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Monday, June 25, 2007

गुजरात की बसों में सूचना क्रांति

गुजरात की सरकारी बसें अब आई टी क्रांति के दौर मे हैं ।पिछले साल इन बसों में मोबाइल फ़ोन की सुविधा दी गई थी। कुछेक बसों मे यह अभी भी दिखलाई देती है।

अब यह बस सेवा एक नई सुविधा लाई है । SMS करो और बस का टाईम टेबल जान जाओ । एक साथ उस रूट की पांच बसों की जानकारी । लेट भलें हों, जल्दी तो नहीं आयेंगी । आप आराम से मूंगफ़ली खाते हुए बस की राह देख सकते हैं । इस निर्मल गुजरात वाले वर्ष मे सभी बस स्टेंड अच्छे बनाये जा रहे हैं ।

यह सब जानकारी देने के लिये ST के अध्यक्ष अलोरिया जी ने पत्रकारों को बुलाया। लेपटोप से सज्ज उनका स्टाफ़ उनकी सेवा मे हाजिर । लेपटोप के काफ़ी कान मरोडे। उसकी पूंछ मरोड उसे सीधे रास्ते पर लाने की कोशिश भी की । पर अडियल टट्टू की तरह वह तो टस से मस न हुआ। किसी ने फ़िकरा कसा, सरकारी बस की तरह सडक पर ब्रेकडाउन !

तुरंत उनके साथ के बाबू का जवाब आया- मौसम मे उमस ज्यादा है इसलिये ये लेपटोप काम नही कर रहा । अरे भैये जब साहब के एअर कंडीशन्ड कमरे मे ये हाल है तो बाहर क्या होगा । खैर अलोरिया साहब ने खुद ही जबान और हाथ हिला ओडियो विज्युअल प्रेसेन्टेशन दे काम चला लिया ।

अपने अलोरिया साहब ने समझाया कि स्टाफ़ फ़ोन पर सही जवाब नही देता था इसलिये यह एसएमएस व्यवस्था लाये हैं । अब यात्री और टाइम टेबल के बीच कोई स्टाफ़ नही । भैये ये तो हम बाबु के जवाब से ही समझ गये थे ।
पर कम्प्यूटर को कम्प्यूटर तो नही चलायेगा !!! उपर से एसएमएस के पैसे तो ग्राहक की जेब से ।

Thursday, June 21, 2007

मोदी जी की प्रतिभा पाटिल को गुगली

आजकल प्रतिभा पाटिल चर्चा मे है। अपने अखबार वाले पन्ने भर भर उनके पक्ष और विपक्ष मे लिखे जा रहे हैं । उनके बारे मे अच्छे अच्छे को मालूम नही था, आज उनकी चर्चा हर जबान पर है। ऎसा ही होता है । जब भाग्य जागता है तो दुनिया जानती है ।वो राष्ट्रपति बनने वाली है, भले भाषा शास्त्री इस पर विवाद करे कि महिला राष्ट्रपति कैसे बन सकती है !

अगर नही बन पाई तब भी इतिहास मे तो अमर हो ही गई । अब जब भी राष्ट्रपति का चुनाव होगा अपने पत्रकार मित्र अपने डेटा बेज मे से या फ़िर गूगल सर्च मे से प्रतिभा जी का कच्चा चिठ्ठा निकाल लिखेंगे कि किस प्रकार उनके चुनाव के समय एक तीसरा मोर्चा खुला था ? प्रतिभा जी को हराने के लिये भाजपा वाले अपने ही शेखावत जी को निर्दलीय बना रहे है। यू कहो कि निर्वस्त्र कर रहे हैं । तीसरा मोर्चा कलाम साहब के कन्धे पर बन्दूक रख प्रतिभा जी पर गोली दागने मे लगा हुआ है ।

