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Wednesday, February 27, 2008

मीडिया मास्टर भट्टजी

सुर्खियों में कैसे छा जाना यह तो सीखे कोई वरिष्ट भाजपा नेता अशोक भट्ट से। विषय कोई भी हो , हमारे भट्टजी उसे मीडिया में इस तरह से उछाल सकते हैं जैसे अपने धोनी भाई किसी भी खिलाडी की बॉल को बाउन्ड्री तक पंहुचाते है।

सबसे अधिक बार निर्वाचित विधायक का भट्टजी का रिकार्ड खुद ही एक बडी उपलब्धी है। इसे कोई संयोग कह सकता है। पर कानून मंत्री के रुप में जिस तरह से उन्होने सुर्खिया बटोरी इसने एक बात तो सिद्ध कर दी कि कानून मंत्रालय तर्क आधारित बोरिंग विषय का मन्त्रालय नहीं है।

अब विधानसभा के अध्यक्ष के नाते, विधानसभा की कार्रवाई में उनकी भूमिका उन्हे हर रोज अखबारों में जगह दिलवाती है। यह तो उनके पद से जुडी कार्रवाई है। पर हमारे भट्टजी तो भट्टजी हैं। विधानसभा के अंदर ही नही, वे तो बाहर भी काफ़ी सक्रिय है।

पिछले हफ़्ते कुछ पत्रकार उनसे मिलने पहुंचे। मुद्दा था विधानसभा का प्रवेश पास। भट्टजी के लिये यह कोई बडी बात नहीं थी। बोले नो प्रोब्लम। चाय-पकौडे खाओ। और फिर उन्होने बताया कि किस तरह विधानसभा की समृद्ध लायब्रेरी विधायकों की उदासीनता का शिकार है।विधायक उसका उपयोग ही नहीं करते। इसलिये उन्होंने पत्र लिख विधायकों से आग्रह किया है कि वे पुस्तकालय का उपयोग करें!

पत्रकार कोई प्रतिक्रिया दे, उससे पहले ही उन्होंने कहा कि पूर्व विधायक भी विधानसभा का अंग हैं। भट्टजी उनके अनुभव और ज्ञान का पूरा उपयोग करना चाहते हैं। और उन्होंने इन पूर्व विधायकों के लिये विधानसभा लाउन्ज में बैठने की इजाजत दे दी हैं!!

भट्टजी का मूड देख पत्रकारों ने कहा कि विधानसभा कैन्टीन सब्जी मार्केट जैसी हो गई है। पत्रकारों को बैठने के लिये जगह भी नहीं होती। कुछ करो। भट्टजी बोले तथास्तु। और जैसे ही पत्रकार इस हफ़्ते कैन्टीन में गये उन्होंने देखा कि कैन्टिन में पत्रकारों के लिये एक अलग पार्टींशन हो गया था!!!

मोदीजी के राज में पिछले पांच वर्षो में अपने भट्टजी सुर्खीयां तो मार लेते थे, पर पहले की तरह पत्रकारों के साथ भोजन मिलन नहीं कर पाते थे। वो क्या किसी भी मंत्री की हिम्मत नहीं थी कि मोदीजी के जुबानी फरमान का उल्लंघन कर पत्रकारों के साथ चाय भी पी ले। खाने की बात तो छोडो। मोदीजी ने सबकी बोलती बंद कर रखी थी।

खैर अब तो अपने भट्टजी अध्यक्ष सर्वोपरी हैं। जिस दिन अध्यक्ष बने तब पत्रकारों को नये घर पर खाने पर बुला लिया। और विधानसभा के तीसरे दिन ही पत्रकारों को सर्किट हाऊस में दावत का ऐलान किया।

अपने भट्टजी तो गृह में और गृह के बाहर पूरी तरह से प्रोफेशनल हैं। खाने से पहले पत्रकारों से दो मिनट के लिये मिले। बोले मैंने २९ फरवरी से तीन दिन के लिये ज्ञान शिविर का आयोजन किया है। गुजरात और बाहर से विभिन्न विषयों के विद्वान विधायकों को संसदीय इतिहास, परम्परा और प्रणाली से अवगत करायेंगे।

