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Saturday, July 7, 2007

किस्सा सेंधा नमक और काला नमक का

सेंधा नमक पर लिखे गये लेख ने अपने ब्लोगर बंधुओ मे काफ़ी उत्सुकता जगायी थी। जैसा कि हमने लिखा था, वैद्य मुकेश पानेरी ने हम लोगो के लिये सेंधा नमक और काला नमक के गुणधर्म लिख भेजें है। उन्होने काला नमक बनाने की आयुर्वेद की विधि भी लिख भेजी है । हम यह विधि इसलिये लिख रहें हैं क्योकि जामनगर के नमक विशेषज्ञ भारद्वाज जी का कहना है कि काला नमक सेंधा नमक की तरह केवल प्राकृतिक रूप मे ही होता है । हमारा यह लेख था नमक खाओ तो सेंधा नमक खाओ ।

सेंधा नमक

सेंधा नमक को लाहोरी नमक भी कहा जाता है, क्योकि यह पाकिस्तान मे अधिक मात्रा मे मिलता है । यह सफ़ेद और लाल रंग मे पाया जाता है । सफ़ेद रंग वाला नमक उत्तम होता है। यह ह्रदय के लिये उत्तम, दीपन और पाचन मे मददरूप, त्रिदोष शामक, शीतवीर्य अर्थात ठंडी तासीर वाला, पचने मे हल्का है । इससे पाचक रस बढ़्ते हैं। रक्त विकार आदि के रोग जिसमे नमक खाने को मना हो उसमे भी इसका उपयोग किया जा सकता है। यह पित्त नाशक और आंखों के लिये हितकारी है । दस्त, कृमिजन्य रोगो और रह्युमेटिज्म मे काफ़ी उपयोगी होता है ।

सेंधा नमक के विशिष्ठ योग

हिंगाष्ठक चूर्ण, लवण भास्कर और शंखवटी इसके कुछ विशिष्ठ योग हैं ।

काला नमक

यह भी ह्रदय के लिये उत्तम, दीपन और पाचन मे मददरूप, वायु शामक है । पेट फ़ूलने की समस्या मे मददरुप है। इसके सेवन से डकार शुध्ध आती है और छोटे बच्चो की कब्ज की समस्या मे इसका उपयोग होता है ।

काला नमक बनाने की विधि

काला नमक बनाने के लिये सेंधा नमक और साजीखार सम प्रमाण मे ले। साजीखार का उपयोग पापड बनाने में होता है और यह पंसारी की दुकान पर आसानी से मिलता है। इस मिश्रण को पानी मे घोलें । अब इसे धीमी आंच पर गर्म करे और पूरा पानी जला दें । अंत मे जो बचेगा वह काला नमक है ।

Thursday, July 5, 2007

जामनगर के क्रिकेट धुरंधर

भारत की प्रतिष्ठित रणजी ट्राफ़ी और दुलीप ट्राफ़ी जामनगर के राजाओं की याद में हैं। अंतरराष्‍ट्रीय क्रिकेट खेलने वाला पहला भारतीय खिलाडी जामनगर से था। वेस्‍ट इंडीज पर भारत की पहली जीत दर्ज कराने वाली टीम में सलीम दुर्रानी की बडी भूमिका थी। अर्जुन अवार्ड पानेवाला पहला क्रिकेटर सलीम दुर्रानी जामनगर से है। आज भी वह जामनगर में ही रहता है।

ये तो सुर्खियां है गुजरात के इस तटीय शहर जामनगर के भारतीय क्रिकेट में योगदान की। आज जब भारत आफ़ीशियल क्रिकेट का ७५वां वर्ष मना रहा है तब जामनगर के उल्‍लेख के बिना सब अधूरा नहीं, बिल्‍कुल बेकार है।

पिछ्ले सौ से अधिक वर्षों से क्रिकेट को पालने पोसने वाला जामनगर का राजघराना आज भी क्रिकेट का एक महत्‍वपूर्ण स्‍थल है। लोग अजय जाडेजा को जानते हैं। वे जामनगर के हाल के जामसाहब शत्रुशल्‍यसिंहजी का भतीजा है।

इन सौ साल में जामनगर ने एक दर्जन अंतर्राष्‍ट्रीय ख्‍याति वाले खिलाडी दिये हैं तो ५० जितने रणजी ट्राफ़ी प्‍लेयर। जामनगर के एकता डायरी के प्रकाशक दीपक जोबनपुत्र जामनगर के इतिहास को अपनी डायरी में उभारने के लिये प्रख्‍यात है। उनके पास जामनगर की क्रिकेट की रसप्रद घटनाओं का पिटारा है।

वे एक रसप्रद किस्‍सा बतलाते हैं। जिस व्‍यक्‍ति को क्रिकेट की दुनिया वीनू मांकड के नाम से जानती है, उसका असली नाम था मूलवंतराय हिम्‍मतलाल मांकड। जामनगर के जामसाहब के कहने पर उन्‍होंने उनका नाम वीनू मांकड लिखना शुरु कर दिया।

