आखिरकार भाजपा ने उसका चुनावी धोषणा पत्र जारी कर ही दिया। उसकी भाषा में कहें तो उनका संकल्प पत्र।
कांग्रेस ने गरीबों को कलर टीवी देने का वादा किया है तो अपने भाजपाईयों ने तो गुजरात में सभी को घर देने क वादा किया है। उस घर में चौबिस घंटे बिजले होगी।
रही बात किसानों की। सभी किसानों के खेतों में कुओं पर बिजली कनैक्शन होगा। नहरों में सिंचाई के लिये पानी होगा।
इन्दिरा गांधी के दिनों की याद दिलाता हुआ उसका नारा है, गरीबी मुक्त गुजरात! प्रदेशाध्यक्ष पुरुषोत्तम रुपाला ने कहा कि पांच वर्ष बाद गुजरात में “गरीबी रेखा से नीचे” शब्द ही नहीं होगा।
भाजपा के इस गुजरात में सभी साक्षर होंगे। सभी के घर में नल होंगे जिसमें गुणवत्ता वाला पेयजल होगा। सभी गांव शहरों से मजबूत ऑल वेदर सड़कों से जुडे होगें। युवा शक्ति को रु.१००० करोड के रिवालविंग फंड के द्वारा सक्रिय शक्ति बनाया जायेगा।
यह सब कैसे किया जायेगा, इसके लिये कितना धन ख्रर्च होगा, वह कैसे जुटाया जायेगा जैसे प्रश्नों के उत्तर मे भाजपाई नेताओं का कहना है कि यह मत पूछों। हम यह सब कर लेंगें!!
भाजपा के चुनावी प्रमुख मुद्दे इस तरह है-सुरक्षित, सलामत और समृद्ध गुजरात, गुजरात १२ प्रतिशत वृद्धिदर हासिंल करेगा, सकल घरेलु उत्पादन दुगना और प्रतिव्यक्ति वार्षिक आय रु.८०,००० होगी, पारदर्शक और प्रामाणिक राज्य व्यवस्था, गरीबी मुक्त गुजरात, सभी घर विहीन परिवारो को घर, प्राथमिक शिक्षा में १०० प्रतिशत पंजिकरण और शून्य ड्रोप आउट, सभी घरों में नल द्वारा शुद्ध पीने का पानी, गरीबी रेखा के नीचे जीने वाले परीवार के लिए सर्वग्राही स्वास्थ्य विमा कवच, सभी गांवों को बारह मास पक्का रास्ता ।
स्वस्थ,स्वच्छ और निर्मल गुजरात,युवाशक्ति का विकासशील उपयोग, रिवोल्वींग फंड के रचना, बच्चों और वृद्धों की विशेष देखभाल, वंचितों के विकास के लिये विशेष योजना, उद्योग,वाणिज्य और ढांचागत क्षेत्र में वैश्विक स्तर, स्थापित विधुत ऊर्जा में दुगना कर २०,००० मेगावॉट।
Followers
Friday, December 7, 2007
Thursday, December 6, 2007
चुनाव का आतंकी खेल
शान्ती सुरक्षा और विकास की बातें करते करते कांग्रेस और भाजपा दोनों ही आतंकवाद की बातें करने लग गये हैं । भाजपा ने कल एक विज्ञापन दिया था। उसमे बताया गया था कि भाजपा के शासन मे गुजरात में तो केवल एक निर्दोष ही मरा है।दूसरी ओर UPA के शासन मे ५६१९ । मजेदार बात यह है कि इस विज्ञापन मे केवल गुजरात के शासन के चार वर्षो की बात कही गई है। साफ़ है कि यदि मोदीजी के ६ साल ले तो गोधरा और अक्षरधाम भी आ जाये और फ़िर यह आंकडा काफ़ी बडा हो जाये!और फ़िर मोदीजी यह मुद्दा उठा ही नही सकते !
