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Friday, June 26, 2015

दीखते मोदीजी, बोलते मोदीजी

अपने नरेन्द्र मोदीजी भारत के पहले यत्र तत्र सर्वत्र प्रधानमंत्री हैं। अभी तक सरकार में सब कुछ राष्ट्रपति के नाम में होता है। वह भी केवल सरकारी आदेशों में। वह अब भी होता है।
पर अपने मोदीजी न केवल विभिन्न क्षेत्रों में छपे हुए होते हैं, वे दिखलाई भी देते हैं। पिछले हफ्ते का योग दिवस इसका एक बेहतरीन उदाहरण है।
पूरे दिन मोदीजी टी वी पर छाए रहे। क्योंकि कार्यक्रम मोदीजी का था इसलिए राष्ट्रपति और उप- राष्ट्रपति को न्यौता नहीं। लग रहा था कि मोदीजी नहीं होते तो योग का क्या होता ?
मोदीजी ने स्वंय कुछ सरल पोज दे, रशियो के पुतिनजी को बता दिया कि वे केवल योग का प्रचार नहीं करते, स्वंय योग भी करते हैं। आजकल मोदीजी प्रेरणास्वरूप बनते जा रहे हैं। सभी जगह यही छवि छा रही है उनकी।
सुप्रीम कोर्ट के सरकारी विज्ञापन में केवल प्रधानमंत्री की फोटो वाले फैसले के बाद तो अपने मोदीजी को विज्ञापनों में खुला मैदान मिल गया है। अब कोई मंत्री, मुख्यमंत्री को फोटो नहीं।
मोदी हितेच्छु काफी सृजनशील हैं। आज तक प्रेस इंर्फोमेशन ब्यूरो की वेबसाइट पर केवल समाचार के शीर्षक वाला होमपेज होता था। मोदीजी के आने के बाद इस वेबसाइट पर मोदीजी की फोटो मुख्य होती है, समाचार बाद में दिखते हैं।
अभी कुछ दिन पहले बीएसएनएल से एक एसएमएस मिला। उसका सार था कि प्रधानमंत्री की प्रेरणा से बीएसएनएल 15 जून से भारत में फ्री रोमिंग शूरू करने जा रहा है।
आज सुबह एक फोन आया। उस पर प्रधानमंत्री वाला संदेश रिकार्डड मैसेज के रूप में सुनाई दिया।
मान गये जिय किसी अधिकारी ने यह आइडिया लगाया है उसकी सोच को दाद देनी पड़ेगी। उसने मोदीजी के प्रशंसाप्रिय दिमाग का सही अध्ययन किया है।
काश अधिकारी बीएसएनएल के कामकाज को सुधारने में यह दिमाग लगाते तो लोगों का कितना भला होता। पर उससे जरूरी नहीं कि मोदीजी खुश होते।
देखा मोदीजी यत्र तत्र सर्वत्र । दीखते मोदीजी, बोलते मोदीजी।
   



