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Thursday, July 5, 2007

भारत मे विश्व की फ़ौजों का ओलेम्पिक

प्रसिद्ध ओलेम्पिक की तर्ज सेनाओं का भी खेलों का ओलेम्पिक होता है। चार वर्ष मे एक बार । १९९५ मे इसकी शुरुआत भी ओलेम्पिक की तरह रोम से ही हुई थी। इस वर्ष चौथा ओलेम्पिक हो रहा है । इसके लिये भारत को चुना गया है। हैदराबाद मे अक्टूबर १४ से २१ के दौरान होगा यह।
इसमे १३० देशों की फ़ौजों के ६००० से अधिक खिलाडी भाग लेंगे। इसमे कई ओलेम्पिक खिलाडी भी होंगे । सेलिंग और ट्राईथेलोन को छोड़ बाकी सभी खेल यही होंगे। ये दो खेल मुम्बई मे होंगे । खेल से दोस्ती नारा है इस बार ओलेम्पिक का। इसमे कुल पंद्रह खेल है ।
रोम के बाद यह ओलेम्पिक क्रोशिया और इटली मे हुआ था। इसे वर्ल्ड मिल्ट्री गेम्स नाम दिया गया है और इसका संचालन इंटरनेशनल मिल्ट्री स्पोर्ट कौंसिल द्वारा किया जाता है जो इंटरनेशनल ओलेम्पिक कमीटी द्वारा मान्य है ।

जामनगर के क्रिकेट धुरंधर

भारत की प्रतिष्ठित रणजी ट्राफ़ी और दुलीप ट्राफ़ी जामनगर के राजाओं की याद में हैं। अंतरराष्‍ट्रीय क्रिकेट खेलने वाला पहला भारतीय खिलाडी जामनगर से था। वेस्‍ट इंडीज पर भारत की पहली जीत दर्ज कराने वाली टीम में सलीम दुर्रानी की बडी भूमिका थी। अर्जुन अवार्ड पानेवाला पहला क्रिकेटर सलीम दुर्रानी जामनगर से है। आज भी वह जामनगर में ही रहता है।

ये तो सुर्खियां है गुजरात के इस तटीय शहर जामनगर के भारतीय क्रिकेट में योगदान की। आज जब भारत आफ़ीशियल क्रिकेट का ७५वां वर्ष मना रहा है तब जामनगर के उल्‍लेख के बिना सब अधूरा नहीं, बिल्‍कुल बेकार है।

पिछ्ले सौ से अधिक वर्षों से क्रिकेट को पालने पोसने वाला जामनगर का राजघराना आज भी क्रिकेट का एक महत्‍वपूर्ण स्‍थल है। लोग अजय जाडेजा को जानते हैं। वे जामनगर के हाल के जामसाहब शत्रुशल्‍यसिंहजी का भतीजा है।

इन सौ साल में जामनगर ने एक दर्जन अंतर्राष्‍ट्रीय ख्‍याति वाले खिलाडी दिये हैं तो ५० जितने रणजी ट्राफ़ी प्‍लेयर। जामनगर के एकता डायरी के प्रकाशक दीपक जोबनपुत्र जामनगर के इतिहास को अपनी डायरी में उभारने के लिये प्रख्‍यात है। उनके पास जामनगर की क्रिकेट की रसप्रद घटनाओं का पिटारा है।

वे एक रसप्रद किस्‍सा बतलाते हैं। जिस व्‍यक्‍ति को क्रिकेट की दुनिया वीनू मांकड के नाम से जानती है, उसका असली नाम था मूलवंतराय हिम्‍मतलाल मांकड। जामनगर के जामसाहब के कहने पर उन्‍होंने उनका नाम वीनू मांकड लिखना शुरु कर दिया।