आज कांग्रेस ने विज्ञापन दिया है। उसमे NDA सरकार के समय के आंकडे दिये गये हैं । विज्ञापन देख लगता है कि UPA सरकार के कार्यकाल मे तो आतंकवाद की कोई घटना ही नही हुई है। मोदीजी और कांग्रेसियों दोनों को लगता है कि जनता बेवकूफ़ है। आज के जमाने मे जब लोगो के पास जानकारी के बहुत सारे माध्यम हो गये हैं इस प्रकार की सोच राजनीतिक दलों का बेवकूफ़ी का एक खुला प्रदर्शन नही तो और क्या!!!!!
आज कांग्रेस ने विज्ञापन दिया है। उसमे NDA सरकार के समय के आंकडे दिये गये हैं । विज्ञापन देख लगता है कि UPA सरकार के कार्यकाल मे तो आतंकवाद की कोई घटना ही नही हुई है। मोदीजी और कांग्रेसियों दोनों को लगता है कि जनता बेवकूफ़ है। आज के जमाने मे जब लोगो के पास जानकारी के बहुत सारे माध्यम हो गये हैं इस प्रकार की सोच राजनीतिक दलों का बेवकूफ़ी का एक खुला प्रदर्शन नही तो और क्या!!!!!
मोदी के विकासवाद का हिन्दू चेहरा
अपने मोदीजी ने इस बार चुनाव मैदान मे विकास का नारा लगाया। पूरे देश मे उनके समर्थकों ने कहा कि विकासवाद और राष्ट्रवाद ही मोदीजी का पर्याय है। वे देश की शक्ती हैं यह नारा लगने लगा। खैर अब पूरी दुनिया को मालूम पड गया है की मोदीजी का विकासवाद उनके हिन्दुवाद का ही स्वरूप है। अब वो सोहराबुद्दीन को मारने की ही बात कर रहे हैं ।
आज पूरे देश मे चर्चा है कि मोदीजी ने कितनी महिलाऒ को टिकट दी है। उन्होने कितने नये चेहरों को शामिल किया है। पर क्या किसी ने गौर किया है कि एक भी मुसलमान को टिकट नही दी गई है। गुजरात मे १३ प्रतिशत से अधिक मुसलमान हैं। १८२ बैठके है । २००२ में भी एक भी मुसल्मान को टिकट नही दी गई थी। क्या उसे एक भी उम्मीदवार नही मिल रहा है। आज हरिजनो और पिछडो को टिकट दे पार्टी यह जाहिर कर रही है की वह कितना समतोल विकास कर रही है।
क्या हम राज्य के १३ प्रतिशत नागरिकों को नजर अंदाज कर राज्य का विकास कर सकते हैं ? क्या मोदीजी यह जताना चाहते हैं कि मुसलमानों को जो मिले जैसे मिले उससे ही संतोश कर लेना चाहिये क्योकि गुजरात हिन्दु राष्ट्र है!!!!
आज पूरे देश मे चर्चा है कि मोदीजी ने कितनी महिलाऒ को टिकट दी है। उन्होने कितने नये चेहरों को शामिल किया है। पर क्या किसी ने गौर किया है कि एक भी मुसलमान को टिकट नही दी गई है। गुजरात मे १३ प्रतिशत से अधिक मुसलमान हैं। १८२ बैठके है । २००२ में भी एक भी मुसल्मान को टिकट नही दी गई थी। क्या उसे एक भी उम्मीदवार नही मिल रहा है। आज हरिजनो और पिछडो को टिकट दे पार्टी यह जाहिर कर रही है की वह कितना समतोल विकास कर रही है।
क्या हम राज्य के १३ प्रतिशत नागरिकों को नजर अंदाज कर राज्य का विकास कर सकते हैं ? क्या मोदीजी यह जताना चाहते हैं कि मुसलमानों को जो मिले जैसे मिले उससे ही संतोश कर लेना चाहिये क्योकि गुजरात हिन्दु राष्ट्र है!!!!