Friday, June 19, 2015

पप्पू का जन्मदिन

आज राहुल बाबा का जन्मदिन था। हमें मालूम नहीं था, लोगों को भी मालूम नहीं था। पर जिस तरह से कांग्रेस ने राहुलजीका जन्मदिन मनाया पूरे देश को मालूम पड़ गया कि राहुल बाबा का जन्मदिन है।
पूरे 45 साल के हो गए हैं अपने राहुलजी। पर पार्टी के नेता यह स्वीकार कर रहे हैं कि पहली बार राहुलजी का जन्मदिन मना रहे हैं।
ऐसा क्या हो गया कि राहुलजी का जन्मदिन मनाया जा रहा है। ये वही राहुल है, कांग्रेस के उपाध्यक्ष। अध्यक्ष बनने की बात महिनों से चल रही है। वो अध्यक्ष बने तब ठीक। आज तो वो उपाध्यक्ष ही हैं।
उनका जन्मदिन कोई छोटी बात नहीं है। अपने विश्वाटन वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी ने देशाटन कर रहे राहुलजी को फोन कर जन्मदिन की बधाई दी। उनका यह जन्मदिन पिछले वर्ष भी था। जहां तक हमारी जानकारी है मोदीजी उस समय राहुलज को मोदीजी के लोगों के  प्रिय पप्पूके रूप में जानते थे। पप्पू को जन्मदिन की क्या बधाई?
वैसे भी लोगों का कहना है कि पिछले दस वर्ष अपने राहुल भैय्या ने उनका जन्मदिन विदेश में ही मनाया है। साफ है कि केवल उनके मित्र ही उनका जन्मदिन मनाते थे। आज देश मना रहा है!
आजकल हमारे राहुलजी देशाटन में लगे हुए हैं। गांव बांव की धूल चख रहे हैं। साफ है जन्मदिन भी भारत में मना रहे हैं। अभी तक हमें यह मालूम नहीं पड़ा कि वे देशी लड्डू खाकर जन्मदिन मना रहे हैं या विदेशी केक काट कर।
हां कांग्रेस वाले जोर जोर से उनका तरह तरह के कार्यक्रमों से जन्मदिन मना रहे हैं। गुजरात कांग्रेस ने लेपटोप वाले राहुलजी के आईटी क्रांति वाले पिता राजीवजी को याद कर ई-वोटिंग जागृति अभियान किया। पार्टी नेताओं को इस क्षेत्र में राहुलजी का कोई ठोस योगदान नहीं मिला तो प्रेजेन्टेशन राजीवजी से शुरू किया।
पुडुचेरी में किसी ने प्रर्थन की तो किसी ने लोगों को भोजन कराया। दिल्ली में कांग्रेसी नेता ढोल नगारे बजते हुए देखे गए।
हमारे एक विद्वान मित्र ने हमारी सोच को एक नई दृष्टि दी। साथ ही एक प्रश्न भी। उन्होंने कहा कि राहुलजी का जन्मदिन इसलिए मनाया गया क्योंकि वे पिछले कुछ महिनों में राहुल बाबा उर्फ पप्पू से राहुल गांधी बन गए हैं। विपसन्ना ध्यान के बाद के पप्पू के नए अवतार धारदार नेता राहुल गांधी के जन्मदिन का उत्सव


सवाल यह है कि राहुल कि उम्र कितनी 45 साल या 4.5 महिने ! !

Thursday, June 18, 2015

मोदीजी की योगा एक्सप्रेस

मोदीजी ने प्रधानमंत्री बनने के कुछ महिनों में ही वैश्विक स्तर पर योग का लोहा मनवा लिया और इस रविवार 21 जून को वो पूरी दुनिया से योगासन करवा रहे हैं।
योगासन कार्यक्रमों और योगा के प्रचार प्रसार के लिए लोगों, संस्थाओं और सरकारी मंत्रालयों में गला काट स्पर्धा लगी हुई है। आए दिन किसी नए कार्यक्रम की घोषणा अखबारों में जगह बनाने के लिए अन्य समाचारों को हिलाती हुई दिखलाई देती है।
अपना रेल मंत्रालय कैसे पीछे रहता। घोषणा कर दी कि अब, तत्काल प्रभाव से अहमदाबाद-हरिद्वार के बीच चलने वाला हरिद्वार मेल योगा एक्सप्रेस कहलाएगा। देखा जाए तो यह पुराने दिल्ली मेल का तीसरा अवतार है।
यह गाड़ी शुरु हुई थी अहमदाबाद-दिल्ली के बीच दिल्ली मेल के नाम से बाद में गाड़ी बढ़ी हरिद्वार तक और नाम हो गया हरिद्वार मेल। पर तीसरे अवतार योगा एक्सप्रेस की तुक हमें समझ नहीं आई।
अरे भई अगर हम योगा के मूल भारतीय नाम योग के संदर्भ में देखें तो हर गाड़ी व्यक्तियों और शहरों को जोड़ती है। देखा शब्दों का कमाल!!
और अगर योगा’ की बात करें तो अज हमारी गाडियों की जो हालत है वह आम आदमी को डब्बे में घुसाने और उसमें जगह बनाने के लिए तरह तरह के आसन करने के लिए मजबूर कर देती है। हमारे रेलमंत्री का कहना है कि इस नामकरण से योगा का प्रचार होगा।
यह कोई जयपुर-बान्द्रा के डब्बों पर लगा वंडर सीमेंट का विज्ञापन थोड़े ही है, जो योग का प्रचार प्रसार करेगा। हरिद्वार-मेल ही क्यों?
हरिद्वार का योग से क्या सम्बन्ध? हां एक बात है कि वहां बाबा रामदेव उनके पतंजलि योग विद्यापीठ के एकड़ों जमीन में फैले प्रागण में अपने पेट को गाड़ी की तरह छुक-छुक चला अच्छों अच्छों के छक्के छुड़ा देते हैं।
योगा एक्सप्रेस की घोषणा सुनते ही हमारे दिमाग में दो दिन पहले की गुजरात के शिक्षा मंत्री भूपेन्द्रसिंह की बात याद आई। जब उनसे एक पत्रकार ने पूछा कि योगा डे का प्रचार हो रहा है पर पतंजलि का क्या? वे तपाक से बोले थे मैंने पतंजलि योगविद्यापीठ का जिक्र किया है। (यह हमारे भूपेन्द्रसिंह आसन वाले जीरो कॉलम में हैं)
आज इन्स्टेन्ट फूड की इस पीढ़ी के लिए तो योग यानि कि रामदेव और पतंजलि यानि पतंजलि योग विद्यापीठ (ऋषि पतंजलि नहीं)। रेल मंत्री को भी मालूम है कि मोदीजी के दोनों हाथ बाबा रामदेव पर है और दिल्ली में रहकर भी मोदीजी के लिए गुजरात ही सब कुछ है, भले वे विश्वाटन करते हों।
अब हरिद्वार में मोदीजी के गुजरात और मोदीजी के रामदेव को जोड़ता है तो मंत्रीजी ने एक गाड़ी से मोदी और रामदेव दोनों को खुश रखने के लिए दिल्ली मेल का तीसरा अवतार योगा एक्सप्रेस रेल लाईन पर चला दिया। रेल मंत्रालय में आसनस्थ रहना है या नहीं!!

