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Friday, June 29, 2007

रथयात्रा का चिठ्ठा, संजय भैय्या के नाम

प्रिय संजय बेंगाणी भैय्या,

आपकी हमारे लेख पर लेख रुपी टिप्पणी "अहमदाबाद की यात्रा का माहौल" पढी। एकदम ज्ञानदत्त पाण्डॆय़ का वह लेख याद आ गया कि नोन कन्ट्रोवर्सियल लेख लिखने के दस नुस्खे। हमारी आंखो के समक्ष कुछ शब्द तैर गये जिन्हे लिखने से पाण्डॆय़जी ने सभी को ना कहा है।

मित्रवर हमारे लेख में हमने लिखा है कि यात्रा शांतिपूर्वक होती है। पर, आप कह रहे है कि हम इस बात का अनुमोदन करें। मित्र हम शुध्ध वैदिक संस्कृति वाले ब्राह्मण है। नदी, पेड, पानी सभी से सीखने के लिये तत्पर।

लगता है कि हम हमारे विचार सही ढंग से प्रस्तुत नही कर पाये। आप ठहरे इस नारद के कर्णधार। मैं आपको गलत समझने की धृष्टता कैसे कर सकता हूं। वैसे भी अपना मानना है कि यदि कोई कुछ कहे तो उसे पोजीटिव लो। पहले खुद को खोजो। हमने यही किया । हे नारद के कर्णधार तू ही तो महाभारत में संजय दृष्टि बन धृतराष्ट्र की दृष्टि बना था। अब तू मेरी दृष्टि बन। इस चिठ्ठासंसार का दर्शन करा हे संजय।

हे संजय मैने और मेरे पुत्र मधुर ने ज़िंदा बम का समाचार देखा उसी का ब्यौरा लिखा है। २००७ के मोदी के गुजरात के संजय तुम हमें वो जगह बताओ ज़हां कोई पुलिसवाला बिना सुरक्षा कवच के ज़िन्दा बम पकड सकता हो। हे संजय भगवान ने तुम्हे वह दृष्टि दी है जो मेरे जैसे आम आदमी के पास नहीं है।

हे संजय आज सारा अहमदाबाद इस किस्से की चर्चा कर रहा है, तब आप भी सुन ही रहे होगे। महाभारत वाले संजय तुम तो दृष्य श्राव्य (audio-visual) कामेंटरी दे रहे थे। साफ है कि सुन भी रहे होगे।

हे महान आत्मा तुम तो हमेशा ही दिव्य पुरुषों के सानिध्य में ही रह्ते हो। दिव्य शक्तियां है तुम्हारे पास। तुम व्यापार काज से अगर मुम्बई हो तो भी दिव्यकृपा से तुम अहमदाबाद की इस चर्चा को देख सुन रहे होंगे।

हे धृतराष्ट्र (अरविंद कुमार ने उनके समांतर कोश के खंड १ में संजय के जो पर्याय दिये है उसमें धृतराष्ट्र भी है, 777.93 की प्रविष्टि है) तुझे तो गांधारी मिली थी। इस जन्म में तुम ऎसा शिष्य वर्ग पाने की चाह में हो जो गांधारी बन दुनिया में आंख मींच बैठ जाए। मत भूलो धृतराष्ट्र तुम संजय भी हो। तुम्हे वही बोलना है जो देख रहे हो। जो दिखलाई दे रहा है। रथयात्रा १६ जुलाई को है। पर लोगों के दिलों में दहशत अभी से है। हम मानते है कि कुछ नहीं होगा। पुलिस प्रशासन सब ठीक होने देगा। पर क्या करें? मानव मन तो उसके भयों, आकांक्षाओ और आशाओं और अपेक्षाओं से ही उसकी जिन्दगी का ताना बाना बुनता है।

हे संजय तुम तो दिव्य ज्ञान वाले हो। हमने जो लिखा है वह मजाक या खींचाई कैसे हो गये? जबसे आपका लेख पढा हमारी लाइब्रेरी के सारे शब्द कोश- पर्यायवाची कोश ढूंढ मारे। संजय का पर्याय धृतराष्ट्र मिल गया पर इन दो शब्दों की हमारे लेख पर फिट बैठने वाली परिभाषा नहीं मिली। अपनी दिव्यदृष्टि से वह पुस्तक ढूंढो संजय। पता बता दो, मैं पहुंच जाउंगा।