पूरे देश में पहली बार। लोकसभा के अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी खुद आयेंगे इस शिविर में भाग लेने। देखा अपने मीडिया मास्टर भट्टजी की सुर्खीबाजी की दक्षता!!!! क्या कोई रिर्पोटर इस खबर को मिस कर सकता है। और भट्टजी का माल पानी जीमने के बाद पत्रकार यह राष्ट्रीय समाचार बनाने में लग गये।

Tuesday, December 11, 2007

मोदीजी के लियी दिल्ली नही आसां

भाजपा ने आडवाणी को उसके प्रधानमंत्री के रूप मे जनता के सामने पेश किया है। सभी अचम्भे में हैं कि यह क्यॊ हो रहा है? दिल्ली के अखबार इसे मोदी के लिये स्पष्ट संकेत के रूप मे देख रहे हैं कि भैया दिल्ली दूर है गांधीनगर मे ही संतुष्ट रहो। गुजरात मे चुनाव के प्रथम चरण की पूर्व संध्या पर इस प्रकार का निवेदन वास्तव मे काफ़ी रहस्यमय है।

ऎसे मे प्रधान मंत्री मन मोहन सिंह भी चुस्की लेने से बाज नही आये। जब वडोदरा मे पत्रकारों ने उनसे पूछा कि यह क्या है, तो तपाक से बोले कि यह मोदी को दिल्ली से दूर रखने का उपाय है। भाजपा के नेता खुद मोदी से डरे हुए हैं ।इससे अधिक वेधक और कोई जवाब शायद ही हो सकता था।

अहमदाबाद मे आये तो यहा भी यह सवाल उन्हे पूछा गया। उनका जवाब था कि यह भाजपा का अंदरूनी मामला है। उसी सांस मे बोले कि भाजपा ने आडवाणी को ऎसे पद के लिये उम्मीदवार बनाया है जो अभी खाली ही नही हुआ है !

अंदर का मामला कुछ भी हो, एक बात तो साफ़ है कि अरूण शौरी से ले और सभी नेता जो मोदी को प्रधानमंत्री के रूप मे बता रहे थे उनकी बोलती बंद हो जायेगी। भाजपा जहां खाना खाने जैसा काम भी रण्नीति का ही एक भाग होता है, वहां उसके नेता शायद अभी से ही दिल्ली वालॊं के लिये दिल्ली रिजर्व कर रहे हैं। मोदी अगर गुजरात हार जाते हैं तो उनका खाली दिमाग दिल्ली की कुर्सी के लिये षडयंत्र रचना शुरू न कर दे!!!!

Friday, December 7, 2007

देते है भगवान को धोखा...

उपकार फ़िल्म के मशहूर गाने कस्मे वादे प्यार वफ़ा, सब वादे हैं वादों का क्या इस गाने की कडियां आज अहमदाबाद के अखबारॊ मे चमक रही हैं । यह उमा भारती की भारतिय जनशक्ति पार्टी के विज्ञापन का शीर्षक है। देते है भगवान को धोखा, इन्सा को क्या छोडेंगे..। फ़िल्म मे यह गाना प्राण पहली बार उन्हे मिली अच्छे आदमी की भूमिका मे गातें है। पर यह विज्ञापन अपने को हिन्दु ह्र्दय सम्राट कहलवाने वाले मोदी को प्राण की विलन की भूमिका मे दर्शाता है ।

आधा पन्ने के इस विज्ञापन से उमा भारतीजी के उम्मीदवार यह कह रहे हैं कि मोदी ने हिन्दुत्व का नाम ले वोट बटोरे हैं और बाद मे हिन्दुऒं को धोखा दिया है।इसमे मोदी का एक मुसलमान के साथ विचार विमर्श करते हुए फ़ोटो है। एक दूसरा कवितामय बयान है, पांच साल-मोहम्मद अली जिन्दाबाद, चुनाव के समय याद आये हिन्दुवाद, वाह रे भाजप तेरा अवसरवाद। टूटा हुआ त्रिशूल मोदी के टूटे हिन्दूत्व को बतलाता है।

मोदी ने हिन्दुऒ को क्या क्या वादे किये थे और वो अभी तक पूरे नही किये यह कहकर विज्ञापन कहता है -ये सब सारे संत हैं, मोदी तेरा अंत है।

चुनाव परिणाम जो भी आये, आजकल गुजरात के मतदाता चुनाव प्रचार की चुस्किया ले रहे हैं!!!!