१९७१ में जन्‍मा लेफ़्‍ट आर्म बाऊलर नागर ब्राह्मण था। यह भारत के उन तीन खिलाडियों में से था जो पहले से ग्‍यारहवें खिलाडी तक के सभी स्‍थानों पर खेला। मजेदार बात यह है कि वह राईट आर्म बल्लेबाज था। उसके परिवार के कुछ लोग आज भी जामनगर में रहते है। उनका पुत्र अशोक मांकड भी टेस्ट खिलाडी रह चुका है।

जामनगर ने भारत को छह क्रिकेटर दिए है। यह सभी अपने समय में धुरंधर रहे है। उनके नाम है, प्रिंस रणजीत सिंह और उनका भतीजा प्रिंस दुलीप सिंह, विनु मांकड, सलीम दुरानी, इन्द्रजीतसिंह और अजय जाडेजा। रणजीतसिंह ने १८९६ से १९०२ तक १५ टेस्ट मेच में दो शतक तथा ५ अर्धशतक के साथ ९९५ रन बनाए थे। जबकि उनके भतीजे दुलीप ने १९२९ से १९३१ तक १२ टेस्ट में ३ शतक तथा पांच अर्धशतक के साथ ९९५ रन बनाए थे।

विनु मांकड ने सन १९४६ से १९५९ के दौरान ४४ टेस्ट में पांच शतक और ६ अर्धशतक के साथ २१०९ रन बनाए। सलीम दुरानी १९६० से १९७३ तक टेस्ट खिलाडी रहे। इस दौरान उन्होने २९ टेस्ट में एक शतक और ९ अर्धशतक के साथ १२०२ रन बनाए थे। वे ओलराउंडर थे और उन्होने ७५ विकट लिये थे। इन्द्रजीतसिंह १९६४ से १९६९ तक टेस्ट खिलाडी रहे। इस दौरान उन्होने ४ टेस्ट में कुल ५१ रन बनाए थे। अजय जाडेजा १९५२ से १९९८ तक टेस्ट खिलाडी रहे। इस दौरान उन्होने १३ टेस्ट में ४ अर्धशतक के साथ ५३८ रन बनाए थे।

जब कोई शिकायत न सुने...

RTI यानि कि सूचना अधिकार। इस कानून ने आम आदमी के अधिकारों में क्रांति ला दी है। अब हम हमारी जानकारी पा कर ही रहते हैं। अगर अधिकारी जानकारी न दे तो उसकी खाट खड़ी हो जायेगी, हो रही है।

पर जानकारी का क्या फ़ायदा? मतलब तो काम होने से है। सरकार ने उसके विभिन्न कार्यालयों के लिये सिटीजन चार्टर बना रखे हैं। ये बतलातें हैं कि संस्था क्या करती है। यह यह भी बतलाते है कि कौन क्या काम करता है।

पर इससे अपना काम हो जाये यह जरुरी तो नहीं है। जन्म मृत्यु रजिस्ट्रेशन कार्यालय सूचना अधिकार के तहत यह तो बतलायेगा कि अर्जी कहां है। सिटीजन चार्टर यह बतायेगा कि कौन अधिकारी अर्जी की कौनसी चटनी बनायेगा।

पर मुझे यह सर्टिफ़िकेट मिले इसकी गारंटी क्या? निश्चित समय में मिले इसका कोई प्रावधान नही। जानकारी लेने मात्र से क्या होगा? हाल ही में संसद की एक स्थायी समिति जब दौरे पर निकली तब उसे ऎसे बहुत से किस्से जानने को मिले। लोगो ने शिकायत तो की है पर अधिकारी अपनी पूरी क्रिएटीविटी से उनकी फ़ाईल को टल्ले चढाते रहते है।

गुजरात के दौरे पर आई इस समिति के अध्यक्ष सुदर्सन का कहना है कि अब जन फ़रियाद के निश्चित समय पर निकाल के लिये कानून बनना चाहिये। पर उनकी समिति केवल सिफ़ारिश ही कर सकती है। कानून बनाना सरकार के हाथ में है। समिति जल्द ही उसकी सिफ़ारिश करेगी।

