पर उतरे हुए हैं। प्रदेश प्रवक्ता रूपाणी का तो कहना है कि ट्रेन मे आग लगाने वालों का आपरेशन क्यों नही ? अब आप इसका क्या अर्थ लगायेंगे? हमने तो किया पर औरों का क्या?
उधर तीस्ता सेतल्वाड सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा रही है कि तहलका को एक सबूत के रूप मे लिया जाना चाहिये।
पर क्या किसी ने आम आदमी की दहशत का सोचा है? क्या किसी ने यह मांग की है कि इसका प्रसारण बंद किया जाये जनता के हित मे। कार्यक्रम के टेव मंगा आगे की कार्यवाही की जा सकती है।
इसका एक कारण यह है कि पिछले छह वर्षो मे मोदी ने उसकी एक छाप खडी की है कि वो आज का चाणक्य है और वो ध्येय प्राप्ति के लिये कुछ भी करवा सकता है। मुख्य मंत्री मोदी के चाणक्य होने पर विवाद हो सकता है, पर उसकी कुछ भी कर्वा सकने कि क्षमता को उसके विरोधी भी मानते है। उसके समर्थक तो उसकी इस क्षमता का ढोल पीटते ही है। यह छाप गुजरात के लोगो मे दहशत फ़ैला रही है।
भाजपा और कांग्रेस दोनो ही लोगो के इस भय को महसूस कर रहे हैं। पर दोनो ही इस आग मे अपनी वोट की रोटी सेकने मे लगे हुए है। कांग्रेसी इस मुद्दे पर चुप्पी साध कर बैठी है। भाजपाईयो के निवेदन तो लोगो की आशंका को सही साबित कर्ने पर उतरे हुए हैं। प्रदेश प्रवक्ता रूपाणी का तो कहना है कि ट्रेन मे आग लगाने वालों का आपरेशन क्यों नही ? अब आप इसका क्या अर्थ लगायेंगे? हमने तो किया पर औरों का क्या?
उधर तीस्ता सेतल्वाड सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा रही है कि तहलका को एक सबूत के रूप मे लिया जाना चाहिये।
पर क्या किसी ने आम आदमी की दहशत का सोचा है? क्या किसी ने यह मांग की है कि इसका प्रसारण बंद किया जाये जनता के हित मे। कार्यक्रम के टेव मंगा आगे की कार्यवाही की जा सकती है।
Sunday, October 28, 2007
गुजरात मे चुनावी माहौल
दिसम्बर मे गुजरात मे विधान सभा चुनाव होने जा रहें है. आजकल राजनीतिक दलों के कार्यालयो पर टिकट लेने वालों के टोले इकठ्ठे हो रहे हैं.वर्षो बाद कई चेहरे दिखलाई दे रहे हैं.आखिर टिकट की लाटरी की बात जो ठहरी. राजनीति का चस्का ऎसा है कि एक बार लग गया तो उसका रंग छूटता ही नही. उम्र नहि ख्वाहिश जवान रहनी चाहिये.
भाजपा के स्टार प्रचारक अपने मुख्यमंत्री मोदीजी ही है. कांग्रेस के युवा नेता सुबह हेलिकोप्टर ले गुजरात की हवाऒं को रोंदने निकल जाते है. अभी से यह हाल है, कि नेता ही नही उनसे जुडे कार्यकर्ता भी मुश्किल से सो पाते हैं.
पिछले दो दिनों मे कांग्रेस ने २२०० कार्यकर्ताओं को सुना. सभी को टिकट चाहिये. सभी को लगता है कि इस बार तो कांग्रेस सत्ता मे आ ही जायेगी. १८२ बैठको के लिये २३०० उम्मीदवार !! इससे बडा उत्साह वर्धक समाचार और क्या हो सकता है अपने कांग्रेसी नेताओ के लिये.