कांग्रेस राहुल गांधी पर सट्टा खेलेगी

कांग्रेस ने आखिरकार राहुल गांधी को गुजरात के जनमत संग्राम मैदान मे उतारने का निर्णय कर लिया है। राहुल रविवार को सूरत शहर मे उनका रोड शो करेंगे। रविवार प्रथम चरण के प्रचार का आखिरी दिन है। साफ़ है कि उन्हे चुनाव मे काफ़ी देर से उतारा जा रहा है।

रहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश के चुनाव मे क्या गुल खिलाये यह सभी को मालूम है। और हाल ही मे शराब के पक्ष मे उनके खुले विचार खुले रूप मे रख उन्होने एक और विवाद को न्योता दे दिया है। आज जब कांग्रेस गुजरात मे नशाबंदी की पैरवी कर रही है तब चुनाव प्रचार मे राहुल को बुलाना यानि कि आ बैल मुझे मार की स्थिती पैदा करना है।

राहुल का सूरत प्रचार पांच बैठकों को प्रभावित करेगा। ये हैं सूरत उत्तर, पूर्व, पश्चिम, चोर्यासी और ओलपाड। सुबह ११ से शाम ५ तक राहुल यहां प्रचार करेंगे। साफ़ है कि भाजपा इस मौके को नही छोडेगी। और कांग्रेस के पास कोई बचाव भी नही है!!!!! पर राहुल ठहरे सोनिया पुत्र, बेचारे कांग्रेसियों को मैडम की गुड बुक मे रहना है या नही?

भाजपा का गरीबी मुक्त गुजरात का वादा

आखिरकार भाजपा ने उसका चुनावी धोषणा पत्र जारी कर ही दिया। उसकी भाषा में कहें तो उनका संकल्प पत्र।

कांग्रेस ने गरीबों को कलर टीवी देने का वादा किया है तो अपने भाजपाईयों ने तो गुजरात में सभी को घर देने क वादा किया है। उस घर में चौबिस घंटे बिजले होगी।

रही बात किसानों की। सभी किसानों के खेतों में कुओं पर बिजली कनैक्शन होगा। नहरों में सिंचाई के लिये पानी होगा।

इन्दिरा गांधी के दिनों की याद दिलाता हुआ उसका नारा है, गरीबी मुक्त गुजरात! प्रदेशाध्यक्ष पुरुषोत्तम रुपाला ने कहा कि पांच वर्ष बाद गुजरात में “गरीबी रेखा से नीचे” शब्द ही नहीं होगा।

भाजपा के इस गुजरात में सभी साक्षर होंगे। सभी के घर में नल होंगे जिसमें गुणवत्ता वाला पेयजल होगा। सभी गांव शहरों से मजबूत ऑल वेदर सड़कों से जुडे होगें। युवा शक्ति को रु.१००० करोड के रिवालविंग फंड के द्वारा सक्रिय शक्ति बनाया जायेगा।

यह सब कैसे किया जायेगा, इसके लिये कितना धन ख्रर्च होगा, वह कैसे जुटाया जायेगा जैसे प्रश्‍नों के उत्तर मे भाजपाई नेताओं का कहना है कि यह मत पूछों। हम यह सब कर लेंगें!!