हे संजय नारद रूप में विचरन करते हुए कुछ दिन पहले आप हमारे एक चिट्ठे "मोदी जी के वायदो का व्यापार" पर पहुंच कर नारायण नारायण की जगह एक अलग टिप्पणी कर आये थे। "शून्य भी तो मोदीजी के सहारे आगे बढना चाह्ता है"। हे दिव्यगणों के साथ विचरण करने वाली श्रेष्ठ आत्मा मुझे बतलाओं क्योंकि मेरे बारे में मैं यह सत्य नहीं जानता। इस विप्र के ज्ञान की पिपासा का शमन करो। हे ज्ञानियों के ज्ञानी नारद के कर्णधार। मैं इस राज के बोझ से जी नहीं पा रहा हूं। हे मुनिवर बताओ जीरो कालम लिखने का मोदीजी मुझे क्या देते हैं? या कांग्रेस क्या देती है? इस व्याकुल मन की प्यास बुझाओ संजय।

प्रभु मोदीजी अपने गुजरात के मुख्यमंत्री हैं। हम उनका आदर करते है भगवन। पर प्रभु, आपको मालूम है कि सेना की जीत का तमगा अगर सेनापति की छाती पर कमीज पर लगता है तो हार की कालिख मुंह पर लिपती है। तमगे की तरह वर्दी पर नहीं, शुध्ध चमडी वाले मुंह पर।

इसलिये हे प्रभु कृष्ण की बात भी सुनो। संजय हो। सजाल की महाभारत के हर शब्द को सुनो। हे अर्जुन यह सब लीला है इसलिये विचलित मत हो। सब अपना रोल कर हैं। सुना कृष्ण उवाच। संजय का पर्याय धृतराष्ट्र जानने के लिये समांतर कोष देखना पडा। पर योगेश ही साक्षात कृष्ण है उसी यादवास्थली में जहां संजय तो कामेंटरी दे रहा है योगेश युध्ध को दिशा दे रहा है।

गीता में यह अध्याय नहीं है प्रियवर ! खैर इस सजाल की यादवास्थली पर हम हमारा लेख और संजय भैया की लेख रूपी टिप्पणी रख रहे हैं आप सभी के अवलोकन और मन्थन के लिये । तथास्तु ।