यह सब भविष्य के पत्रकारों के लिये वो मसाला है जो गीगा बाइट मे अलग अलग सजाल मे इकठ्ठा हो रहा है ।आज अपने भाई लोग लक्ष्मी सहगल के बारे मे लिख रहे हैं, फ़िर लक्ष्मी सहगल और प्रतिभा जी के बारे मे लिखेंगे। कहने का अर्थ है कि उन्होने इतिहास बना लिया । खैर हम यहा हमारे नरेन्द्र मोदीजी के विचार दर्ज करने बैठे है। वो हमारे इसलिये हैं क्योकि हम उनके पांच करोड गुजरातवासियो मे से एक है। वैसे हम आपको बता दे कि पिछले पांच वर्ष से पांच करोड की रट लगाने वाले अपने मोदी जी ने अपने पिछ्ले भाषण मे यह संख्या बढा कर साढे पांच करोड कर दी थी।

मोदीजी की मुख्यमन्त्री बनने के बाद से यह शिकायत है कि मीडिया उनके अच्छे विचार नही लिखता है। उनके २०६३ दिन पूरे करने के उपलक्ष्य मे आयोजित कार्यक्रम मे तो उन्होने खुल कर कह दिया कि मैने इन्हे( मीडिया) पांच वर्ष झेला है, आप इन्हे थोडा समय झेलें । उन्होने यह भी कहा कि अगले छह महिने सत्य की आशा छोड दो इनसे।

अपने मोदी जी ने प्रतिभा जी के सामने तीन शर्ते रखी हैं । पहली तो यह कि वे विदेशी मूल के व्यक्ति के प्रधान मन्त्री न बनने दें, दूसरा यह कि वे अफ़ज़ल को फ़ांसी लगवाये और तीसरा यह कि वे महिला आरक्षण विरोधी लालू यादव का मत ठुकराये । देखी अपने मोदीजी कि प्रतिभाजी को गुगली । हम चाहते हैं कि भविष्य मे जब राष्ट्रपति पद के लिये कोई विवाद जागे तब मोदीजी के इस त्रिशूल विचार का ध्यान जरूर रखा जाये । व्यंग्य

Monday, June 11, 2007

श्री श्री रा धु प प्र २०६३ मोदी जीं

आप भी आश्चर्य मे होंगे कि मोदीजी के लिए यह कैसा संबोधन । चिन्ता मत करो मित्रों। हम किसी के बारे में खराब नही सोचते । यह बात अलग है कि लोग अपने हिसाब से मतलब निकाल तरह तरह का सोच लेते हैं। गुजराती मे एक संबोधन है। ध धु प पू अर्थात धर्म धुरंधर परम पूज्य । अपने मोदीजी तो मोदीजी हैं। वो धर्म का एक चेहरा हैं। वो तो उससे भी आगे हैं।

सुना है एम ए मे राजनीती शास्त्र उनका एक विषय था । गुजरात की राजनीती पर पुस्तक लिखने वाले डी ऍन पाठक उनके शिक्षक थे। पर उनकी राजनीती से साफ है कि वो किताबी ज्ञान से बहुत आगे है। अगर चाणक्य जिंदा होता तो वो भी मोदीजी से जरूर कुछ ना कुछ सीख ही लेता। अरे मोदीजी बिना किसी चाणक्य की मदद के पूरे २०६३ दिन से मुख्यमंत्री कार्यालय मे अड्डा जमाये हैं ।

भा ज पा अध्यक्ष राजनाथ सिंघ ने भी साफ कर दिया कि भले ही केशुभाई और उनके चेले मोदी हटाओ के उनके पांच साल से चल रहे कार्यक्रम में लगे रहें , पर अंगद के पाँव की तरह उन्हें कोई हिला नही सकता। वो चुनाव तक ही नही उसके बाद भी मुख्यमंत्री बने रहेंगे। केशुभाई भी सोचते होंगे कि अगर मोदी को दिल्ली वनवास नही दिलवाया होता तो ना तो उन्हें वनवास भुगतना पड़ता और ना ही मोदी जीं के दिल्ली के तार इतने मजबूत होते। खैर उनके भाग्य को यही मंजूर था। यह तो रही बात रा धु यानी कि राजनीती धुरंधर की।