अपने भाजपाईयो के यहा मामला कुछ अलग है. सबका मानना है कि टिकट तो उसी को मिलेगा, जिसे अपने नरेन्द्र भाई देना चाहेंगे. चंद लोगो को ही मोदीजी की उनकी चाहत के बारे मे मालूम पडा है. वैसे भाजपा के कूंचे पर भी भीड़ जमी रहती है. वहां भी सैकडों की सुनवाई हो चुकी है.
इस बार चुनाव का माहौल एक साल पहले ही शुरू हो गया है. अभी तो ४५ से अधिक दिन बाकी है.देखें आगे आगे क्या होता है....
भाजपा के स्टार प्रचारक अपने मुख्यमंत्री मोदीजी ही है. कांग्रेस के युवा नेता सुबह हेलिकोप्टर ले गुजरात की हवाऒं को रोंदने निकल जाते है. अभी से यह हाल है, कि नेता ही नही उनसे जुडे कार्यकर्ता भी मुश्किल से सो पाते हैं.
पिछले दो दिनों मे कांग्रेस ने २२०० कार्यकर्ताओं को सुना. सभी को टिकट चाहिये. सभी को लगता है कि इस बार तो कांग्रेस सत्ता मे आ ही जायेगी. १८२ बैठको के लिये २३०० उम्मीदवार !! इससे बडा उत्साह वर्धक समाचार और क्या हो सकता है अपने कांग्रेसी नेताओ के लिये.
अपने भाजपाईयो के यहा मामला कुछ अलग है. सबका मानना है कि टिकट तो उसी को मिलेगा, जिसे अपने नरेन्द्र भाई देना चाहेंगे. चंद लोगो को ही मोदीजी की उनकी चाहत के बारे मे मालूम पडा है. वैसे भाजपा के कूंचे पर भी भीड़ जमी रहती है. वहां भी सैकडों की सुनवाई हो चुकी है.
इस बार चुनाव का माहौल एक साल पहले ही शुरू हो गया है. अभी तो ४५ से अधिक दिन बाकी है.देखें आगे आगे क्या होता है....
Tuesday, August 28, 2007
बहन के प्रेमी को ट्रेक्टर से बांध मार डाला
गुजरात की यह घटना एक अपराध कथा से काफ़ी कुछ ज्यादा है. हिन्दी फ़िल्म की तर्ज पर है इसकी कथा. कुछ दिन पहले ही राजधानी गांधीनगर से लगभग १२५ किलोमीटर दूर एक गांव मे तीन भाईयों ने पुलिस स्टेशन के निकट ही बहन के प्रेमी को मार डाला. हिंदी फ़िल्म के एक सीन की तरह पूरे गांव के लोग यह सब कुछ देखते रहे. कोइ कुछ नही बोला. कोइ बचाने नही आया.
ट्रेक्टर से बांध इस युवक को घसीटा गया. जब वो बेहोश हो गया तब उसे छोड ये सब भाग गये. उसने पानी मांगा, किसी ने पानी भी नही दिया. अखिरकार कीचड के पानी को चुल्लु मे भरता हुआ यह युवक मर गया.हिंदी फ़िल्मों की तरह पुलिस कई घंटो के बाद आयी. पुलिस अफ़सर फ़ोन बंद कर बैठ गये.
उसका कसूर केवल इतना था कि उसने इनकी बहन से प्यार किया था. दोनो कुछ दिन के लिये लुप्त हो गये थे. एक दिन पहले ही वापिस आये थे. दोनो पटेल जाति के ही थे.ना जाति का फ़र्क ना ही कोइ और अंतर. बस पैसे की खाई.