हमारा चिठ्ठा :
सावधान अहमदाबाद में आतंक यात्रा आ रही है

हालांकि पिछले कई वर्षों से रथ यात्रा के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना नही हुई है, जगन्नाथजी की यात्रा अहमदाबाद मे अभी तक दंगा यात्रा का उसका लेबल नही हटा पाई है । रथयात्रा के कुछ दिन पहले ही बम और पिस्तौल मिलने के समाचार आने शुरू हो जाते हैं । पिछले कुछ वर्षों से पुलिस का दावा है कि उसकी सतर्कता के कारण हिंसा फ़ैलाने वाले तत्व सफ़ल नही हो पाते।
कल ही पुलिस ने एक मुसलमान युवक को लालदरवाजा मेन बस टर्मिनस पर से पकडा। पुलिस का कहना है कि उसे जानकारी मिली थी कि वह युवक वहां बम बेचने आया था । बंगाल से अहमदाबाद देसी बम बेचने आया था ! मजे की बात यह है की लालदरवाजा पर ज्यादातर लोग जीरो नंबर के प्लेट्फ़ोर्म पर ही पकडे जाते है। अरे भैये अगर देसी पिस्तोल का कट्ता बेचते हुए कोई पकडा जाये तो हम समझ सकते है कि वह उत्तर प्रदेश से आया होगा । गुजरात मे लोग यूं ही करोडों का गोटाला कर पैसे बना लेते है, बिना किसी कट्टे के । इसलिये जब जरूरत होती है तब उत्तर प्रदेश से मंगवा लेते हैं ।
हमने कल पुलिस वालो को बम पकड्ते देखा । पुलिस की हिम्मत को दाद देनी पडे । जिंदा बम खुले हाथ पकड कर ले गये अपने पुलिस वाले । बस सिर पर एक हेल्मेट पहन रखी थी। इसे कहते है जाबांज पुलिस । स्काट्लेंड और अमरीका की एफबीआई को गुजरात पुलिस से यह गुर सीखना चाहिये । हमे हमारे बचपन के वो दिन याद आ गये जब हम मदारी का जहरीले सांप का खेल देखते थे । आजकल के बच्चो के ऎसे भाग्य कहां । मेनका गांधी ने सपेरो, बन्दर- भालू वालों के धंधे की वाट लगवा दी है ।
खैर हमारे साथ टी वी पर यह द्रश्य देख रहे हमारे पुत्र ने हमारे साथ बहस शुरू कर दी । डिस्कवरी चैनल का रसिया हमारा मधुर अड गया कि बिना किसी सुरक्षा के पुलिस बम इस तरह से कैसे ले जाती । हमने उसे कह दिया कि कालेज मे पढने का यह मतलब नही कि उसे सब कुछ आता है। हमारे अहमदाबाद की पुलिस तो रोकेट लोंचर तक पकड लेती है ये तो सादा बम है । उसने पूछा कि बंगाल से बम बेचने आया, वहां कुछ खास बात है क्या ? जैसेकि रामपुरी चाकू । हमने कहा कि आतंकवादी ऎसे रास्ते अपनाते है जो अच्छे अच्छे करमचंद और डिटेक्टिव ऒकारनाथ (डॉन) भी नही समझ पाते हैं ।
खैर अपने मित्रो ने भविष्यवाणी कर दी है की अभी कुछ और पकडे जायेंगे क्योकि हर साल यह होता है। यात्रा के शांतिपूर्वक निकल जाने पर पुलिस के अफ़सरान पुलिसवालो को यात्रा को शांतिपूर्वक निकलवाने के लिये धन्यवाद देते हैं । अपने भाजपाई मित्र मोदी जी का हिन्दुऒ की यात्रा की सफ़लता के लिये आभार मानेंगे । हर साल यही हो रहा है ।


संजय भैय्या उवाच:

अहमदाबाद की यात्रा का माहौल

यात्रा का समय नजदीक आ रहा है. अहमदाबाद में वर्षो से पूरी की तर्ज पर यात्रा निकलती रही है. योगेशजी ने इस पर लिखा है. मैं वहाँ टिप्पणी नहीं कर पाया, ब्लॉगर.कोम की कोई तकलीफ थी.
खैर, यात्रा का समय नजदीक है, पुलिस की चौकसी व तैयारियाँ चल रही है. यात्रा जो की बहुत ही लम्म्म्बी होती है और सँकरी गलियों से गुजरती है, यहाँ तक की कई मुस्लिम बहुल इलाको से भी गुजरती है. अब जबकि समानांतर चौड़ी सड़के बन गई है तो यात्रा को इन्ही सड़को से निकलाने का सुझाव दिया जाता रहा है, मगर इसे आयोजको ने मंजूर नहीं किया है.
इधर दोनो समुदायों के सरफिरे तत्वो को मौके की तलाश रहती है, जो प्रशासन के लिए सर दर्द है. यात्रा के पुरे मार्ग में धार्मिक नहीं वरन देशभक्ति के गीत बजते रहते है.
यात्रा के समय जहाँ पहले दहशत का सा माहौल रहता है, अब वैसा नहीं है. पिछली कई यात्राएं बहुत अच्छे वातावरण में निकली है. मुस्लिम समुदाय कई जगह इसका स्वागत करता है. मेरी बात का योगेशजी अनुमोदन करें, क्या मैं गलत कह रहा हूँ, जो माहौल दस साल पहले हुआ करता था, क्या वैसा ही आज भी है? अगर कहीं परिवर्तन आया है तो इसके लिए पुलिस व प्रशासन की प्रशंसा करनी चाहिए. मजाक तो हम किसी का भी उड़ा सकते है, लोकतंत्र है भाई. वैसे भी लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए खिंचाई करना गलत भी नहीं, :)