हमारे मोदीजी परम पूज्य तो हैं वे परम प्रेरणा भी हैं। किसी भी मंत्री का भाषण सुनो। सभी के भाषण कुछ इस तरह शुरू होते हैं। आदरणीय गुजरात के लोकप्रिय मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा और मार्गदर्शन से यह काम हो रहा है। कई बार लगता है कि बेकार मे मंत्री रख रखे हैं। खैर ये तो मोदीजी की बात है , हम कौन होतें हैं इस मामले मे पड़ने वाले। पर इसमे कोई शक है क्या कि वो प प्रे , परम प्रेरणा हैं।

आप सभी ने १०१, १०८ , १००८ की महिमा तो सुनी होगी। मोदीजी ने २०६३ को सार्थक बना दिया है। तभी तो गुजरात भा ज पा ने उन्हें २०६३ कमल के फूलों की माला पहराई , लकड़ी के व्यापारियों ने २०६३ गुलाब की माला पहराई । शायद कुछ दिनों बाद लोग २०६३ मणकों की माला का जाप कर मोदीजी को सफलता और संकटमोचन के देवता के रुप मे पूजें ।

तो बोलो रा धु प प्रे २०६३ मोदीजी की जय ।

Tuesday, June 5, 2007

बस नरेंदर भाई ही भाजपाई

अपने नरेंदर भाई तो नरेंदर भाई हैं। उनकी टक्कर में कौन आ सकता है। देखो खेलते खेलते गुजरात के इतिहास में आंकडो में खुद का नाम दर्ज करा दिया। हेई कोई माइ का लाल जव इतने दिनों तक मुख्यमंत्री का कांटो का ताज पहन पाया है? अपने नरेंदर भाई ने पहरा है , वह भी खुद के लिए नही। गुजरात की पांच करोड़ जनता के लिए । भाई उनके आगे पीछे तो कोई है नही। सारी दुनिया उनकी और वो सारी दुनिया के।

इसीलिये तो वो जव चाहे वो करे । भैये वो तो कानून हैं। ये हम नही कहते उनके चमचे कहते हैं। अब देखो उनके एक खास अधिकारी का क्या कहना है। इन सज्जन का कहना है की अपने नरेंदर भैया पहले भगवा मुख्यमंत्री हैं जव कुर्सी पर इतने टिके हैं। सबसे ज्यादा चिपके रहने का रेकॉर्ड बनाया है अपने नरेंदर भाई ने। ये सब तो सही पर अपने और भगवा मुख्यमंत्रियों का क्या?

अपने प्वाइंट ऑफ़ आर्डर वाले सुरेशभाई का क्या। भले वो आर एस एस की चड्डी वाले ना हों , भाजपाई तो थे। आज भी अपने पत्रकार भाई लोग उन्हें प्वाइंट आफ आर्डर उठाने के लिए याद करते हैं। कुछ भी हो ये भी एक खासियत तो थी।केसुभाई का क्या? भले ही वो वक्त पर पलती मार जाते हैं, पर वो हैं तो भाजपाई। अरे केसुभाई हैं। यह भारत है। मेरा देश है। कृष्ण का देश है। यहाँ हर विचार, हर काम का दिव्य आधार है। वह फिर झूंठ बोलना हो या फिर रण छोड़ भाग जना हो । कुछ भी हो । भाजपाई तो थे ही।