Friday, May 1, 2015

गुजरात सरकार की हिन्दी की बिन्दी

अपनी गुजरात सरकार अनोखी है। मोदीजी द्वारा शुरू किए गए और अपनी आनन्दीबहन द्वारा चलाए जा रहे गुजरात मॉडल की धूम मची हुई है मोदीजी के हिन्दुस्तान में। यह बात अलग है कि गुजरात मॉडल पर किताबें लिखी जा रही हैं, पर कोई यह नहीं बता सकता कि यह मॉडल क्या बला है।
अपने राहुल बाबा की कांग्रेस वाले चीख चीख कर कहते हैं कि राज्य को पैसे वाले दोस्तों को बेच देना ही गुजरात मॉडल है। पर उनका विश्वास कौन करे?
एक बात तो है। अपने मोदीजी हिन्दी में भाषण देते देते गांधीनगर से 7 आर सी आर पहुंच गए है। हिन्दी की बदौलत उनकी यह प्रगति देख दिल्ली के कुछ बड़े बाबुओं ने तो सरकारी कामकाज में  हिन्दी का फतवा भी जारी करवा दिया था। पर जैसा कि मोदीजी की सरकार में आम तौर पर हो रहा है, इस मुद्दे पर सरकार गुलाट मार गई। अब तो कोई इस पर कोई चर्चा भी नहीं करता!
दिल्ली और गुजरात में आजकल एक नई तरह की जुगलबंदी शुरू हो गई है। अधिकतर विदेश के दौरे पर रहने वाले अपने प्रधान मंत्रीजी को गुजरात के बिना नहीं चलता। दिल्ली में गुजरात मॉडल के साथ साथ गुजरात के आई ए एस चर्चा में हैं। अपने मोदीजी ने पी एम ओ को विशुद्ध गुजराती बना दिया है। खानसामा से खास अफसरान सभी गुजरात के!!
इधर गुजरात सरकार मोदीजी के गुण गाते नहीं थकती। भले मोदीजी दिल्ली में हैं, गुजरात सरकार के विज्ञापनों में मोदीजी की तस्वीर ध्रुव तारे की तरह अटल स्थान ले रही है। है न जुगलबन्दी।
जब गुजरात सरकार ने देखा कि हिन्दी भाषणों तक ही ठीक है, तो सरकार ने हिन्दी को बिन्दी बनाने का कार्यक्रम शुरू कर दिया। सूचना विभाग मुख्यमंत्री के कुछ भाषणों की हिन्दी प्रेस विज्ञप्ति जारी करता है। इसका मापदंड हमें आज तक समझ नहीं आया है।
इससे भी बड़ी बात तो यह है कि अब सरकारी विज्ञापन अधिकतर कुछ गुजराती अखबारों तक ही सीमित कर दिए गए हैं । जब हमने एक आला अधिकारी से इस बारे में चर्चा कि तो वे तपाक से बोले सरकार क्या करे, विज्ञापन दाता विभाग केवल गुजराती के कुछ चुने हुए अखबारों में ही विज्ञापन देना चाहते हैं। तो भैय्ये विज्ञप्ति सभी अखबारों को क्यों भेजते हो?
खैर हम बात हिन्दी की बिन्दी की कर रहे थे। सरकार के अधिकतर विज्ञापन गुजराती में होते हैं भले फिर ये विज्ञापन अंग्रेजी या हिन्दी अखबारों में छपने के लिए हों। जय जय गरवी गुजरात।
इस बार गरवी गुजरात के स्थापना दिन का विज्ञापन हिन्दी में आया। पढ़ने के बाद हमे हमारे हिन्दी ज्ञान पर शंका हो गई। विज्ञापन कहता है