Thursday, June 28, 2007

अहमदाबाद अब सांड फ़्री होगा

अपने अहमदाबाद से अपन को बहुत प्यार है । बडा अच्छा शहर है। नेता लोग कहते हैं कि अब यह मेट्रो है। शहर मे हमेशा कुछ न कुछ काम होता ही रहता है । यह देख कई बार जैन देरासर का ख्याल आता है । अहमदाबाद मे जैन बहुत हैं । देरासर भी बहुत हैं । हमेशा कुछ न कुछ काम होता ही रहता है । इधर भी ऎसे ही काम चलता रहता है।

हमारा नगर निगम कुछ न कुछ नया करता ही रहता है । पहले रात को अहमदाबाद को साफ़ करते थे। आजकल ये बन्दे रात को दिखलाई नही देते । शायद जल्दी सवेरे यह काम करते होंगे । बीच बीच मे आवारा पशुऒ को पकडने के अभियान भी चलते है । कभी कभी तो स्पेशल कुत्ता पकडो ड्राइव भी चलती है । अभियानो की एक विशेषता होती है । शुरू तो धूम धडाके होते है और चुपचाप बंद हो जाते है।

बहुत हो गया अहमदाबाद गान । अब मुद्दे की बात पर आते हैं । अपना अहमदाबाद कितना मेट्रो हुअ है यह तो नही मालूम पर यह हकीकत है कि शहर चौडा हो गया है । बहुत से नये गांव इसमे जुड गये हैं । गांव के आदमी जुड गये है। उनके साथ उनकी गाय भैस भी जुड गयी है । वैसे ही गाय भैस समस्या एक चुनौती थी, अब और गाय भैस शामिल होने से यह चुनौती महाकाय हो गई । हर समस्या का हल होता है। भले वह सफ़ल हो या न हो !

काफ़ी कुछ अधिकारी पर भी आधार रखता है ।अपने नये अहमदाबाद के डिप्टी म्यु कमिश्नर ब्रह्म्भट्ट काफ़ी उत्साही है। उनका कहना है कि उन्होने ७० सांड और २५० गाय भैस पकड लिये है। खुद ही पकडे होंगे, क्योकि उन्होने शाम को प्रेस नोट जारी कर घोषणा की कि वे वैभवी पश्चिमी क्षेत्र के सभी " सांड पकड इस क्षेत्र को सांड मुक्त कर देंगे " ।अब सांड पर ही फ़ोकस क्यो ? गाय- भैस पर क्यों नही ? ये तो अपने ब्रह्म्भट्टजी जाने । विश्वास है की वो लाल कपडे पहन कर नही खडे होंगे !