Wednesday, December 5, 2007
अब आचार्य धर्मेन्द्र उतरे मैदान मे
इस चुनाव मे गुजरात सम्तों का चुनावी अखाडा बन गया है। चुनाव की घोषणा से पहले ही सम्तों ने यह सम्केत दे दिये थे कि वे मुख्य मंत्री मोदी के साथ नही हैं। पर मोदीजी का शयद यह मानना था कि और सभी की तरह साधु संत भी उन्ही की वजह से उनकी दुकाने चला रहे हैं।
पर उमा भारती पहली थी जिन्होने उनके इस विचार को तोडा। उतार दिये ५३ उम्मीदवार मैदान मे। बाद मे गुलांट मार गई। पर उनके बंदे तो अभी भी मैदान मे अडिग खडे हैं। किसी को मालूम ही नही उमाजी किस खेमे मे हैं। उनके साक्षात्कार तो यह कहते हैं कि वे मोदी की बहन बन उनके साथ है। पर, उनकी पार्टी के उपाध्यक्ष सघंप्रिय गौतम जी कहना है कि वे पूरी तरह से मोदी के खिलाफ़ मैदान मे हैं।
अभी यह अनिश्चिता खत्म हुई नही है कि आचार्य धर्मेन्द्र मैदान मे कूद पडे हैं। उनका कहना कै कि वे राष्ट्रिय विचारधारारा के साथ हैं। उन्होने इसके लिये नागरिक जागरण मंच भी बनाया है जिसका नारा है-जीता है भारत, जीतेगा भारत!! पत्रकारों के लाख पूछने पर भी उन्होने यह नही बताया कि वो किसके साथ हैं !!!! फ़िर किसका क्या साथ देंगे धर्मेन्द्रजी।
पर उमा भारती पहली थी जिन्होने उनके इस विचार को तोडा। उतार दिये ५३ उम्मीदवार मैदान मे। बाद मे गुलांट मार गई। पर उनके बंदे तो अभी भी मैदान मे अडिग खडे हैं। किसी को मालूम ही नही उमाजी किस खेमे मे हैं। उनके साक्षात्कार तो यह कहते हैं कि वे मोदी की बहन बन उनके साथ है। पर, उनकी पार्टी के उपाध्यक्ष सघंप्रिय गौतम जी कहना है कि वे पूरी तरह से मोदी के खिलाफ़ मैदान मे हैं।
अभी यह अनिश्चिता खत्म हुई नही है कि आचार्य धर्मेन्द्र मैदान मे कूद पडे हैं। उनका कहना कै कि वे राष्ट्रिय विचारधारारा के साथ हैं। उन्होने इसके लिये नागरिक जागरण मंच भी बनाया है जिसका नारा है-जीता है भारत, जीतेगा भारत!! पत्रकारों के लाख पूछने पर भी उन्होने यह नही बताया कि वो किसके साथ हैं !!!! फ़िर किसका क्या साथ देंगे धर्मेन्द्रजी।
मोदी के ये NRG प्रेमी
सुना है कि अमेरीका मे मोदी प्रेमियों ने एक अभियान शुरू किया है। नोट और वोट से मोदी की मदद के लिये। उन्हे मालूम है कि मोदी का नाम आते ही गुजरात के दंगो की बात आयेगी । इसका जवाब उन्होने अमेरीका के अंदाज मे ही तैयार कर लिया है। उनके समर्थक अमेरिका में कह रहे हैं कि जैसे पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के कार्यकाल को केवल उनकी गर्ल फ्रेंड मोनिका लेवंसिकी से सेक्सी रिश्तों की नजर से ही देखना ठीक नहीं होगा, उसी प्रकार मोदी को केवल गुजरात दंगों से ही देखना उचित नहीं होगा।
इन मित्रों का कहना है कि मोदी को भारत को श्क्तीशाली बनाने के लिये जिताना हरूरी है!!!