विकास में सभी की हिस्सेदारी हैं

गुजरात की आज और कल उज्ज्वल है

सभी गुजरातीयों को राज्यस्तरिय समारोह तापी जिले में

पहेली समझ ऊपर के वाक्यों मे गलतियां खोज अपना हिन्दी ज्ञान जांचे
है न गुजरात सरकार का हिन्दी को बिन्दी बनाओ अभियान

Monday, February 24, 2014

गुजरात के विपक्षी नेताओं का नमो हृदय परिवर्तन दौर

आजकल गुजरात की राजनीति में एक नया दौर आया है। नमो दौर। विपक्षी नेता इसमे बहते बहते कमल के सागर में आ रहे हैं । जो मोदी को राजनीति का भाई कह अलग चौका लगा बैठे थे वे अब “अपने हृदय” की बात सुन नमो के पास आ रहे हैं।

गोरधनभाई की कृष्ण लीला
हर सांस में मोदी को कोसने वाले अपने गोरधनभाई ने आज अपनी कृष्ण लीला दिखलाई। वे अपने पूरे दल गुजरात परिवर्तन पार्टी के साथ भाजपा में आ गये। हकीकत में तो गोररधनभाई और उनके साथी भाई वापिस उनकी मातृ संस्था भाजपा में वापिस आ गए ।
गोरधन भाई काफी चतुर और वाक पुट वाले व्यक्ति हैं। हर सवाल का जवाब तैयार है। बोले अपने गुजरात के मोदीजी देश के प्रधानमंत्री बन रहे है यह बड़ी बात है। बाकी सब कुछ गौण और फिर उन्होने मीडिया को बताया कि यह किस प्रकार राष्ट्र हित की बात है।
मोदीजी के सामने भ्रष्टाचार के उनके आरोपों को जब पत्रकार मित्रों ने याद दिलाया तब तपाक से जवाब आया मोदीजी ने इस मुद्दे पर जांच बैठा दी है और जो भी बाहर आएगा वह सत्य होगा। बोले परिवर्तन पार्टी के विलीनीकरण के लिए सब तैयार हैं।
इस पार्टी के संस्थापक केशुभाई जिन्होने हाल ही में नादुरूस्त तबियत को आगे रख इस्तीफा आगे रख दिया था वो भी तैयार हैं। देखा जाए तो यह तो उनके इस्तीफे से ही साफ था कि वे विलीनीकरण को हरी झंडी दे रहे थे खुद को अलग रख कर। सब कुछ गोरधनभाई सम्भालें।
केशुभाई के साथ यही सबसे बड़ी समस्या है। कभी आगे से वार करने या लीडरी करने में वे मानते ही नहीं है। इसका यह परिणाम रहा कि उनके भाजपा में रहते हुए ही उनके अधिकतर साथी मोदीजी के चौके में दावत का मजा लेने में लग गए। और जब उन्होने भाजपा छोड़ी तो वे अकेले ही थे।