इन भाईयों के लिये बहन उनकी जायजाद थी। गांव के लोगो के लिये बुरे लोगों के मूंह नही लगने वाली बात थी। सब देखते रहे कोइ कुछ नही बोला. अपने पुलिस वालों के लिये तो क्या कहिये.अखबारों मे बात उछलने से तीन दिन बाद पुलिस ने कुछ लोगो को पकडा है. पर क्या गांव के लोग गवाही देंगे? जो नामर्द बन पूरी घटना देखते रहे और उस युवक को प्यास से तडफ़ते देखते रहे, उनसे आप क्या आशा रखते है ? और पुलिस जो घटना के समय गायब हो गई उससे आप क्या आशा रखते हैं ? क्या वो इन भाई लोगों के विरुद्ध पक्का केस बनायेगी ?
और आप लोगों का हमारी संवेदनहीनता के बारे मे क्या मानना है ?
ट्रेक्टर से बांध इस युवक को घसीटा गया. जब वो बेहोश हो गया तब उसे छोड ये सब भाग गये. उसने पानी मांगा, किसी ने पानी भी नही दिया. अखिरकार कीचड के पानी को चुल्लु मे भरता हुआ यह युवक मर गया.हिंदी फ़िल्मों की तरह पुलिस कई घंटो के बाद आयी. पुलिस अफ़सर फ़ोन बंद कर बैठ गये.
उसका कसूर केवल इतना था कि उसने इनकी बहन से प्यार किया था. दोनो कुछ दिन के लिये लुप्त हो गये थे. एक दिन पहले ही वापिस आये थे. दोनो पटेल जाति के ही थे.ना जाति का फ़र्क ना ही कोइ और अंतर. बस पैसे की खाई.
इन भाईयों के लिये बहन उनकी जायजाद थी। गांव के लोगो के लिये बुरे लोगों के मूंह नही लगने वाली बात थी। सब देखते रहे कोइ कुछ नही बोला. अपने पुलिस वालों के लिये तो क्या कहिये.अखबारों मे बात उछलने से तीन दिन बाद पुलिस ने कुछ लोगो को पकडा है. पर क्या गांव के लोग गवाही देंगे? जो नामर्द बन पूरी घटना देखते रहे और उस युवक को प्यास से तडफ़ते देखते रहे, उनसे आप क्या आशा रखते है ? और पुलिस जो घटना के समय गायब हो गई उससे आप क्या आशा रखते हैं ? क्या वो इन भाई लोगों के विरुद्ध पक्का केस बनायेगी ?
और आप लोगों का हमारी संवेदनहीनता के बारे मे क्या मानना है ?
मोदी जी का गुजरात की छात्राओं को रक्षाबंधन उपहार
गुजरात में यह चुनावी वर्ष है। कांग्रेस और सत्तारुढ़ भाजपा दोनों ही उनके लोक लुभावने वचनों से गुजरात के मतदाता को पटाने में लगे हुए हैं।
साफ है अपने मोदी जी का हाथ उपर है। सत्ता में जो ठहरे। बेचारे कांग्रेसी तो यह कहते है कि सत्ता में आए तो यह देगें, वो देगें। मोदी जी तो कह देते हैं यह लो, वो लो। विधानसभा में बजट था इस वर्ष का। घोषणा कर डाली कि लो इतने हजार करोड़ अगले पांच साल के लिये। हम कभी अर्थशास्त्र के छात्र नही रहे, पर विधानसभा रिपोटिंग का एक ही गुर सीखा है। विधानसभा जो मंजूर हो वही खर्चा हो सकता है और वह भी उसी साल में। खैर अपने मोदी जी है। वे कुछ भी कर सकते है। फिर परिणाम भले ही शून्य हो!!