भैये भगवान करे सरकार जल्द ही आपकी राय मान कानून बना दे। करोडो़ को राहत होगी। भगवान तक हम इसलिये पहुंचे कि हमारे हिन्दुस्तान को भगवान ही तो चला रहा है।

Wednesday, July 4, 2007

मोदीजी स्वीटजरलैंड से वापिस आ गये

आप सोच रहे होंगे कि इसमे ऎसी क्या खास बात है ? जब गये थे तो वापिस तो आयेंगे ही। अभी तो गुजरात मे उनका राज चलता है । नही जीं, जिस तरह अपने मोदीजी का जाना एक चर्चा का विषय था उसी तरह उनका वापिस आना भी।
मालूम है, गुजरात की खराब हालत देखते ही मोदीजी जल्दी से वापिस आ गये। यह हम नही कह रहे हैं, उनके राजस्व मंत्री कौशिकभाई पटेल और कृषि मंत्री भूपेन्द्र चूडासमा का कहना है। उन्होने कल बताया था कि लगभग चार घंटे जल्दी आयेंगे।
मोदीजी तो विशेष वायुयान से गये थे। उसका कोई टाईम टेबल तो होता नही । जब दिल करे, उडवा दो। अब चार घंटे के लिये कोई झूठ थोडे ही बोलेगा। देखो भैये, मोदीजी गये थे तीन दिन के प्रवास पर । यानि कि पूरे ७२ घंटे । अब अगर ऎसे मे अपने गुजरात के साडे पांच करोड लोगो के ह्रुदय सम्राट (हम नही कहते, मंत्री और अन्य मोदीजी के भाषण मे कहते हैं ) चार घंटे जल्दी आते हैं तो वह हुआ साडे पांच प्रतिशत । कम है क्या ?
खैर , इधर उनका जहाज उतरा, उधर बारिश बंद । इसे हमारी नानी राजा का सत कहती थी । सूचना विभाग का कहना है इधर जहाज से उतरे उधर हवाई अड्डे पर ही अधिकारियो की बैठक की और दूसरा जहाज पकड वो चल दिये बाढ प्रभावित इलाके का हवाई निरीक्षण करने । भावनगर पर जब उनका जहाज तेल लेने के लिये उतरा तो वहा भी उन्होने प्रभारी मंत्री और अधिकारियों की मीटिंग कर डाली।
ये कांग्रेसी बेकार मे कहते हैं कि मोदीजी के राज मे बस मीटिंग, ईटिंग और चीटिंग ही है । स्वीटजरलैंड से आ बिना टाईम लेग और जेट लेग की चिंता किये अपने मोदीजी दौरे पर निकल गये। मीटिंग बेकार नही करते । अहमदाबाद हवाई अड्डे की मीटिंग के बाद उन्होने घोषणा कर दी कि बरसात से मरने वाले को अब रु ५०,००० की जगह रु एक लाख दिया जायेगा । बरसात मे पिछले साल भी काफ़ी लोग मरे थे । पर समय समय की बात है । ये चुनावी वर्ष जो ठहरा।
अपने मोदीजी सूचना मंत्री भी हैं । उनके विभाग का कहना है कि देखो देखो कैसा समय आया है। बरसात का मौसम शुरू होने से पहले ही मौसम की आधी बरसात हो गयी। देखा मोदीजी के सत का प्रताप । काश एक बारिश मे ही सारी फ़सल पैदा हो जाती । पर उस जमीन का क्या जो इस बरसात मे बिगड गई । नही हमे यह सब नही सोचना चाहिये । यह कांग्रेस के नकारात्मक राजनीति का प्रभाव है । हमे सकारात्मक सोच रखनी चाहिये ।
शाम को कांग्रेस के शक्तिसिंह मिले। पत्रकारो को बोले कि हमारे मंत्री आ रहे थे और उन्हे मालूम पडा कि पाटडी मे कुछ लोग फ़ंसे थे और उन्हे बचाने के लिये हमारे मंत्री उतर गये (आकाश मे नही, हवाई अड्डे पर) । उन्होने उनका हेलिकोप्टर इन लोगों को बचाने के लिये भेज दिया ( अंदाज ऎसा कि वो यान उनका अपना था या फ़िर जेब से पैसा दे किराये पर लिया था) । हमसे रहा नही गया। हमने पूछ ही लिया । भैये हेलिकोप्टर किसका था ? बोले, भारतीय वायु सेना का ।
और जब हम आफ़िस पहुंचे, वहां सूचना विभाग का प्रेस नोट था कि राज्य सरकार ने हेलिकोप्टर की मदद से पाटडी मे पानी मे फ़ंसे लोगो को बचा लिया !
सच तो राम जाने किसका हेलिकोप्टर था और किसने बचाया । हमे तो बस यह मलूम है कि हमारे मोदीजी वापिस आ गये हैं ।