मोदी की सहायता के लिए बना है 'सपोर्ट गुजरात फोरम । उसने 'एनआरजी' को पकड़ने के लिए टीवी, रेडियो, ई-मेल, एसएमएस आदि साधनों का सहारा लिया है। फोरम ने विदेश मे बसे गुजरातियों से अपील की है कि वह गुजरात में अपने रिश्तेदारों, सहयोगियों और दोस्तों को ई-मेल और टेलिफोन करके 'मोदी भाई' को जिताने के लिए पूरी कोशिश करें। न्यू यॉर्क के एक पॉपुलर रेडियो स्टेशन को सपोर्ट गुजरात ने एक विशेष इन्टरव्यू में कहा है कि मोदी को केवल गुजरात दंगों की नजर से देखना ठीक नहीं होगा। सपोर्ट गुजरात ने इश मौके पर कहा कि क्या पूरी दुनिया में दंगे नहीं होते? पाकिस्तान, फ्रांस, लोस ऐंजिलिस में भी दंगे होते हैं।
विदेश में मोदी के प्रचारक दावा कर रहे हैं कि उन्होंने इतिहास रचा है, वह कर दिखाया है जो पिछले 50 सालों में भारत में नहीं हो पाया। मोदी की दूरदृष्टि और फिलॉसफी रही है- ज्ञान शक्ति, ऊर्जा शक्ति, जल शक्ति, जन शक्ति और रक्षा शक्ति। सपोर्ट गुजरात का दावा है कि अब गुजरात आतंकवाद से मुक्त है जबकि अन्य राज्यों में यह एक बड़ी समस्या है। इंटरव्यू में यह पूछे जाने पर कि गुजरात दंगों के लिए मोदी ही को जिम्मेवार माना जाता है, सपोर्ट गुजरात ने कहा कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में गुजरात से 3 गुना ज्यादा लोग सिख दंगों में मारे गए थे, मगर उसकी कोई बात नहीं करता।
हमे यह जान कर बहुत खुशी हुई की अपने ये गुजराती भाई अमेरिका मे बैठ कर भी गुजरात का कितना ख्याल रखते है। हे मित्रो गुजरात को आप जैसे हितेछुऒं की जरूरत है। आप और मोदी मिलकर गुजरात को दुनिया का नम्बर वन बनायें। आज जब गुजरात को मोदी ने स्वर्ग बना दिया है तो आप इस स्वर्ग का आनन्द लीजिये। यहा आईये और गुजरात को देखिये। मोदीजी की प्रचार सी डी मे तो बहुत देख लिया!!
इन मित्रों का कहना है कि मोदी को भारत को श्क्तीशाली बनाने के लिये जिताना हरूरी है!!!
मोदी की सहायता के लिए बना है 'सपोर्ट गुजरात फोरम । उसने 'एनआरजी' को पकड़ने के लिए टीवी, रेडियो, ई-मेल, एसएमएस आदि साधनों का सहारा लिया है। फोरम ने विदेश मे बसे गुजरातियों से अपील की है कि वह गुजरात में अपने रिश्तेदारों, सहयोगियों और दोस्तों को ई-मेल और टेलिफोन करके 'मोदी भाई' को जिताने के लिए पूरी कोशिश करें। न्यू यॉर्क के एक पॉपुलर रेडियो स्टेशन को सपोर्ट गुजरात ने एक विशेष इन्टरव्यू में कहा है कि मोदी को केवल गुजरात दंगों की नजर से देखना ठीक नहीं होगा। सपोर्ट गुजरात ने इश मौके पर कहा कि क्या पूरी दुनिया में दंगे नहीं होते? पाकिस्तान, फ्रांस, लोस ऐंजिलिस में भी दंगे होते हैं।