सावधान अहमदाबाद में आतंक यात्रा आ रही है

हालांकि पिछले कई वर्षों से रथ यात्रा के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना नही हुई है, जगन्नाथजी की यात्रा अहमदाबाद मे अभी तक दंगा यात्रा का उसका लेबल नही हटा पाई है । रथयात्रा के कुछ दिन पहले ही बम और पिस्तौल मिलने के समाचार आने शुरू हो जाते हैं । पिछले कुछ वर्षों से पुलिस का दावा है कि उसकी सतर्कता के कारण हिंसा फ़ैलाने वाले तत्व सफ़ल नही हो पाते।
कल ही पुलिस ने एक मुसलमान युवक को लालदरवाजा मेन बस टर्मिनस पर से पकडा। पुलिस का कहना है कि उसे जानकारी मिली थी कि वह युवक वहां बम बेचने आया था । बंगाल से अहमदाबाद देसी बम बेचने आया था ! मजे की बात यह है की लालदरवाजा पर ज्यादातर लोग जीरो नंबर के प्लेट्फ़ोर्म पर ही पकडे जाते है। अरे भैये अगर देसी पिस्तोल का कट्ता बेचते हुए कोई पकडा जाये तो हम समझ सकते है कि वह उत्तर प्रदेश से आया होगा । गुजरात मे लोग यूं ही करोडों का गोटाला कर पैसे बना लेते है, बिना किसी कट्टे के । इसलिये जब जरूरत होती है तब उत्तर प्रदेश से मंगवा लेते हैं ।
हमने कल पुलिस वालो को बम पकड्ते देखा । पुलिस की हिम्मत को दाद देनी पडे । जिंदा बम खुले हाथ पकड कर ले गये अपने पुलिस वाले । बस सिर पर एक हेल्मेट पहन रखी थी। इसे कहते है जाबांज पुलिस । स्काट्लेंड और अमरीका की एफबीआई को गुजरात पुलिस से यह गुर सीखना चाहिये । हमे हमारे बचपन के वो दिन याद आ गये जब हम मदारी का जहरीले सांप का खेल देखते थे । आजकल के बच्चो के ऎसे भाग्य कहां । मेनका गांधी ने सपेरो, बन्दर- भालू वालों के धंधे की वाट लगवा दी है ।
खैर हमारे साथ टी वी पर यह द्रश्य देख रहे हमारे पुत्र ने हमारे साथ बहस शुरू कर दी । डिस्कवरी चैनल का रसिया हमारा मधुर अड गया कि बिना किसी सुरक्षा के पुलिस बम इस तरह से कैसे ले जाती । हमने उसे कह दिया कि कालेज मे पढने का यह मतलब नही कि उसे सब कुछ आता है। हमारे अहमदाबाद की पुलिस तो रोकेट लोंचर तक पकड लेती है ये तो सादा बम है । उसने पूछा कि बंगाल से बम बेचने आया, वहां कुछ खास बात है क्या ? जैसेकि रामपुरी चाकू । हमने कहा कि आतंकवादी ऎसे रास्ते अपनाते है जो अच्छे अच्छे करमचंद और डिटेक्टिव ऒकारनाथ (डॉन) भी नही समझ पाते हैं ।
खैर अपने मित्रो ने भविष्यवाणी कर दी है की अभी कुछ और पकडे जायेंगे क्योकि हर साल यह होता है। यात्रा के शांतिपूर्वक निकल जाने पर पुलिस के अफ़सरान पुलिसवालो को यात्रा को शांतिपूर्वक निकलवाने के लिये धन्यवाद देते हैं । अपने भाजपाई मित्र मोदी जी का हिन्दुऒ की यात्रा की सफ़लता के लिये आभार मानेंगे । हर साल यही हो रहा है ।

Wednesday, June 27, 2007

गुजरात विद्यापीठ को एक अदद गांधी की तलाश

पिछले कई महिनो से गांधी द्वारा स्थापित गुजरात विद्यापीठ को तलाश है एक गांधीवादी की जो इसका कुलपति बन सके । यह सुन आपको आश्चर्य होगा पर यह एक हकीकत है। रविन्द्र वर्मा के निधन के बाद से यह पद रिक्त है। वर्मा जी की खोज मे भी अच्छा खासा समय लग गया था और उनका कार्यकाल उनकी बीमारी का भोग बन गया था।
इस बार की खोज मे विद्यापीठ ने एक गांधीवादी ढूंढ भी लिया था । इस गांधीवादी की सबसे बडी विशेषता यह थी कि वह केवल गांधीवादी ही नही था, पर असली गांधी वंश का भी था। वह था गोपाल कृष्ण गांधी , असली गांधी का पौत्र और फ़िलहाल बंगाल का राज्यपाल । हम असली गांधी की स्पष्टता इसलिये कर रहे हैं क्योकि आजकल कमजोर सामान्य ज्ञान के दौर मे बहुत से लोगो के लिये गांधी परिवार मतलब इंदिरा-सोनिया परिवार !
उनके नाम की घोषणा भी हो गयी, गुजरात के अखबारों मे उनके फ़ोटो के साथ उनका जीवन परीचय भी छप गया । इतने मे ही समाचार आया कि वो यह पद स्वीकार नही कर सकते । कारण मे काम का बोझ या फ़िर कोल्कोत्ता और अहमदाबाद के बीच का अन्तर नही था। हुआ यह कि पद स्वीकार करने के बाद उन्होने गुजरात विद्यापीठ के नियम पढे।
हमेशा खादी पहरने के साथ साथ हर रोज चरखा कातने का नियम भी था । कहा जाता है कि ये नियम पढ उन्हे अहसास हुआ कि वो जिन्दगी मे कभी इतने चुस्त गांधीवादी तो थे ही नही । उन्होने साफ़ कह दिया कि भई मै इस पद को ग्रहण नही कर सकता क्योकि मै कभी चुस्त गांधी रहा ही नही हूं। हालांकि गुजरात विद्यापीठ की आला कमान ने तो कोल्कोत्ता जा उन्हे मनाने का भी सोचा, पर पत्र दोबारा पढ उन्हे लगा कि भले ही वो गांधीवादी नही है पर गांधी जैसे सत्य के आग्रही है और वो इस पद को नही स्वीकारेंगे ।
खैर गुजरात विद्यापीठ ने एक बार फ़िर से गांधीवादी की तलाश शुरु कर दी है । १९२० मे जब मकोले की शिक्षा पद्धति के जवाब मे गांधी ने उनकी शिक्षा पद्धति वाली गुजरात विद्यापीठ की स्थापना की थी तब उन्होने ऎसी स्थिति के बारे मे शायद ही सोचा हो। गुजरात विद्यापीठ की स्थापना का हेतु एक ऎसी शिक्षा प्रणाली लाना था जो तीन R के जवाब मे तीन H यानी कि हेड, हार्ट और हेंड के विकास पर केंद्रित हो ।