Tuesday, July 3, 2007

बाबू बजरंगी , शिव सेना का गुजरात मे हिंदू चेहरा

सुप्रीम कोर्ट के लफ़डे से लुप्त अपने बाबू बजरंगी अब नये स्वरूप मे अवतरित हुए है। शिव सैनिक के रूप मे! पूरे जोर शोर से। मीडिया की चकाचौंध मे उन्होने दुनिया को अपना नया रूप दिखलाया। और कुछ लिखे उससे पहले हम अपने ब्लागियों की सुविधा के लिये बता दें कि बाबू बजरंगी बंदा कौन है? वैसे बाबू बजरंगी और मेरा हम दोनो का मानना है हिंदुस्तान मे हर कोई बाबू बजरंगी को जानता है।
मालूम है , एक फ़ोन ठोक दिया था थियेटर वालों को और किसी की हिम्मत नही हुई थी परजानिया फ़िल्म बताने की पूरे गुजरात मे। महेश भट्ट भी कूद पडे थे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का झंडा ले। फ़िल्म रिलीज हुए बिना ही परजानिया और राहुल धोलकिया मशहूर हो गये थे पूरे देश में ।
अपने बजरंगी साहब की विशेषता यह है कि जब कभी भी उन्हे लगता है कि कोई हिन्दू लडकी किसी मुसलमान लडके के साथ चली गई तब वे उस लडकी को वापस लाने का उनका धर्म निभा कर ही रहते हैं। ऎसा ही एक धर्म निभाते हुए उनका पंगा सुप्रिम कोर्ट से पड गया और वे लुप्त हो गये। बजरंग दल और विश्व हिन्दु परिषद ने उन्हे गर्म आलू (hot potato वाली अंग्रेजी कहावत ) की तरह उन्हे छोड दिया था। घोषणा कर दी कि हमारा उनसे कोई नाता नहीं।
अपने इस नये अवतार में उन्होने पहला वार उनके गुरु विहिप नेता प्रवीण तोगडिया पर किया। बोले बेकार है उनकी दुकान। वो डाक्टरी करें। वे हिन्दू नेता नहीं है। भाजपा को भी पेट भर गालिया बकी । बोले किसी काम के नही हैं ये लोग । हिंदुऒ के लिये क्या किया है इन्होने ?
वे शिव सेना नेताओं के प्रशंसक है। उनके अनुसार वे बजरंग दल - विहिप की तरह बीच रास्ते में नहीं छोडते। भैये अभी तो सफ़र शुरु किया है। आधा रास्ता तो आने दो।
उनका कहना है कि वें हिन्दु लडकी बचाओ का उनका धर्म निभाते रहेंगे। वे यह काम उनकी नव चेतन ट्र्स्ट द्वारा करते हैं । मालूम है कि उनका सबसे पहला काम क्या होगा? गोधरा कांड के कारण जेल में सड रहे हिन्दूओं का भोजन भिजवाया करेंगे। उन्हे मदद करेंगे। भैये क्या बडे भैया प्रविण तोगडिया ना कह्ते थे इसके लिये?
खैर अब वे गुजरात में शिव सैनिक बन तलवार चलायेंगे मैदाने चुनावी जंग में। कब कैसे इसके बारे में वे बाद में बताऎंगे।
पर एक बात में वे स्पष्ट हैं। नरेन्द्र मोदी उनके नेता हैं। बोले मै तो उनके चरणों में हूं
देखें गदा वाले बजरंगी अब तलवार कैसे चलाते हैं।