भाजपा के चुनावी प्रमुख मुद्दे इस तरह है-सुरक्षित, सलामत और समृद्ध गुजरात, गुजरात १२ प्रतिशत वृद्धिदर हासिंल करेगा, सकल घरेलु उत्पादन दुगना और प्रतिव्यक्ति वार्षिक आय रु.८०,००० होगी, पारदर्शक और प्रामाणिक राज्य व्यवस्था, गरीबी मुक्त गुजरात, सभी घर विहीन परिवारो को घर, प्राथमिक शिक्षा में १०० प्रतिशत पंजिकरण और शून्य ड्रोप आउट, सभी घरों में नल द्वारा शुद्ध पीने का पानी, गरीबी रेखा के नीचे जीने वाले परीवार के लिए सर्वग्राही स्वास्थ्य विमा कवच, सभी गांवों को बारह मास पक्का रास्ता ।
स्वस्थ,स्वच्छ और निर्मल गुजरात,युवाशक्ति का विकासशील उपयोग, रिवोल्वींग फंड के रचना, बच्चों और वृद्धों की विशेष देखभाल, वंचितों के विकास के लिये विशेष योजना, उद्योग,वाणिज्य और ढांचागत क्षेत्र में वैश्विक स्तर, स्थापित विधुत ऊर्जा में दुगना कर २०,००० मेगावॉट।

Thursday, December 6, 2007

चुनाव का आतंकी खेल

शान्ती सुरक्षा और विकास की बातें करते करते कांग्रेस और भाजपा दोनों ही आतंकवाद की बातें करने लग गये हैं । भाजपा ने कल एक विज्ञापन दिया था। उसमे बताया गया था कि भाजपा के शासन मे गुजरात में तो केवल एक निर्दोष ही मरा है।दूसरी ओर UPA के शासन मे ५६१९ । मजेदार बात यह है कि इस विज्ञापन मे केवल गुजरात के शासन के चार वर्षो की बात कही गई है। साफ़ है कि यदि मोदीजी के ६ साल ले तो गोधरा और अक्षरधाम भी आ जाये और फ़िर यह आंकडा काफ़ी बडा हो जाये!और फ़िर मोदीजी यह मुद्दा उठा ही नही सकते !

आज कांग्रेस ने विज्ञापन दिया है। उसमे NDA सरकार के समय के आंकडे दिये गये हैं । विज्ञापन देख लगता है कि UPA सरकार के कार्यकाल मे तो आतंकवाद की कोई घटना ही नही हुई है। मोदीजी और कांग्रेसियों दोनों को लगता है कि जनता बेवकूफ़ है। आज के जमाने मे जब लोगो के पास जानकारी के बहुत सारे माध्यम हो गये हैं इस प्रकार की सोच राजनीतिक दलों का बेवकूफ़ी का एक खुला प्रदर्शन नही तो और क्या!!!!!

मोदी के विकासवाद का हिन्दू चेहरा

अपने मोदीजी ने इस बार चुनाव मैदान मे विकास का नारा लगाया। पूरे देश मे उनके समर्थकों ने कहा कि विकासवाद और राष्ट्रवाद ही मोदीजी का पर्याय है। वे देश की शक्ती हैं यह नारा लगने लगा। खैर अब पूरी दुनिया को मालूम पड गया है की मोदीजी का विकासवाद उनके हिन्दुवाद का ही स्वरूप है। अब वो सोहराबुद्दीन को मारने की ही बात कर रहे हैं ।

आज पूरे देश मे चर्चा है कि मोदीजी ने कितनी महिलाऒ को टिकट दी है। उन्होने कितने नये चेहरों को शामिल किया है। पर क्या किसी ने गौर किया है कि एक भी मुसलमान को टिकट नही दी गई है। गुजरात मे १३ प्रतिशत से अधिक मुसलमान हैं। १८२ बैठके है । २००२ में भी एक भी मुसल्मान को टिकट नही दी गई थी। क्या उसे एक भी उम्मीदवार नही मिल रहा है। आज हरिजनो और पिछडो को टिकट दे पार्टी यह जाहिर कर रही है की वह कितना समतोल विकास कर रही है।

क्या हम राज्य के १३ प्रतिशत नागरिकों को नजर अंदाज कर राज्य का विकास कर सकते हैं ? क्या मोदीजी यह जताना चाहते हैं कि मुसलमानों को जो मिले जैसे मिले उससे ही संतोश कर लेना चाहिये क्योकि गुजरात हिन्दु राष्ट्र है!!!!
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