एक रु के भी नहीं हैं सुरेश महेताजी
रही बात अपने पूर्व मुख्यमंत्री सुरेश महेताजी की। उन्होने इस विलीनीकरण का जम कर विरोध किया है। गोरधनभाई से जब इस मुद्दे पर प्रश्न किया तो बड़ी बेबाकी से बोले, सुरेशभाई बड़े अच्छे व्यक्ति हैं। पर उन्होनें इस परिवर्तन पार्टी में एक रु का चंदा भी नहीं दिया है। लो सुरेशभाई देखो आपकी क्या हैसियत है। एक रु के भी नहीं हैं आप।
आज अपने दो कांग्रेसी भाई भी मोदीजी के कमल मैदान में उतरने के लिए तैयार हो गए। इन दोनो विधायकों ने आज विधान सभा अध्यक्ष वजुभाई वाला को इस्तीफा दे दिया। पहले तो विधायक प्रदेश अध्यक्ष या फिर विधायक दल के नेता को इस्तीफा दे थोड़ा बहुत रूठने मनाने की जगह भी रखते थे। अब तो उनके इस्तीफे से ही प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल के नेता को मालूम पड़ता है कि बंदा गायब।
इनमे एक थे अपने छबील पटेल। पूर्व मुख्यमंत्री सुरेश महेता को उनकी पिच कच्छ की मांडवी में हरा विधान सभा में एन्ट्री मारी थी उन्होने। और इस बार कच्छ के ही अबडासा से विधान सभा में आए। कच्छ के मशहूर हरे खजूर को देश में लोकप्रिय बनाने वाले अपने छबीलभाई को मालूम नहीं कि कमल में कैसे खजूर दिखे कि वो दौड़े दौड़े नमो प्रवाह में कूद गए।
भाजपा में हजूरिया- खजूरिया युद्ध कराने वाले उनके गुरू शंकरसिंहजी ,जो अब कांग्रेस विधायक दल के नेता हैं , उन्हे सोनियाजी के राजनीतिक सलाहकार को जवाब देना भारी पड़ा कि छबील कैसे कांग्रेस की आबरू लील कर चला गया!

प्रभु वसावा, कांग्रेस का सूरत जिला के मांडवी का विधायक, दोपहर को दौड़ कर अध्यक्ष के पास गया और इस्तीफा दे आया। पश्चिम में छबील और दक्षिण में प्रभुजी, सब नमो नमो।

Monday, February 17, 2014

मोदीजी के कौशल्य रथ

चुनावी मौसम यानि कि गुजरात में रथ का मौसम। हालांकि भाजपा की रथ प्रथा को अपने आडवाणीजी ने शुरू किया था, अब तो यह उनके शिष्य नरेन्द्र मोदीजी का ट्रेड मार्क है।
अभी कुछ दिन पहले अम्बाजी जाना हुआ। जाना क्या हुआ, अपने मोदीजी के सूचना विभाग के अधिकारी 51 शक्तिपीठ की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए ले गए थे। जब वहां पहुंचे उस समय इस तीर्थनगरी में एक लम्बा जुलूस निकल रहा था।
वहां रथ थे। उन पर यदि कोई वस्तु किसी की भी नजर खींचती थी तो वह थी मोदीजी की बड़ी बड़ी तस्वीरें। वैसे तो पूरे रस्ते हर दो पांच किमी के अंतर पर 51 शक्तिपीठ के विज्ञापन बोर्ड में से मोदीजी झांकते हुए दिख जाते थे।
किसी के भी दिमाग में यह सवाल उठ सकता है कि यह किस का विज्ञापन है? मोदीजी का या शक्तिपीठ स्थल का? खैर हम गुजरात में रहने वालों के दिमाग में यह कीड़ा अब नहीं कुलबुलाता। कारण? यह तो रोज की बात हो गई है।
आज सरकारी प्रवक्ता मंत्री सौरभ पटेलजी पत्रकारों से मिले। उन्होने बताया कि किस प्रकार अपने मोदीजी गुजरात के युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए पांचमुखी कार्यक्रम लाए हैं। इसका उद्देश्य है गुजरात के युवा के कौशल का इस प्रकार से विकास जिससे उसे रोजगारी मिल सके।
उन्होने कहा कि उद्योग उन्हे उसकी जरूरत के अनुसार ट्रेनिंग देगा। सरकार इस प्रशिक्षण का खर्च उठाएगी। उद्योग का, उद्योग के द्वारा और उद्योग के लिए। सब कुछ उद्योगमय! सौरभजी ने कहा कि छोटे छोटे गांव जहां आई टी आई नहीं हैं वहां कौशल्य रथ जाएगा।
पत्रकारों ने पूछा कि कितने रथ, कैसे रथ? वहां उपस्थित अधिकारी सोनल मिश्रा बोली फिलहाल तो चार रथों का आयोजन किया गया है। अधिकतर के दिमाग में एक प्रश्न था मोबाईल ट्रेनिंग सेंटर क्यो नहीं? रथ क्यों? पर किसी ने पूछा नहीं। कहीं सौरभभाई थैंक्यू थैंक्यू न बोल दें।