विदेश में मोदी के प्रचारक दावा कर रहे हैं कि उन्होंने इतिहास रचा है, वह कर दिखाया है जो पिछले 50 सालों में भारत में नहीं हो पाया। मोदी की दूरदृष्टि और फिलॉसफी रही है- ज्ञान शक्ति, ऊर्जा शक्ति, जल शक्ति, जन शक्ति और रक्षा शक्ति। सपोर्ट गुजरात का दावा है कि अब गुजरात आतंकवाद से मुक्त है जबकि अन्य राज्यों में यह एक बड़ी समस्या है। इंटरव्यू में यह पूछे जाने पर कि गुजरात दंगों के लिए मोदी ही को जिम्मेवार माना जाता है, सपोर्ट गुजरात ने कहा कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में गुजरात से 3 गुना ज्यादा लोग सिख दंगों में मारे गए थे, मगर उसकी कोई बात नहीं करता।
हमे यह जान कर बहुत खुशी हुई की अपने ये गुजराती भाई अमेरिका मे बैठ कर भी गुजरात का कितना ख्याल रखते है। हे मित्रो गुजरात को आप जैसे हितेछुऒं की जरूरत है। आप और मोदी मिलकर गुजरात को दुनिया का नम्बर वन बनायें। आज जब गुजरात को मोदी ने स्वर्ग बना दिया है तो आप इस स्वर्ग का आनन्द लीजिये। यहा आईये और गुजरात को देखिये। मोदीजी की प्रचार सी डी मे तो बहुत देख लिया!!
मोदी का मुखोटे के पीछे का चेहरा
मोदी केवल विकास की हे बात करना चाहते हैं । वे गोधरा या अन्य किसी ऎसे मुद्दे पर चर्चा नही करना चाहते जो अदालत के समक्ष हो। पिछले काफ़ी समय से ये बाते दोहराने वाले मोदी अब जहां भी जाते हैं, सोहराबुद्दिन की मुठभेड की चर्चा जरूर करते हैं । लोगो से यह भी पूछते हैं कि सोहराबुद्दिन का मर्डर नही करता तो क्या करता?
आज जब सुप्रीम कोर्ट मे यह मामला है, गुजरात सरकार यह कह चुकी है कि यह फ़र्जी मुठभेड थी तब मोदी का यह कहना कि सोहराबुद्दिन आतंकवादी था इसलिये उन्होने उसे उडा दिया यह क्या दर्शाता है? उधर गुजरात सरकार का वकील परेशान है कि वह अदालत मे क्या कहे मोदी के इस विधान के बाद?
पर मोदी के इस विधान के बाद पुलिस की गुत्थी सुलझ गई है ? अभी तक पुलिस यह नही जान पाई है कि उसके आला अफ़सरों ने यह फ़र्जी मुठभेड क्यो की थी ? मोदी ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि यह सब उनकी कारस्तानी थी!!! है क्या पुलिस मे उन्हे पकडने की ? इस विधान ने मोदी के विकास के मुखोटे को हटा कर असली कोमी चेहरे को उजागर किया है।
आज जब सुप्रीम कोर्ट मे यह मामला है, गुजरात सरकार यह कह चुकी है कि यह फ़र्जी मुठभेड थी तब मोदी का यह कहना कि सोहराबुद्दिन आतंकवादी था इसलिये उन्होने उसे उडा दिया यह क्या दर्शाता है? उधर गुजरात सरकार का वकील परेशान है कि वह अदालत मे क्या कहे मोदी के इस विधान के बाद?
