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Saturday, February 22, 2014

पेड न्यूज का गोरखधंधा

चुनाव आए नहीं कि पेड न्यूज की चर्चा शुरू हो जाती है। संपादकीय लिखे जाते हैं। कभी कभी टीवी पर इस पर चर्चा भी देखने को मिल जाती है। चुनाव आयोग ने पेड न्यूज पर नजर रखने के लिए जिला स्तर तक की समीतियां बना दी हैं।
पर ये पेड न्यूज है किस बला का नाम? चुनाव आयोग के अनुसार यह एक खतरनाक बला है, स्वच्छ चुनाव प्रणाली की दुशमन। पैसे दे समाचार लिखवाना यानि कि पेड न्यूज। अब यह कैसे मालूम पड़ेगा कि कोई समाचार पैसे दे कर लिखवाया है या फिर सचमुच एक सही समाचार है।
भारतीय चुनाव आयोग के पीके दाश जी का कहना है कि प्रेस काउंसिल से चुनाव आयोग को कोई खास मदद नहीं मिली। काउंसिल ने तो जिला स्तर पर उसके प्रतिनिधी देने में भी उसकी असमर्थता जता दी।
वैसे भैये प्रेस काउंसिल तो क्या अच्छे अच्छे को न्यूज की परिभाषा ही नहीं मालूम। खैर चुनाव आयोग के अनुसार विज्ञापन जैसा समाचार छपे तो वह पेड न्यूज! पर इसमें जोरदार तो यह है कि यदि उम्मीदवार ऐसे समाचार के लिए खर्च को चुनावी खर्च में बताते हुए पेड न्यूज छपवाए तो यह चुनावी कानून का उलंघन नहीं है।
चुनाव आयोग मानता है कि यह गलत है। इस प्रकार के समाचार मतदाता और मतदान को प्रभावित करते हैं। पर अखबारों के विरुद्ध वे कुछ नहीं कर सकते। प्रेस काउंसिल के पास भी कोई प्रभावी हल नहीं है। चुनाव आयोग ने अख्बारों के विरुद्ध कार्यवाही के लिए सत्ता के लिए प्रस्ताव रखा है, पर वह काफी समय से लम्बित है।

वह हो भी जाए तो भी आसा नहीं है पेड न्यूज को पकड़ पाना।

Thursday, August 23, 2012

अहमदाबाद में सभी मतदाताओं को फोटो पहचान पत्र


अहमदाबाद शहर और जिला के सभी मतदाता इस विधान सभा चुनाव में फोटो पहचान पत्र से लैस होंगे. अहमदाबाद के कलेक्टर विजय नेहरा का कहना है कि पूरे देश मे अहमदाबाद शायद पहला जिला होगा जहां सभी मतदाताऑ के पास विधान सभा चुनाव में फोटो पहचान पत्र होंगे.
यह कार्य छोटा नही है. ४५ लाख से अधिक रजिस्टर्ड मतदाता जो २१ विधान सभा चुनाव मतक्षेत्रो में फैले हुए हैं. उनका कहना है कि जिला प्रशासन के पस्स सभी ४५१४६०७ रजिस्टर्ड मतदाताओ के फोटो हैं. अर्थात एक भी मतदाता ऐसा नही है जिसका फोटो जिला प्रशासन के पास न हो.
इसमे दो लाख मतदात ऐसे हैं जिनके पास फोटो पहचान पत्र नही थे. इन सभी को सितम्बर के अंत तक मे पहचान पत्र मिल जायेंगे, नेहरा ने कहा. बडे शहरों मे मतदाताओ की उदासीनता देखते हुए भी यह एक बडी उपलब्धी है. ५,००० बूथ लेवल अधिकारी इस कार्य मे जुट गये थे.
अधिकारी बिना फोटो वाले मतदातओं के घर एक से अधिक बार गये तभी यह काम पूरा हुअ, नेहरा ने कहा. कई किस्सों मे तो मतदाताओं ने इन अधीकारिओं को उट पटांग बोला भी और फोटो न देने के बहाने भी बनाये. की किस्सों मे तो अधीकारिओं ने खुद ही फोटो खींच डाले. उन्होने पत्रकारो को अधीकारिओ के तस्वीर लेते हुए फोटो भी दिखाये.
इस वर्ष शुरु किये गये विशेष अभियान मे ६५,००० दुप्लिकेट पहचान पत्र भी पकडे गये.
नेहरा ने कहा कि २००७ के चुनाव मे १२ लाख से अधिक मतदातओं के पास फोटो पहचान पत्र नही थे. इस बार एक भी मतदाता फोटो पहचान पत्र  बिना नही होगा.

Sunday, October 28, 2007

गुजरात मे चुनावी माहौल

दिसम्बर मे गुजरात मे विधान सभा चुनाव होने जा रहें है. आजकल राजनीतिक दलों के कार्यालयो पर टिकट लेने वालों के टोले इकठ्ठे हो रहे हैं.वर्षो बाद कई चेहरे दिखलाई दे रहे हैं.आखिर टिकट की लाटरी की बात जो ठहरी. राजनीति का चस्का ऎसा है कि एक बार लग गया तो उसका रंग छूटता ही नही. उम्र नहि ख्वाहिश जवान रहनी चाहिये.
भाजपा के स्टार प्रचारक अपने मुख्यमंत्री मोदीजी ही है. कांग्रेस के युवा नेता सुबह हेलिकोप्टर ले गुजरात की हवाऒं को रोंदने निकल जाते है. अभी से यह हाल है, कि नेता ही नही उनसे जुडे कार्यकर्ता भी मुश्किल से सो पाते हैं.
पिछले दो दिनों मे कांग्रेस ने २२०० कार्यकर्ताओं को सुना. सभी को टिकट चाहिये. सभी को लगता है कि इस बार तो कांग्रेस सत्ता मे आ ही जायेगी. १८२ बैठको के लिये २३०० उम्मीदवार !! इससे बडा उत्साह वर्धक समाचार और क्या हो सकता है अपने कांग्रेसी नेताओ के लिये.
अपने भाजपाईयो के यहा मामला कुछ अलग है. सबका मानना है कि टिकट तो उसी को मिलेगा, जिसे अपने नरेन्द्र भाई देना चाहेंगे. चंद लोगो को ही मोदीजी की उनकी चाहत के बारे मे मालूम पडा है. वैसे भाजपा के कूंचे पर भी भीड़ जमी रहती है. वहां भी सैकडों की सुनवाई हो चुकी है.
इस बार चुनाव का माहौल एक साल पहले ही शुरू हो गया है. अभी तो ४५ से अधिक दिन बाकी है.देखें आगे आगे क्या होता है....
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