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Sunday, June 21, 2015

महिला डॉक्टर -पहले महिला बाद में डॉक्टर

शीर्षक पढ़ आप कहेंगे कि यह तो सभी को मालूम है। आप क्या तोप मार रहे हैं यह कह कर। सही बात है। पर, हमारा मुद्दा है कि महिला डॉक्टरों का महिला केन्द्रित कार्यक्रम।
शहर में रविवार, योग दिवस, को महिला डॉक्टरों ने एक कार्यक्रम आयोजित किया। यह महिला डॉक्टरों के लिए था । अन्य महिलाएं भी आमंत्रित थीं, अहमदाबाद मेडिकल ऐसिसयेशन की महिला शाखा के इस कार्यक्रम में।
महिला महिला ही है। व्यावसायिक जिम्मेदारियों के साथ परिवार की देख रेख का भार भी उठाती हैं। भले ही खुद डॉक्टर हो, किसी भी सामान्य महिला की तरह खुद के स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह।
भले ही खुद कितना भी कमाती हो, कमाई और कर आयोजन के लिए पिता या पति या भाई पर आधार रखती हैं या महिला डॉक्टर।
ये सब ऐसे मुद्दे हैं जिन्होंने इस शाखा की अध्यक्षा डॉ. मोना देसाई को इस कार्यक्रम को आयोजित करने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना है कि इसमें ऐसे विषय चुने ,जो हर महिला डाक्टर को किसी रूप से छूते हैं।
मोटापन, कास्मेटिक सर्जरी किस महिला को स्पर्श नहीं करती। भले वे स्वयं डाक्टर हों, जरूरी नहीं कि वे इन वषयों को गहराई से जानती हों । इसलिए, ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैन्सर के साथ साथ इन दो विषयों पर भी विषय एक्सपर्ट इन महिला डाक्टरों के लिए थे
आज टैक्नोलॉजी के जमाने में जहां नए नए गैजेट किसी के लिए भी चैलैन्ज हैं वहीं साईबर क्राइम किसी को भी लपेट में लेते ऐसा नया अपराध उभर रहा हो। तो हमारी मोनाजी ने महिला डॉक्टरों के लिए इसे भी चुन लिया ।
अद्यतन टैक्नोलॉजी और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान से लैस होने के बावजूद महिला डॉक्टर है तो हिन्दुस्तानी ही और वह हिन्दुस्तानी ही बनी रहे तो मोनाजी के इस एक दिवसीय सेमीनार में आधुनीकरण विदाऊट वेस्टर्नाइजेशन पर भी एक लेक्चर था
उनका कहन है कि रूढ़ीवादी महिला अब प्रगतिवादी हो गई है। इस सफर में महिला ने कुछ पाया है तो कुछ खोया भी है। इसकी बैलैंस शीट पर भी चर्चा रखी गई थी
वास्तव में जिस तरह से विषय चुने गए और वक्ता का चयन हुआ वह पूरे कार्यक्रम की सर्जनात्मक शक्ति को अभिव्यक्त करता है। स्वाभाविक है इसकी मौलिकता ने 600 से अधिक डेलीगेट्स को आकर्षित किया और रजिस्ट्रेशन बंद करना पड़ा।

महिला किसी भी क्षेत्र में कितनी भी आगे पहुंच गई हो, आखिरकार वो महिला ही रहती है। उसकी समस्याएं उसकी ही रहती हैं।
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