सोनलजी ने कहा कि यह चार क्षेत्रों में लगाया जाएगा और उसकी सफलता के आधार पर अन्य क्षेत्रों के बारे में सोचा जाएगा! कुछ भी हो। किसी को एक बात पूछने की जरूरत ही महसूस नहीं हुई। क्या इस रथ पर मोदी का फोटो होगा? सभी को यह लगा होगा कि फोटो तो रथ बनने से पहले ही लग जाएगा।

Friday, September 7, 2012

आडवाणी के रथ पर मोदीजी की विवेकानन्द यात्रा

भाजपा प्रवक्ता विजय रुपाणी काफी समय बाद आज प्रेस के समक्ष प्रकट हुए. ऐजंडा था मोदीजी की विवेकानन्द यात्रा के बारे में जानकारी देना. उन्होने बताया कि विवेकानन्दजी की १५०वीं जन्म जयन्ती के अवसर पर मोदीजी की यात्रा के साथ साथ १५० उप-यात्राएं भी निकलेंगीं.
भाजपा और उसके नेताओं का हर काम एक रणनीति  होता है. यात्रा ११ सितम्बर को शुरु होगी. यह वो दिन है जब विवेकानन्द ने अमरीका मे उनका ऐतिहासिक भाषण दिया था और हिन्दुत्व को गुंजा दिया था. उस जमाने में अमरीका जाने मे वीजा जैसा प्रोब्लम नही था. इसलिये विवेकानन्द चले गये थे.
खैर, अपने तकनीक चलित (Technology Driven) मोदीजी इसी महीने वीडियो तरंगो पर बैठ अमरीका में भारतीयों के एक कार्यक्रम को सम्बोधित कर आये हैं. अगर आयोजक यह कार्यक्रम ११ सितम्बर को रखते तो यह कैसा संयोग होता . एक नरेन्द्र (विवेकानन्द का सांसारिक नाम) शारीरिक रूप मे १५० वर्ष पूर्व अमरीका गया और भारत और उसकी संस्कृति का डंका बजा आया. आज अपना नरेन्द्र मोदी वीडियो तरंगो पर बैठ अमरीका में भारतीयों के एक कार्यक्रम को सम्बोधित करता. कोई बात नहीं , सितम्बर का महीना तो है.
यात्रा , रूपाणी ने बताया, बहुचराजी से शुरू होगी. यह देवी का स्थान है. पर इसके चयन का कारण अलग है. रूपाणीजी ने कहा कि यहां मारूति प्लांट डाल रही है. देखा बहुचराजी हिन्दुत्व और विकास का कैसा अनोखा प्रतीक बन गया है.
इस कार्यक्रम को भगवा झंडा दिखलायेंगे राजनाथ सिंग और मोदीजी के मित्र अरुण जेटली. आडवाणीजी नहीं आ रहें हैं. शायद एक महिने चलने वाली यात्रा मे किसी दिन आयें.
ज्यादह अटकलों की जरूरत नही है. हाल ही में गांधीनगर में शतरंज के एक महा कार्यक्रम में, आडवाणीजी न केवल मोदीजी के साथ बैठे, उन्होने मोदीजी की शतरंज योग्यता की भी काफी तारीफ की.
आडवाणीजी ने मोदीजी को आशीर्वाद दिया या नही, यह मालूम नहीं है. पर रूपाणीजी की घोषणा के अनुसार आडवाणीजी ने मोदीजी को यात्रा के लिये अपना रथ दिया है.
मोदीजी हर हफ्ते तीन चार दिन इस रथ पर बैठ विवेकानन्द युवा विकास यात्रा निकालेंगे. एक प्रश्न के उत्तर में रूपाणीजी ने कहा कि विवेकानन्द युवा और विकास के प्रतीक थे और मोदीजी भी उनके उन्ही गुणों को गुजरात में इस यात्रा द्वारा प्रस्थापित करेंगे.
देखें आडवाणीजी का रथ मोदीजी की दिल्ली यात्रा में उन्हें कहां तक ले जाता है.
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