और अगर हम मुन्नाभाई प्रभाव को देखें तो अभी एक पीढी की खेप के बाद ही थोडा पका हुआ गांधीवादी मिल सकेगा। क्या इसका कोई हल है या नही, या फ़िर गुजरात विद्यापीठ हेड्लैस रहेगी ?
भैये मुद्दा गांधीवादी का नही है। गुजरात विद्यापीठ मे आधा दर्जन सही लोग है । बस समस्या एक ही है, वो एक दूसरे की टांग खिचाई मे इस कदर लगे हुए हैं कि सब नाम रद्द कर दुनिया मे खोज मे लगे रहते हैं।
बहुत कम को यह मालूम है कि यह अप्ने प्रकार की एक ही विध्यापीठ है और गांधीजी के बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल, राजेन्द्र प्रसाद और मोरारजी देसाई इसके कुल्पति रह चुके हैं ।

Tuesday, June 26, 2007

एक सनसनीखेज हत्याकांड का विवादास्पद फ़ैंसला

आज अहमदाबाद में हरेन पंडया की चर्चा जोर शोर से है। भाजपा नेता हरेन पंडया की हत्या ने २००३ मे जितनी सनसनी पैदा की थी , उसके फ़ैसले ने उतना ही बडा विवाद खडा किया है। कोइ भी खुश नही। न तो हरेन के परिवार वाले और न ही जिन्हे सजा हुई है।
इस किस्से मे नौ को आजीवन कैद हुई है, दो को ५ साल की सजा और एक को सात साल। हरेन को सुबह उसकी कार मे गोली मार दी गई थी। हरेन और मुख्य मन्त्री नरेन्द्र मोदी की राज्नीतिक दुश्मनी पराकाष्ठा पर थी। मोदी की जिद्द के कारण भूतपूर्व गृह मन्त्री हरेन को टिकट नही मिली थी।
हरेन पंडया की पत्नी और पिता का कहना है कि सी बी आई ने बराबर जांच नही की है इसलिये फ़ैंसला सही नही है। उधर जिन बारह को सजा हुई है उनका कहना है कि उन्हे सजा इसलिये मिली है क्योकि वे मुसलमान हैं ।
हरेन के पिता का तो कहना है कि यह राजनीतिक आतंकवाद का किस्सा है और इसके सूत्रधार मुख्य मन्त्री नरेन्द्र मोदी हैं और उन्हे सजा होनी चाहिये । उधर हरेन की पत्नी मुख्य मन्त्री नरेन्द्र मोदी से मिल दोबारा जांच की मांग कर रही है।
यह प्रतिक्रिया स्वाभाविक है ।पिछले तीन वर्षॊं मे हरेन नाम संज्ञा से क्रिया विशेषण बन गया है । किसी का हरेन पंडया कर देना मतलब उसका खातमा कर देना । किसी जमाने मे हरेन की तरह मोदी जी की विश्वस्त और आज उनकी जानी दुश्मन भाजपा विधायक रमीला देसाई कहती हैं कि उन्हें मोदी खेमे से धमकी मिलती है कि उनका हरेन पंडया कर दिया जायेगा ।
मोदीजी के विरोधियों के लिये यह महत्वपूर्ण है क्योकि यह उन्हे मोदीजी के विरुद्ध बोलने के लिये मसाला देता है। और मोदी भक्तो के लिये यह उनके गुणगान का मसाला है कि देखा हमारे गुरु क्या कर सकते हैं । सच तो राम जाने, हम तो वो कहते है जो गुजरात आज कह रहा है ।