पर इस खास बन्दे ने तो इन्हें ग़ैर कांग्रेसी करार कर दिया। अब भाजपाई बचा कौन? बचेगा कौन? अपने नरेंदर भाई और कौन११ अरे भाई यहाँ अपने नरेंदर भाई का ही राज चलता है। किसीकी मजाल है की प्रेस वालों से बात करे। पूंछो अपने सनसनी सम्राट अशोक भट्ट से। बात बात पर प्रेस कांफ्रेंस बुलाने वाले अपने भट्ट जीं आजकल पत्रकारों के आने के वक्त अपने केबिन में मीटिंग शीटिंग का चक्कर शुरू कर देतें हैं बहार लाल बत्ती लगा कर। आखिरकार स्वास्थ्य मंत्री जीं को उनके राजनीतिक स्वास्थ्य की चिन्ता पहले करनी होगी। फेंक दिया था कानून विभाग में । बड़ी मुश्किल से वापिस अच्छा विभाग मिला है।

तो भैये मानते हो या नही किबस एक ही भाजपाई मुख्यमंत्री हुआ है गुजरात में। वो है पांच करोड़ गुजरातियों का एक मात्र नरेंदर भाई । विधान सभा चुनाव तक तो यही सच है , आगे की राम जाने ! ! !

पांच करोड़ का चुनावी चक्कर

कुछ नम्बर हिट हो जाते हैं सही समझे , लकी नम्बर । हमारे नरेंदर भाई के लिए पांच करोड़ शायद ऐसा ही लकी नम्बर है । तभी तो जहाँ जाते हैं पांच करोड़ की बात करतें हैं। उनका सब कुछ पांच करोड़ के लिए ही हैं। वे सब काम पांच करोड़ जनता के लिए करते हैं।

अपने कांग्रेसी भाईयों ने भी करोड़ों की बात करनी शुरू कर दीं है। हर मीटिंग मे वो भी अब पांच करोड़ की बात करते हैं । नरेंदर भाई पांच करोड़ जनता बोलते हैं तो अपने कांग्रेसी नेता कहते हैं कि नरेंदर भाई पांच करोड़ जनता के नहीं पर पांच करोड़ पतियों के हैं। अब तो हर सभा में कांग्रेसी नरेंदर भाई के पांच करोड़पतियों की ही बात करतें हैं।

कांग्रेसी कहते हैं कि भाई नरेंदर पांच करोड़पतियों को प्लेन मे बैठा घूमते रहते हैं। अपने खजुराहो वाले शंकरसिंह वाघेला यह कहते नही थकते की अरे करोड़पतियों तुम्हारी खैर नही। अब हमारी सत्ता आने वाली हैं । इतने भी केसरी मत बनो कि हमारे पास आना मुश्किल हो जाये।

यह बात अलग हैं कि जिन करोड़पतियों की बात वाघेला करते हैं वो वाघेला की प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकारों को खाना परोसते नजर आतें हैं ! एक दिन हम वाघेला जीं से पूछ बैठे , भैये ये पांच करोड़पति हैं कौन। आप बार बार पांच करोड़पति बोलते हैं पर नाम नही बतलाते हैं । वो तपाक से बोले सभी जानते हैं । हमने जब बार बार पूछा, तो बोले अरे ये सब छोडो और बताओ की क्या चल रहा है। एक करोड़पति मिल गए। हमने पूछा कि ये करोड़पति का क्या चक्कर है। बोले, पूछो वाघेलाजी से । हमने कहा कि वो तो कुछ बोलते ही नही। तब फिर क्यों चक्कर में पड़ते हो जिस दिन वाघेला जीं नाम बता दें , हम से मिल लेना । साफ था की वाघेलाजी नाम नही बताएँगे । बोलेंगे जरूर।

गुजरात में यह चुनाव का साल हैं और मोदीजी और वाघेलाजी दोनो को चुनाव लड़ना है और दोनो को ही वोट और नोट दोनो ही चाहिऐ । पांच करोड़ जनता के वोट और पांच करोड्पतियो के नोट।