पर मोदी के इस विधान के बाद पुलिस की गुत्थी सुलझ गई है ? अभी तक पुलिस यह नही जान पाई है कि उसके आला अफ़सरों ने यह फ़र्जी मुठभेड क्यो की थी ? मोदी ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि यह सब उनकी कारस्तानी थी!!! है क्या पुलिस मे उन्हे पकडने की ? इस विधान ने मोदी के विकास के मुखोटे को हटा कर असली कोमी चेहरे को उजागर किया है।
बुरे फ़ंसे विहिप नेता
विश्व हिन्दु परिषद के अंतरराष्ट्रिय अध्यक्ष अशोक सिंहल की हालत खस्ता है । तेजाबी निवेदन करने वाले सिंहल्जी को मालूम नही था कि संतो के बारे मे किया गया उनका बयान उनको कितना भारी पडेगा। उन्होने मोदी का विरोध करने वाले संतो के मान्सिण्घ और जयचंद कहा। इस समाचार का छपना क्या था कि गुजरात मे भूचाल आ गया। संतो ने सिंहल को सबक सिखा देने का एलान कर दिया।
मोदी की पैरवी का यह अंदाज इतनाभारी पडा कि आर एस एस ने उन्हे तत्काल संतो की माफ़ी मांगने का फ़रमान दे डाला। साफ़ है कि गुजरात के साधु संत वैसे ही मोदी के खिलाफ़ मोर्चा खोले बैठे हैं। उधर उमा भारती के चेले भी ५१ बैठको पर मोदीजी के सामने बंदूक ताने बैठे हैं । एसे मे संतो को नारज करना मतलब आग मे घी डालना हैं।
नतीजन अपने अशोकजी को आज गुजराती अखबारों मे बडे बडे विज्ञापन दे माफ़ी मांगनी पडी। उन्होने जयचंद और मानसिंह जैसे शब्दो का प्रयोग किया था। समाचार दो कालम के थे, खुलासा चार कालम का। मूल समाचार की लंबाई १० से.मी और खुलासा ३० से.मी लम्बा। साफ़ है जिन्होने समाचार नही पढा था उन्होने खुलासे से अशोकजी के खतरनाक भाषा प्रयोग के बारे मे जाना!!
उनके इस माफ़ी विज्ञापन का शीर्षक है-संतो के अपमान के बजाय मै मरना अधिक पसंद करूंगा। उन्होने यह भी बताया कि वे संत सेवक परिवार से हैं । मैं संतो के अपमान की बात स्वप्न भी नही सोच सकता।
अशोकजी ये तो बताईये की आपको इतना बडा विज्ञापन देने की जरूरत क्यो पडी। अगर आप की बात मे इतना ही दम था तो संत आपके मौखिक खुलासे से ही क्यो नही मान गये। और मजेदार तो यह है कि उन्होने खुद को संतो का रजकण कहा है।
मोदी की पैरवी का यह अंदाज इतनाभारी पडा कि आर एस एस ने उन्हे तत्काल संतो की माफ़ी मांगने का फ़रमान दे डाला। साफ़ है कि गुजरात के साधु संत वैसे ही मोदी के खिलाफ़ मोर्चा खोले बैठे हैं। उधर उमा भारती के चेले भी ५१ बैठको पर मोदीजी के सामने बंदूक ताने बैठे हैं । एसे मे संतो को नारज करना मतलब आग मे घी डालना हैं।
नतीजन अपने अशोकजी को आज गुजराती अखबारों मे बडे बडे विज्ञापन दे माफ़ी मांगनी पडी। उन्होने जयचंद और मानसिंह जैसे शब्दो का प्रयोग किया था। समाचार दो कालम के थे, खुलासा चार कालम का। मूल समाचार की लंबाई १० से.मी और खुलासा ३० से.मी लम्बा। साफ़ है जिन्होने समाचार नही पढा था उन्होने खुलासे से अशोकजी के खतरनाक भाषा प्रयोग के बारे मे जाना!!
उनके इस माफ़ी विज्ञापन का शीर्षक है-संतो के अपमान के बजाय मै मरना अधिक पसंद करूंगा। उन्होने यह भी बताया कि वे संत सेवक परिवार से हैं । मैं संतो के अपमान की बात स्वप्न भी नही सोच सकता।
अशोकजी ये तो बताईये की आपको इतना बडा विज्ञापन देने की जरूरत क्यो पडी। अगर आप की बात मे इतना ही दम था तो संत आपके मौखिक खुलासे से ही क्यो नही मान गये। और मजेदार तो यह है कि उन्होने खुद को संतो का रजकण कहा है।
Subscribe to:
Posts (Atom)