Followers

Showing posts with label Gujarat Chief Minister Narendra Modi. Show all posts
Showing posts with label Gujarat Chief Minister Narendra Modi. Show all posts

Friday, February 28, 2014

एनआरजी आडवाणीजी का “गांधीनगर” प्रेम बरकरार

अपने आडवाणीजी आज गांधीनगर में थे। हालांकि वे गांधीनगर के सांसद हैं, चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार अहमदाबाद में उनका घर भी है, वे अपने मतक्षेत्र में रात शायद ही गुजारते हैं।सही मायने में वे अप्रवासी गुजराती हैं(एनाआरजी)।
शायद इसीलिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष फलदू जी ने इस सप्ताह कहा था कि मोरारजी के बाद मोदीजी प्रधानमंत्री बनने की राह पर चलने वाले दूसरे गुजराती हैं। जब एक पत्रकार ने आडवाणीजी के 2009 के चुनाव में पीएम प्रत्याशी होने का जिक्र किया तब फलदूजी बोले कि उस समय आज जैसी परिस्थिती नहीं थी। उसी सांस में उन्होने पत्रकारों को कहा कि बात का बतंगड़ मत बना देना। पर अगले दिन कुछ यारों ने ये आइटम ठोक ही दिया।
प्रधानमंत्री इन वेटिंग जैसे टाइटल से मशहूर अपने आडवाणीजी का शायद यह मानना है कि वे तो पूरे देश के हैं और गुजरात और गांधीनगर देश का एक भाग है इसलिए देश सेवा में ही गुजरात और गांधीनगर सेवा नीहित है।
उनके शिष्य नरेन्द्र मोदी की सोच से 180डिग्री उल्टा सोचते हैं आडवाणीजी शायद। अपने मोदीजी तो मानते हैं कि गुजरात देश है और भारत एक अन्य या फिर गुजरात का एक हिस्सा है भारत ।इसलिए उनके आंकड़े कुछ इस प्रकार होते हैं। गुजरात का वृद्धि दर इतना है और भारत का इतना। मोदीजी अब दिल्ली कूच पर हैं।
खैर, बात यहां गुरू आडवाणीजी की हो रही है। आज जब भाजपा की पहली सूची में आडवाणीजी और उनके साथी मुरली मनोहर जोशी के नाम नदारद हैं तब अपने बिजली पत्रकारों (इलेक्ट्रोनिक मीडिया) ने उन्हें घेर लिया और पूछा कि आप कहां से चुनाव लड़ेंगे?
पहले तो उन्होने स्वीकारा कि पहली सूची में उनका नाम नही है। फिर उनकी लक्षणात्मक शैली में हाथ मलते हुए बोले गांधीनगर से चुनाव लड़ना चाहता हू, आगे पार्टी की इच्छा। अब भाजपा में तो पार्टी की इच्छा मतलब अपने मोदीजी की इच्छा।फिर बोले काश कच्छ की बैठक आरक्षित नही होती। नहीं तो वहीं से लड़ लेता।
कच्छ में सिंधी हैं पर कच्छ सिंधियों का नहीं है। गांधीधाम छोड़ते ही कच्छ अलग प्रदेश हो जाता है। कच्छी भाषा में सिंधी की झलक तो है, पर बाकी सब कुछ अलग।
वैसे अपने गुजरात के भाजपाईयों का मानना है कि गांधीनगर भाजपा के लिए एक सुरक्षित बैठक है, पर आडवाणीजी के लिए शायद नहीं।
अपने आडवाणीजी का 7आरसीआर प्रेम( प्रधानमंत्री की कुर्सी का लक्ष्य) सभी को मालूम है। भले ही उनके शिष्य मोदीजी ने भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री की कुर्सी अपने नाम लिखवा ली है, आडवाणीजी को उनके हाथ की लकीरों मे बहुत विश्वास है। शायद हाथ मलते मलते वो यह गुनगुनाते हैं- वह सुबह(कुर्सी) कभी तो आयेगी।
जब गोआ में मोदीजी की ताजपोशी की तैयारी चल रही थी तब आडवाणीजी के घर पर नारेबाजी हो रही थी। इसके बावजूद अपने आडवाणीजी सब कुछ भूल पूरे जोरशोर से मोदीजी के साथ लग गए हैं।

पर भैय्ये ये तो राजनीति है। यहां कभी भी कुछ भी हो सकता है। यह सभी लोग जानते हैं । अपने आडवाणीजी भी!!!! 86 वर्ष के जवान हैं आडवाणीजी।

Thursday, February 21, 2013



विधान सभा की भगवा छटा

गुजरात विधान सभा का यह सत्र कई अर्थों में नया है। पिछले सात टर्म से भी अधिक समय से गुजरात विधान सभा के सदस्य और वित्त मंत्री रह चुके वजुभाई वाला अब विधान सभा अध्यक्ष हैं।

बार बार विधान सभा में तरह तरह के कोमेंट के लिये मशहूर अपने नितिनभाई अब वित्त मंत्री जैसी भारी पोस्ट पर बैठ सरकार को बचाने के फायर फाईटिंग ऑपरेशन में इस तरह फंसे दिखाई देते हैं कि कोमेंट वोमेंट कम ही कर्ते दिखलाई देते हैं।

खैर मुद्दा तो भगवा छटा का है। प्रतिपक्ष के नेता शंकरसिंह वाघेला  किसी जमाने के भाजपा के कद्दावर नेता हैं। गुजरात में भाजपा की नींव रखने वाले शंकरसिंह वाघेला  ने गुजरात में भाजपा को तोड़ यह भी बता दिया कि भाजपा अटूट नही हैं। वह भी और दलों की तरह ही है। हां पर भाजपा में शंकरसिंह वाघेला  की टक्कर का कोई और नेता नही है। पूरे देश में।

दो बार मुख्य मंत्री रह चुके अपने केशूभाई पटेल विरोध का दूसरा छोर हैं। दो सदस्यों वाली गुजरात परिवर्तन पार्टी के नेता हैं। पूरी जिंदगी आर एस एस से जुड़े रहे अपने केशूभाई पटेल ने मुख्य मंत्री नरेन्द्र मोदी को कोसते हुए भाजपा छोड़ दी और चुनाव से कुछ महीने पहले गुजरात परिवर्तन पार्टी बना ली।

पर केशुबापा के नाम से मशहूर अपने केशूभाई पटेल की किस्सा तो पहले प्यार के टूटने वाले आशिक जैसा है। दिल तो उनका अभी भी भगवा ही है। इसलिये चुनाव के दौरान वे यह कहते थे कि असली भाजपा तो उनकी है।

आप विधान सभा अध्यक्ष वजुभाई वाला की हालत की कल्पना कर सकते हैं। सदन मे वे जहां भी नज़र करते हैं , बुलन्दी पर भगवा ही दिखलाई देता है। फिर चाहे वो उनके अपने भाजपा वाले मुख्य मंत्री नरेन्द्र मोदी हों या फिर भूपू भाजपाई शंकरसिंह वाघेला  और केशूभाई पटेल हों।

तीनों की विषेशता यह है कि , तीनों एक ही स्कूल की प्रोडेक्ट हैं। विचार से ले भाषण देने की कला तक।

इसलिये आज जब शंकरसिंह वाघेला  ने अपना धांसू भाषण दिया तो भाजपाईयों के पास उसका कोई तोड़ ही नही था। क्योंकि छटा तो भगवा थी!
Post this story to: Del.icio.us | Digg | Reddit | Stumbleupon