१९७१ में जन्‍मा लेफ़्‍ट आर्म बाऊलर नागर ब्राह्मण था। यह भारत के उन तीन खिलाडियों में से था जो पहले से ग्‍यारहवें खिलाडी तक के सभी स्‍थानों पर खेला। मजेदार बात यह है कि वह राईट आर्म बल्लेबाज था। उसके परिवार के कुछ लोग आज भी जामनगर में रहते है। उनका पुत्र अशोक मांकड भी टेस्ट खिलाडी रह चुका है।

जामनगर ने भारत को छह क्रिकेटर दिए है। यह सभी अपने समय में धुरंधर रहे है। उनके नाम है, प्रिंस रणजीत सिंह और उनका भतीजा प्रिंस दुलीप सिंह, विनु मांकड, सलीम दुरानी, इन्द्रजीतसिंह और अजय जाडेजा। रणजीतसिंह ने १८९६ से १९०२ तक १५ टेस्ट मेच में दो शतक तथा ५ अर्धशतक के साथ ९९५ रन बनाए थे। जबकि उनके भतीजे दुलीप ने १९२९ से १९३१ तक १२ टेस्ट में ३ शतक तथा पांच अर्धशतक के साथ ९९५ रन बनाए थे।

विनु मांकड ने सन १९४६ से १९५९ के दौरान ४४ टेस्ट में पांच शतक और ६ अर्धशतक के साथ २१०९ रन बनाए। सलीम दुरानी १९६० से १९७३ तक टेस्ट खिलाडी रहे। इस दौरान उन्होने २९ टेस्ट में एक शतक और ९ अर्धशतक के साथ १२०२ रन बनाए थे। वे ओलराउंडर थे और उन्होने ७५ विकट लिये थे। इन्द्रजीतसिंह १९६४ से १९६९ तक टेस्ट खिलाडी रहे। इस दौरान उन्होने ४ टेस्ट में कुल ५१ रन बनाए थे। अजय जाडेजा १९५२ से १९९८ तक टेस्ट खिलाडी रहे। इस दौरान उन्होने १३ टेस्ट में ४ अर्धशतक के साथ ५३८ रन बनाए थे।

Monday, July 2, 2007

नमक खाओ तो सेंधा नमक खाओ

नमक का महत्व कौन नही जानता? सभी को मलूम है कि नमक हमारे शरीर के लिये बहुत जरूरी है। इसके बावजूद हम सब घटिया किस्म का नमक खाते है। यह शायद आश्चर्यजनक लगे , पर यह एक हकीकत है ।

जामनगर स्थित एन के भारद्वाज का कहना है कि भारत मे अधिकांश लोग समुद्र से बना नमक खाते है । श्रेष्ठ प्रकार का नमक सेंधा नमक है, जो पहाडी नमक है । इस नमक से हम सब परिचित है । व्रत के समय इसी नमक का उपयोग होता है । भारद्वाज नमक विशेषज्ञ हैं और नमक उत्पादन से ले नमक आधारित उध्योग मे पिछले ३० वर्ष से हैं।

अहमदाबाद के प्रख्यात वैद्य मुकेश पानेरी कहते है कि आयुर्वेद की बहुतसी दवाईयों मे सेंधा नमक का उपयोग होता है।आम तौर से उपयोग मे लाये जाने वाले समुद्री नमक से उच्च रक्तचाप का भय रहता है । इसके विपरीत सेंधा नमक के उपयोग से रक्तचाप पर नियन्त्रण रहता है । इसकी शुध्धता के कारण ही इसका उपयोग व्रत के भोजन मे होता है ।

सेंधा नमक की सबसे बडी समस्या है कि भारत मे यह काफ़ी कम मात्रा मे होता है , और वह भी शुध्ध नही होता है। भारत मे ८० प्रतिशत नमक समुद्री है, १५ प्रतिशत जमीनी और केवल पांच प्रतिशत पहाडी यानि कि सेंधा नमक । भारद्वाज कहते हैं कि सबसे अधिक सेंधा नमक पाकिस्तान की मुल्तान की पहडियों मे है।

यदि बाजार का सर्वेक्ष्ण करे तो मालूम पडेगा कि समुद्री और सेंधा नमक के दाम मे इतना अधिक अंतर है जिसके कारण लोग समुद्री नमक खरीद्ते हैं । हमने अहमदाबाद बाजार मे जांच की तो मालूम पडा कि समुद्री नमक जहां नौ रु किलो है तो सेंधा नमक का दाम रु ४० प्रति किलो है । सेंधा नमक समुद्री नमक से कम नमकीन होता है । साफ़ है कि इसका अधिक उपयोग करना पडता है ।
और इसीलिये लाख उपयोगी होने के बावजूद लोग इसकी जगह समुद्री नमक से ही चला लेते है ।
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