Monday, June 25, 2007

गुजरात की बसों में सूचना क्रांति

गुजरात की सरकारी बसें अब आई टी क्रांति के दौर मे हैं ।पिछले साल इन बसों में मोबाइल फ़ोन की सुविधा दी गई थी। कुछेक बसों मे यह अभी भी दिखलाई देती है।

अब यह बस सेवा एक नई सुविधा लाई है । SMS करो और बस का टाईम टेबल जान जाओ । एक साथ उस रूट की पांच बसों की जानकारी । लेट भलें हों, जल्दी तो नहीं आयेंगी । आप आराम से मूंगफ़ली खाते हुए बस की राह देख सकते हैं । इस निर्मल गुजरात वाले वर्ष मे सभी बस स्टेंड अच्छे बनाये जा रहे हैं ।

यह सब जानकारी देने के लिये ST के अध्यक्ष अलोरिया जी ने पत्रकारों को बुलाया। लेपटोप से सज्ज उनका स्टाफ़ उनकी सेवा मे हाजिर । लेपटोप के काफ़ी कान मरोडे। उसकी पूंछ मरोड उसे सीधे रास्ते पर लाने की कोशिश भी की । पर अडियल टट्टू की तरह वह तो टस से मस न हुआ। किसी ने फ़िकरा कसा, सरकारी बस की तरह सडक पर ब्रेकडाउन !

तुरंत उनके साथ के बाबू का जवाब आया- मौसम मे उमस ज्यादा है इसलिये ये लेपटोप काम नही कर रहा । अरे भैये जब साहब के एअर कंडीशन्ड कमरे मे ये हाल है तो बाहर क्या होगा । खैर अलोरिया साहब ने खुद ही जबान और हाथ हिला ओडियो विज्युअल प्रेसेन्टेशन दे काम चला लिया ।

अपने अलोरिया साहब ने समझाया कि स्टाफ़ फ़ोन पर सही जवाब नही देता था इसलिये यह एसएमएस व्यवस्था लाये हैं । अब यात्री और टाइम टेबल के बीच कोई स्टाफ़ नही । भैये ये तो हम बाबु के जवाब से ही समझ गये थे ।
पर कम्प्यूटर को कम्प्यूटर तो नही चलायेगा !!! उपर से एसएमएस के पैसे तो ग्राहक की जेब से ।

सुनीता विलियम्स का यान मोदी विरोधी खेमे मे

सुनीता दीदी वापिस आ गई। समाचार है कि उनका यान केलिफ़ोर्निया में उतरा है। सच ही होगा। पर हमारा मानना है कि उनके यान का कोई रुहानी रुप गुजरात के राजनीतिक गगन में पिछ्ले कई महिनो से विहार करते करते अब गुजरात में मोदी विरोधी खेमे में उतरा है।


वे गुजरात की है कयोकि उनके पिताजी गुजरात के है। भले ही वे अब तक केवल दो बार ही गुजरात आई है, पूरा गुजरात उन पर इस तरह फ़िदा हो रहा है जैसे कि वो अट्लांटिस का दरवाजा गुजरात में खोल कर ही चढी थी । आखिरकार हमारे मोदीजी ने हर गुजराती को हर उस चीज पर खुशी मनाना सिखलाया है जो किसी भी तरह गुजरात से जोडी जा सकती है।
अपने मोदीजी आज के मार्केटिंग गुरु है। वे दुनिया के बाजार में ब्रान्ड गुजरात काफ़ी अच्छी तरह से बेच रहे है। इसमे कुछ बुरा भी नही है। और आज सहकारी बैन्को से ले चेम्बर ओफ़ कोमर्स तक सभी इस मोदी ज्वार में आन्दोलित है। पूरा गुजरात vibrant गुजरात हो गया है । पर सुनीता विलियम्स एक ऎसा नाम है जिसके गुजराती कनेक्शन के बावजूद मोदीजी चुप है।