Monday, July 2, 2007

नमक खाओ तो सेंधा नमक खाओ

नमक का महत्व कौन नही जानता? सभी को मलूम है कि नमक हमारे शरीर के लिये बहुत जरूरी है। इसके बावजूद हम सब घटिया किस्म का नमक खाते है। यह शायद आश्चर्यजनक लगे , पर यह एक हकीकत है ।

जामनगर स्थित एन के भारद्वाज का कहना है कि भारत मे अधिकांश लोग समुद्र से बना नमक खाते है । श्रेष्ठ प्रकार का नमक सेंधा नमक है, जो पहाडी नमक है । इस नमक से हम सब परिचित है । व्रत के समय इसी नमक का उपयोग होता है । भारद्वाज नमक विशेषज्ञ हैं और नमक उत्पादन से ले नमक आधारित उध्योग मे पिछले ३० वर्ष से हैं।

अहमदाबाद के प्रख्यात वैद्य मुकेश पानेरी कहते है कि आयुर्वेद की बहुतसी दवाईयों मे सेंधा नमक का उपयोग होता है।आम तौर से उपयोग मे लाये जाने वाले समुद्री नमक से उच्च रक्तचाप का भय रहता है । इसके विपरीत सेंधा नमक के उपयोग से रक्तचाप पर नियन्त्रण रहता है । इसकी शुध्धता के कारण ही इसका उपयोग व्रत के भोजन मे होता है ।

सेंधा नमक की सबसे बडी समस्या है कि भारत मे यह काफ़ी कम मात्रा मे होता है , और वह भी शुध्ध नही होता है। भारत मे ८० प्रतिशत नमक समुद्री है, १५ प्रतिशत जमीनी और केवल पांच प्रतिशत पहाडी यानि कि सेंधा नमक । भारद्वाज कहते हैं कि सबसे अधिक सेंधा नमक पाकिस्तान की मुल्तान की पहडियों मे है।

यदि बाजार का सर्वेक्ष्ण करे तो मालूम पडेगा कि समुद्री और सेंधा नमक के दाम मे इतना अधिक अंतर है जिसके कारण लोग समुद्री नमक खरीद्ते हैं । हमने अहमदाबाद बाजार मे जांच की तो मालूम पडा कि समुद्री नमक जहां नौ रु किलो है तो सेंधा नमक का दाम रु ४० प्रति किलो है । सेंधा नमक समुद्री नमक से कम नमकीन होता है । साफ़ है कि इसका अधिक उपयोग करना पडता है ।
और इसीलिये लाख उपयोगी होने के बावजूद लोग इसकी जगह समुद्री नमक से ही चला लेते है ।

Friday, June 29, 2007

रथयात्रा का चिठ्ठा, संजय भैय्या के नाम

प्रिय संजय बेंगाणी भैय्या,

आपकी हमारे लेख पर लेख रुपी टिप्पणी "अहमदाबाद की यात्रा का माहौल" पढी। एकदम ज्ञानदत्त पाण्डॆय़ का वह लेख याद आ गया कि नोन कन्ट्रोवर्सियल लेख लिखने के दस नुस्खे। हमारी आंखो के समक्ष कुछ शब्द तैर गये जिन्हे लिखने से पाण्डॆय़जी ने सभी को ना कहा है।