कन्या शिक्षा के बडे हिमायती है। नारी सम्मान उनकी एक प्रिय अभिव्यक्ति है। वैसे हमारे गुजरात में पिछले तीन महिनों में आधा दर्जन से अधिक महिलाएं निर्वस्त्र हो दौड़ लगाने की धमकी दे चुकी हैं।
शिक्षा मंत्री आनन्दीबहन पटेल तो हर साल प्रवेशोत्सव आयोजित करती हैं। हमारा गुजरात तो उत्सवों का प्रदेश है। मोदी जी ने यह नारा प्रख्यात कर दिया है।
मोदी पुराण इतना विशाल है कि कोइ भी रास्ता भटक जाता है। हम बात कर रहे थे रक्षाबंधन भेट की और पहुंच गये उत्सवों तक। मोदी जी के चक्कर में अच्छे अच्छे भटक जाते है।
मोदी जी ने घोषणा की है कि अब राज्य में पढ़ने वाली हर छात्रा राज्य की बस मे मुफ्त स्कूल कॉलेज जा सकेगी। माध्यमिक स्कूल से कॉलेज तक सभी छात्राओं को इस मुफ्त यात्रा का लाभ मिलेगा।
क्योंकि राज्य की बसें शहरों में नही चलती इसलिये गांव की छात्राओं को यह लाभ मिलेगा। फिर भी संख्या कम नहीं है।पूरे अढा़ई लाख।
देखा हमारे मोदी जी चुनावी वर्ष का तोहफा। एक कांग्रेसी बोला पिछ्ले चार वर्ष में क्यों नहीं किया। अरे भई अगर पहले यह कर देते तो वोट में कैसे भुनाते इसे। फिर चार वर्ष तक उनकी सरकर को यह बोझ उठाना पड़ता अब तो घोषणा कर दी आगे राम जाने।
साफ है अपने मोदी जी का हाथ उपर है। सत्ता में जो ठहरे। बेचारे कांग्रेसी तो यह कहते है कि सत्ता में आए तो यह देगें, वो देगें। मोदी जी तो कह देते हैं यह लो, वो लो। विधानसभा में बजट था इस वर्ष का। घोषणा कर डाली कि लो इतने हजार करोड़ अगले पांच साल के लिये। हम कभी अर्थशास्त्र के छात्र नही रहे, पर विधानसभा रिपोटिंग का एक ही गुर सीखा है। विधानसभा जो मंजूर हो वही खर्चा हो सकता है और वह भी उसी साल में। खैर अपने मोदी जी है। वे कुछ भी कर सकते है। फिर परिणाम भले ही शून्य हो!!
कन्या शिक्षा के बडे हिमायती है। नारी सम्मान उनकी एक प्रिय अभिव्यक्ति है। वैसे हमारे गुजरात में पिछले तीन महिनों में आधा दर्जन से अधिक महिलाएं निर्वस्त्र हो दौड़ लगाने की धमकी दे चुकी हैं।
शिक्षा मंत्री आनन्दीबहन पटेल तो हर साल प्रवेशोत्सव आयोजित करती हैं। हमारा गुजरात तो उत्सवों का प्रदेश है। मोदी जी ने यह नारा प्रख्यात कर दिया है।
मोदी पुराण इतना विशाल है कि कोइ भी रास्ता भटक जाता है। हम बात कर रहे थे रक्षाबंधन भेट की और पहुंच गये उत्सवों तक। मोदी जी के चक्कर में अच्छे अच्छे भटक जाते है।
मोदी जी ने घोषणा की है कि अब राज्य में पढ़ने वाली हर छात्रा राज्य की बस मे मुफ्त स्कूल कॉलेज जा सकेगी। माध्यमिक स्कूल से कॉलेज तक सभी छात्राओं को इस मुफ्त यात्रा का लाभ मिलेगा।
क्योंकि राज्य की बसें शहरों में नही चलती इसलिये गांव की छात्राओं को यह लाभ मिलेगा। फिर भी संख्या कम नहीं है।पूरे अढा़ई लाख।
देखा हमारे मोदी जी चुनावी वर्ष का तोहफा। एक कांग्रेसी बोला पिछ्ले चार वर्ष में क्यों नहीं किया। अरे भई अगर पहले यह कर देते तो वोट में कैसे भुनाते इसे। फिर चार वर्ष तक उनकी सरकर को यह बोझ उठाना पड़ता अब तो घोषणा कर दी आगे राम जाने।