उनकी इस चुप्पी के कारण गुजरात के राजनैतिक गगन में वक्त वक्त पर कान्ग्रेसी आंधी के बादल आते रहते है। कान्ग्रेस के लिये सुनीता शब्द मोदीजी को खामोश करने का ब्रह्मास्त्र बन गया था बजट सत्र में । मोदीजी जैसी दाढी वाले कान्ग्रेस के अर्जुन मोढ्वाढिया जी ने बजट सत्र में तीन बार सुनीता विलियम्स के सम्मान का मुद्दा उठाया, पर खुद ही बोल बोल कर चुप हो गये क्योकि मोदीजी ने मौन धारण कर रखा ।

आज गुजरात के अखबार में सुनीता के समाचार है । पहले भी कई बार आ चुके है । मोदीजी को तो छोडो उनके स्वास्थ्य मन्त्री सनसनी सम्राट अशोक भट्ट भी चुप है। वो सुर्खियो में आने के किसी भी मौके को नही छोडते है। वो दुनिया की सबसे सात्विक चीज में भी कुछ ना कुछ भयानक ढुंढ लेते है। एक बार विधानसभा में बोले कि गुजरात मे मच्छर इसलिये ज्यादा है क्योंकि पाकिस्तान सरहदी जिले बनासकांठा में पानी छोड रहा है। यह उनका जवाब था जब किसी ने मलेरिया के बारे मे प्रश्न किया !

कुछ दिन पहले विश्व गुजराती समाज ने एक प्रस्ताव पास कर सुनीता के लिये शुभकामनाए की और घोषणा की कि जब वे गुजरात आएगी तब उनका सम्मान किया जायेगा। इसी सप्ताह कान्ग्रेस ने प्रस्ताव पास कर सुनीता को शुभकामनाए दी। सुनीता के वापिस आने पर कान्ग्रेस ने उन्हे अभिनन्दन दिये ।कान्ग्रेसी नेताओं ने उन्हें थोक मे अभिनन्दन दिये । प्रदेशाध्यक्ष भरत सोलंकी से ले सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल सभी ने दिल खोल अभिनन्दन दिये ।

इधर विद्रोही आत्मा सूरत के भाजपा विधायक धीरुभाई गजेरा ने इस मुद्दे पर मोदीजी की शाब्दिक धुलाई कर डाली। गजेरा भैया गरजते हुए कान्ग्रेसी भाषा में बोले कि राज्य में कन्या शिक्षा का ढोल पीट्ने वाले और भ्रूण हत्या के विरुध्ध अभियान चलाने वाले मुख्य मन्त्री नरेन्द्र मोदी सुनीता के बारे में इस लिये मौन है क्योंकि वह उनके जानी दुश्मन स्व हरेन पंड्य़ा की ममेरी बहन है।

उल्लेखनीय है कि हरेन पंड्य़ा की हत्या गुजरात की राजनीति में एक ऎसी गुत्थी है जो आज भी भाजपा में राजनीतिक भूचाल खडा कर देती है। हरेन के पिता से ले कान्ग्रेस के नेता और बागी भाजपाई सभी मोदी धुलाई में हरेन हत्या की लाठी का दिल खोल उपयोग करते है।

साफ़ है कि इस चुनावी वर्ष मे कान्ग्रेसियों और बागियों के लिये सुनीता एक रोकेट लौन्चर बन मोदी विरोधी खेमे से निकलेगी ।

(मित्रों हम इस चिठ्ठे को साईबर स्पेस के गूगल चक्र मे बैठा घर आये ही थे कि आफ़िस से सह सम्पादक नेहा जी का फ़ोन आया कि टेलीफ़ोन के तारों से मोदीजी का सुनीता जी को हार्दिक अभीनन्दन का फ़ेक्स आफ़िस मे लेन्ड हो गया है । देखी मोदीजी की आपदा प्रबन्धन व्यवस्था । अब देखना है कि जोर कितना बाजुए कान्ग्रेस और बागियों मे है !!!!)

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