मित्रवर हमारे लेख में हमने लिखा है कि यात्रा शांतिपूर्वक होती है। पर, आप कह रहे है कि हम इस बात का अनुमोदन करें। मित्र हम शुध्ध वैदिक संस्कृति वाले ब्राह्मण है। नदी, पेड, पानी सभी से सीखने के लिये तत्पर।

लगता है कि हम हमारे विचार सही ढंग से प्रस्तुत नही कर पाये। आप ठहरे इस नारद के कर्णधार। मैं आपको गलत समझने की धृष्टता कैसे कर सकता हूं। वैसे भी अपना मानना है कि यदि कोई कुछ कहे तो उसे पोजीटिव लो। पहले खुद को खोजो। हमने यही किया । हे नारद के कर्णधार तू ही तो महाभारत में संजय दृष्टि बन धृतराष्ट्र की दृष्टि बना था। अब तू मेरी दृष्टि बन। इस चिठ्ठासंसार का दर्शन करा हे संजय।

हे संजय मैने और मेरे पुत्र मधुर ने ज़िंदा बम का समाचार देखा उसी का ब्यौरा लिखा है। २००७ के मोदी के गुजरात के संजय तुम हमें वो जगह बताओ ज़हां कोई पुलिसवाला बिना सुरक्षा कवच के ज़िन्दा बम पकड सकता हो। हे संजय भगवान ने तुम्हे वह दृष्टि दी है जो मेरे जैसे आम आदमी के पास नहीं है।

हे संजय आज सारा अहमदाबाद इस किस्से की चर्चा कर रहा है, तब आप भी सुन ही रहे होगे। महाभारत वाले संजय तुम तो दृष्य श्राव्य (audio-visual) कामेंटरी दे रहे थे। साफ है कि सुन भी रहे होगे।

हे महान आत्मा तुम तो हमेशा ही दिव्य पुरुषों के सानिध्य में ही रह्ते हो। दिव्य शक्तियां है तुम्हारे पास। तुम व्यापार काज से अगर मुम्बई हो तो भी दिव्यकृपा से तुम अहमदाबाद की इस चर्चा को देख सुन रहे होंगे।

हे धृतराष्ट्र (अरविंद कुमार ने उनके समांतर कोश के खंड १ में संजय के जो पर्याय दिये है उसमें धृतराष्ट्र भी है, 777.93 की प्रविष्टि है) तुझे तो गांधारी मिली थी। इस जन्म में तुम ऎसा शिष्य वर्ग पाने की चाह में हो जो गांधारी बन दुनिया में आंख मींच बैठ जाए। मत भूलो धृतराष्ट्र तुम संजय भी हो। तुम्हे वही बोलना है जो देख रहे हो। जो दिखलाई दे रहा है। रथयात्रा १६ जुलाई को है। पर लोगों के दिलों में दहशत अभी से है। हम मानते है कि कुछ नहीं होगा। पुलिस प्रशासन सब ठीक होने देगा। पर क्या करें? मानव मन तो उसके भयों, आकांक्षाओ और आशाओं और अपेक्षाओं से ही उसकी जिन्दगी का ताना बाना बुनता है।

हे संजय तुम तो दिव्य ज्ञान वाले हो। हमने जो लिखा है वह मजाक या खींचाई कैसे हो गये? जबसे आपका लेख पढा हमारी लाइब्रेरी के सारे शब्द कोश- पर्यायवाची कोश ढूंढ मारे। संजय का पर्याय धृतराष्ट्र मिल गया पर इन दो शब्दों की हमारे लेख पर फिट बैठने वाली परिभाषा नहीं मिली। अपनी दिव्यदृष्टि से वह पुस्तक ढूंढो संजय। पता बता दो, मैं पहुंच जाउंगा।