Monday, August 27, 2007
अमेरीका से आए सी.के.पटेल
आजकल बरसात के मौसम के साथ चुनावी मौसम भी पूरे जोर शोर से है गुजरात में। तरह-तरह के नेता मीडिया के सामने आ रहे है। कुछ तो नेता हैं तो कुछ नेता बनने को छ्टपटा रहे हैं।
अपने कांग्रेसी सी.के.पटेल ने आज मीडिया से मुलाकात कर ली। अगले दो वर्षों के लिए नेशनल फेडेरेशन इन्डियन-अमेरिकन एसोशियेशन के लिए चुने गये हैं।
बोले भारत को न्युक्लीयर ट्रीटी कर लेनी चाहिए। अमरीका में रहने वाले भारतीयों का यहीं मानना है। बोले कि वे राष्ट्रीय हित में कह रहे हैं। कोई राजनीति नहीं है यह।
पटेल जी भले ही खुद को राजनीति से दूर रखने की बात करते हों, हकीकत यह है कि पटेल जी पिछले कुछ साल से भारत में छुटभैय्या बनने के चक्कर में है। अमरीका में भले हीं वे एन आर आई में तोप हों वहां की राजनीति में तो कुछ नहीं।
लोकसभा चुनाव में साबरकांठा की टिकट लेने की काफी कोशिश की थी। पर कपडा़ मंत्री शंकरसिंह वाघेला ने अपने मघुसुदन मिस्त्री को टिकट दिलवा उनका पत्ता कटवा दिया था।
अब विधानसभा चुनाव आ रहे हैं। अपने पटेल जी वापिस सक्रिय हो गये हैं। अब वे साबरकांठा की किसी विधानसभा टिकट के लिए सक्रिय हैं।
पिछली बार तो शंकरसिंह ने उनका पत्ता साफ किया था, इसलिए इस बार शायद अपने पटेल जी अपने न्युक्लीयर ट्रीटी के शस्त्र से सब बाधाएं पार कर कांग्रेस की टिकट पा जाए। आखिरकार कांग्रेस को भी साम्यवादियों से इस मुद्दे पर लड़ने के लिए शस्त्र चाहिए!
अपने कांग्रेसी सी.के.पटेल ने आज मीडिया से मुलाकात कर ली। अगले दो वर्षों के लिए नेशनल फेडेरेशन इन्डियन-अमेरिकन एसोशियेशन के लिए चुने गये हैं।
बोले भारत को न्युक्लीयर ट्रीटी कर लेनी चाहिए। अमरीका में रहने वाले भारतीयों का यहीं मानना है। बोले कि वे राष्ट्रीय हित में कह रहे हैं। कोई राजनीति नहीं है यह।
पटेल जी भले ही खुद को राजनीति से दूर रखने की बात करते हों, हकीकत यह है कि पटेल जी पिछले कुछ साल से भारत में छुटभैय्या बनने के चक्कर में है। अमरीका में भले हीं वे एन आर आई में तोप हों वहां की राजनीति में तो कुछ नहीं।
लोकसभा चुनाव में साबरकांठा की टिकट लेने की काफी कोशिश की थी। पर कपडा़ मंत्री शंकरसिंह वाघेला ने अपने मघुसुदन मिस्त्री को टिकट दिलवा उनका पत्ता कटवा दिया था।
अब विधानसभा चुनाव आ रहे हैं। अपने पटेल जी वापिस सक्रिय हो गये हैं। अब वे साबरकांठा की किसी विधानसभा टिकट के लिए सक्रिय हैं।
पिछली बार तो शंकरसिंह ने उनका पत्ता साफ किया था, इसलिए इस बार शायद अपने पटेल जी अपने न्युक्लीयर ट्रीटी के शस्त्र से सब बाधाएं पार कर कांग्रेस की टिकट पा जाए। आखिरकार कांग्रेस को भी साम्यवादियों से इस मुद्दे पर लड़ने के लिए शस्त्र चाहिए!
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