ये है पांच करोड़ का चुनावी चक्कर।

Monday, May 28, 2007

भाई का सत्ता मे रहने का रिकार्ड

कोई कुछ भी कहे, एक बात तो माननी पडेगी । अपने नरेंद्रभाई भले ही किसी बात मे नंबर वन हों या ना हों एक बात में तो वो नंबर वन हैं । गुजरात के अभी तक के चौदह मुख्यामंत्रिओं मे वो पहले मुख्यमंत्री हैं जो सत्ता में इतने टिके हैं। उन्होनें सत्ता में टिके रहने का हितेंद्र देसाई और मधाव्सिंह सोलंकी का रिकार्ड तोड़ डाला है।
अपने नरेंद्रभाई की तोड़ डालने की कला कौन नही जानता । पूछो अपने केशुभाई से , अपने सुरेशभाई से पुलिसवाले अपने जसपाल भैया से। वड़ोदरा में एक तरफ वो बैठे हैं तो दूसरी तरफ अपने नयी नयी विद्रोही आत्मा नलिन भट्ट । किसी जमाने में इन सबकी तूती बोलती थी । और अब हाई कमांड को चिट्ठियाँ लिखने के अलावा और क्या कर सकते हैं ये भाजपा के दिग्गज।
खैर अपन बात कर रहे थे अपने गुजरात के पाँच करोड़ के अपने भाई नरेंद्रभाई की। कई बार सोचता हूँ की यह पांच करोड़ पांच करोड़ ही क्यों हैं। नरेंद्रभाई की पिन पाँच करोड़ पर ही क्यों अटकी हुई है। क्या वो गिनती भूल गएँ हैं , या फिर उनकी सरकार नें जनसँख्या नियंत्रण का ऐसा फार्मूला दूंद लिया है जिससे गुजरात की जनसँख्या बस पाँच करोड़ पर अटक कर रह गई है। जितने पैदा होते हैं उतने ही मर जातें हैं ! कुछ भी हों , अपने नरेन्द्र भाई तो नरेन्द्र भाई हैं । वो कुछ भी कर सकते हैं ।
खैर अपन बात कर रहे थे अपने नरेंद्रभाई के मुख्यमंत्री कार्यालय में रिकार्ड दिन । २१ मई की नरेंद्रभाई ने सभी के रिकार्ड तोड़ दिए। २०६२ दिन पूरे कर लिए मुख्यमंत्री कार्यालय में। १० जून को उनका सम्मान होगा अहमदाबाद में। साफ हैं अपने भाजपाई बताएँगे की अपने नरेंद्रभाई ने क्या क्या झंडे कहां कहां गाडे हैं । उनके राजनीतिक पी आर ओ राजकोट वाले हितेशभाई ने तो सब को ए मेल कर कर के ढोल पीटना शुरू कर दिया है।
खैर अपन वो बता रहे हैं जिसका ढोल अपने यार लोग दबी जुबान से पीटेंगे ।
इन दिनों में मोदीजी ने पार्टी में कितनों का सफाया कर दिया हैं। कितने आई ए एस नौकरी छोड़ गएँ हैं। कितने बिस्तर तैयार कर बैठे हैं। राह देख रहें हैं की अगर मोदीजी नहीं जातें हैं तो वो खुद ही दिल्ली चलें जायेंगे । यह कहना पड़ेगा की अभी तक कोई भी मुख्यमंत्री इतना विवादास्पद नहीं हुआ हुआ है।
अपने मोदी भाई का विवाद खडे करने का अपना ही अंदाज हैं। बडे पर तीर दागो और बडे हों जाओ । कॉंग्रेस में अपने मोदीजी सोनिया गाँधी से नीचे तो बात ही नही करते। गुजरात कॉंग्रेस के नेता तो कहीं हैं ही नही । प्रदेशाध्यक्ष भरत सोलंकी , प्रतीपक्ष के नेता अर्जुन भाई का तो कोई क्लास ही नहीं । सीधे पाकिस्तान के जनरल मुशर्रफ के लेवल पर ही निशाना। वहां से कोई जवाब नहीं और यहाँ वाह वाह। आ सकता है कोई अपने मोदीजी की टक्कर में। यूँ ही नही बनते रिकार्ड। जय नरेन्द्र भाई । जय नरेन्द्र भाई की पाँच करोड़ की जनता .
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