हे संजय नारद रूप में विचरन करते हुए कुछ दिन पहले आप हमारे एक चिट्ठे "मोदी जी के वायदो का व्यापार" पर पहुंच कर नारायण नारायण की जगह एक अलग टिप्पणी कर आये थे। "शून्य भी तो मोदीजी के सहारे आगे बढना चाह्ता है"। हे दिव्यगणों के साथ विचरण करने वाली श्रेष्ठ आत्मा मुझे बतलाओं क्योंकि मेरे बारे में मैं यह सत्य नहीं जानता। इस विप्र के ज्ञान की पिपासा का शमन करो। हे ज्ञानियों के ज्ञानी नारद के कर्णधार। मैं इस राज के बोझ से जी नहीं पा रहा हूं। हे मुनिवर बताओ जीरो कालम लिखने का मोदीजी मुझे क्या देते हैं? या कांग्रेस क्या देती है? इस व्याकुल मन की प्यास बुझाओ संजय।

प्रभु मोदीजी अपने गुजरात के मुख्यमंत्री हैं। हम उनका आदर करते है भगवन। पर प्रभु, आपको मालूम है कि सेना की जीत का तमगा अगर सेनापति की छाती पर कमीज पर लगता है तो हार की कालिख मुंह पर लिपती है। तमगे की तरह वर्दी पर नहीं, शुध्ध चमडी वाले मुंह पर।

इसलिये हे प्रभु कृष्ण की बात भी सुनो। संजय हो। सजाल की महाभारत के हर शब्द को सुनो। हे अर्जुन यह सब लीला है इसलिये विचलित मत हो। सब अपना रोल कर हैं। सुना कृष्ण उवाच। संजय का पर्याय धृतराष्ट्र जानने के लिये समांतर कोष देखना पडा। पर योगेश ही साक्षात कृष्ण है उसी यादवास्थली में जहां संजय तो कामेंटरी दे रहा है योगेश युध्ध को दिशा दे रहा है।

गीता में यह अध्याय नहीं है प्रियवर ! खैर इस सजाल की यादवास्थली पर हम हमारा लेख और संजय भैया की लेख रूपी टिप्पणी रख रहे हैं आप सभी के अवलोकन और मन्थन के लिये । तथास्तु ।

हमारा चिठ्ठा :
सावधान अहमदाबाद में आतंक यात्रा आ रही है

हालांकि पिछले कई वर्षों से रथ यात्रा के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना नही हुई है, जगन्नाथजी की यात्रा अहमदाबाद मे अभी तक दंगा यात्रा का उसका लेबल नही हटा पाई है । रथयात्रा के कुछ दिन पहले ही बम और पिस्तौल मिलने के समाचार आने शुरू हो जाते हैं । पिछले कुछ वर्षों से पुलिस का दावा है कि उसकी सतर्कता के कारण हिंसा फ़ैलाने वाले तत्व सफ़ल नही हो पाते।
कल ही पुलिस ने एक मुसलमान युवक को लालदरवाजा मेन बस टर्मिनस पर से पकडा। पुलिस का कहना है कि उसे जानकारी मिली थी कि वह युवक वहां बम बेचने आया था । बंगाल से अहमदाबाद देसी बम बेचने आया था ! मजे की बात यह है की लालदरवाजा पर ज्यादातर लोग जीरो नंबर के प्लेट्फ़ोर्म पर ही पकडे जाते है। अरे भैये अगर देसी पिस्तोल का कट्ता बेचते हुए कोई पकडा जाये तो हम समझ सकते है कि वह उत्तर प्रदेश से आया होगा । गुजरात मे लोग यूं ही करोडों का गोटाला कर पैसे बना लेते है, बिना किसी कट्टे के । इसलिये जब जरूरत होती है तब उत्तर प्रदेश से मंगवा लेते हैं ।
हमने कल पुलिस वालो को बम पकड्ते देखा । पुलिस की हिम्मत को दाद देनी पडे । जिंदा बम खुले हाथ पकड कर ले गये अपने पुलिस वाले । बस सिर पर एक हेल्मेट पहन रखी थी। इसे कहते है जाबांज पुलिस । स्काट्लेंड और अमरीका की एफबीआई को गुजरात पुलिस से यह गुर सीखना चाहिये । हमे हमारे बचपन के वो दिन याद आ गये जब हम मदारी का जहरीले सांप का खेल देखते थे । आजकल के बच्चो के ऎसे भाग्य कहां । मेनका गांधी ने सपेरो, बन्दर- भालू वालों के धंधे की वाट लगवा दी है ।
खैर हमारे साथ टी वी पर यह द्रश्य देख रहे हमारे पुत्र ने हमारे साथ बहस शुरू कर दी । डिस्कवरी चैनल का रसिया हमारा मधुर अड गया कि बिना किसी सुरक्षा के पुलिस बम इस तरह से कैसे ले जाती । हमने उसे कह दिया कि कालेज मे पढने का यह मतलब नही कि उसे सब कुछ आता है। हमारे अहमदाबाद की पुलिस तो रोकेट लोंचर तक पकड लेती है ये तो सादा बम है । उसने पूछा कि बंगाल से बम बेचने आया, वहां कुछ खास बात है क्या ? जैसेकि रामपुरी चाकू । हमने कहा कि आतंकवादी ऎसे रास्ते अपनाते है जो अच्छे अच्छे करमचंद और डिटेक्टिव ऒकारनाथ (डॉन) भी नही समझ पाते हैं ।
खैर अपने मित्रो ने भविष्यवाणी कर दी है की अभी कुछ और पकडे जायेंगे क्योकि हर साल यह होता है। यात्रा के शांतिपूर्वक निकल जाने पर पुलिस के अफ़सरान पुलिसवालो को यात्रा को शांतिपूर्वक निकलवाने के लिये धन्यवाद देते हैं । अपने भाजपाई मित्र मोदी जी का हिन्दुऒ की यात्रा की सफ़लता के लिये आभार मानेंगे । हर साल यही हो रहा है ।


संजय भैय्या उवाच:

अहमदाबाद की यात्रा का माहौल

यात्रा का समय नजदीक आ रहा है. अहमदाबाद में वर्षो से पूरी की तर्ज पर यात्रा निकलती रही है. योगेशजी ने इस पर लिखा है. मैं वहाँ टिप्पणी नहीं कर पाया, ब्लॉगर.कोम की कोई तकलीफ थी.
खैर, यात्रा का समय नजदीक है, पुलिस की चौकसी व तैयारियाँ चल रही है. यात्रा जो की बहुत ही लम्म्म्बी होती है और सँकरी गलियों से गुजरती है, यहाँ तक की कई मुस्लिम बहुल इलाको से भी गुजरती है. अब जबकि समानांतर चौड़ी सड़के बन गई है तो यात्रा को इन्ही सड़को से निकलाने का सुझाव दिया जाता रहा है, मगर इसे आयोजको ने मंजूर नहीं किया है.
इधर दोनो समुदायों के सरफिरे तत्वो को मौके की तलाश रहती है, जो प्रशासन के लिए सर दर्द है. यात्रा के पुरे मार्ग में धार्मिक नहीं वरन देशभक्ति के गीत बजते रहते है.
यात्रा के समय जहाँ पहले दहशत का सा माहौल रहता है, अब वैसा नहीं है. पिछली कई यात्राएं बहुत अच्छे वातावरण में निकली है. मुस्लिम समुदाय कई जगह इसका स्वागत करता है. मेरी बात का योगेशजी अनुमोदन करें, क्या मैं गलत कह रहा हूँ, जो माहौल दस साल पहले हुआ करता था, क्या वैसा ही आज भी है? अगर कहीं परिवर्तन आया है तो इसके लिए पुलिस व प्रशासन की प्रशंसा करनी चाहिए. मजाक तो हम किसी का भी उड़ा सकते है, लोकतंत्र है भाई. वैसे भी लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए खिंचाई करना गलत भी नहीं, :)

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