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Saturday, July 28, 2007

दो बार इस्तीफ़ा देने के बाद भी बने हुए हैं मंत्री अपने भाई..

राजनीति में इस्तीफ़ा बडा ही सशक्त शस्त्र है। बस इस्तीफ़े के धमकी से ही काम चल जाता है। लोग देते नही है। मालूम नहीं कब स्वीकार हो जाए।

पर अपने भाई तो भाई हैं। उनके दोस्त और दुश्मन सभी उन्हे भाई कहते हैं वैसे उन्हे भी यह सम्बोधन काफ़ी प्रिय है। वैसे तो उनके दो दो चुनाव जीतने के बावजूद भी वो मुम्बई पुलिस की भाई की लिस्ट में ही हैं।

अपने भाई है गुजरात के पुरषोत्तम सोलंकी। मोदीजी के मंत्रीमंडल में मछली मंत्री! सरकारी गनमैन हो या न हो भाई के अपनी सिक्योरिटी तो हमेंशा साथ रहती है।

उन्होने उनकी जाति की दो युवतियों के बलात्कार के विरोध में दो बार इस्तीफ़ा दे दिया। कार और बंगले का भी उपयोग करना बंद कर दिया। गांधीनगर में सचिवालय की तरफ़ मुंह करना भी बंद कर दिया।

एका एक कल सभी समाचार पत्रों में उन्होने एक प्रेसनोट भेज डाली। पाकिस्तान की जेलो से भारतीय मछुआरों को छुडवाने के लिये । सभी पत्रकार आश्चर्यचकित! कई मित्रो ने फ़ोन कर डाले। पूछा भाई ये क्या?

अपने भाई भी कम थोडे है। बोले हमने इस्तीफ़ा दिया यह एक हकीकत । पर साथ ही यह भी एक हकीकत है कि मुख्यमंत्री नरेन्द्रभाई ने अभी तक स्वीकार नही किया है! और मजबूरन में मंत्री हूं !!

Tuesday, June 5, 2007

बस नरेंदर भाई ही भाजपाई

अपने नरेंदर भाई तो नरेंदर भाई हैं। उनकी टक्कर में कौन आ सकता है। देखो खेलते खेलते गुजरात के इतिहास में आंकडो में खुद का नाम दर्ज करा दिया। हेई कोई माइ का लाल जव इतने दिनों तक मुख्यमंत्री का कांटो का ताज पहन पाया है? अपने नरेंदर भाई ने पहरा है , वह भी खुद के लिए नही। गुजरात की पांच करोड़ जनता के लिए । भाई उनके आगे पीछे तो कोई है नही। सारी दुनिया उनकी और वो सारी दुनिया के।

इसीलिये तो वो जव चाहे वो करे । भैये वो तो कानून हैं। ये हम नही कहते उनके चमचे कहते हैं। अब देखो उनके एक खास अधिकारी का क्या कहना है। इन सज्जन का कहना है की अपने नरेंदर भैया पहले भगवा मुख्यमंत्री हैं जव कुर्सी पर इतने टिके हैं। सबसे ज्यादा चिपके रहने का रेकॉर्ड बनाया है अपने नरेंदर भाई ने। ये सब तो सही पर अपने और भगवा मुख्यमंत्रियों का क्या?

अपने प्वाइंट ऑफ़ आर्डर वाले सुरेशभाई का क्या। भले वो आर एस एस की चड्डी वाले ना हों , भाजपाई तो थे। आज भी अपने पत्रकार भाई लोग उन्हें प्वाइंट आफ आर्डर उठाने के लिए याद करते हैं। कुछ भी हो ये भी एक खासियत तो थी।केसुभाई का क्या? भले ही वो वक्त पर पलती मार जाते हैं, पर वो हैं तो भाजपाई। अरे केसुभाई हैं। यह भारत है। मेरा देश है। कृष्ण का देश है। यहाँ हर विचार, हर काम का दिव्य आधार है। वह फिर झूंठ बोलना हो या फिर रण छोड़ भाग जना हो । कुछ भी हो । भाजपाई तो थे ही।

पर इस खास बन्दे ने तो इन्हें ग़ैर कांग्रेसी करार कर दिया। अब भाजपाई बचा कौन? बचेगा कौन? अपने नरेंदर भाई और कौन११ अरे भाई यहाँ अपने नरेंदर भाई का ही राज चलता है। किसीकी मजाल है की प्रेस वालों से बात करे। पूंछो अपने सनसनी सम्राट अशोक भट्ट से। बात बात पर प्रेस कांफ्रेंस बुलाने वाले अपने भट्ट जीं आजकल पत्रकारों के आने के वक्त अपने केबिन में मीटिंग शीटिंग का चक्कर शुरू कर देतें हैं बहार लाल बत्ती लगा कर। आखिरकार स्वास्थ्य मंत्री जीं को उनके राजनीतिक स्वास्थ्य की चिन्ता पहले करनी होगी। फेंक दिया था कानून विभाग में । बड़ी मुश्किल से वापिस अच्छा विभाग मिला है।

तो भैये मानते हो या नही किबस एक ही भाजपाई मुख्यमंत्री हुआ है गुजरात में। वो है पांच करोड़ गुजरातियों का एक मात्र नरेंदर भाई । विधान सभा चुनाव तक तो यही सच है , आगे की राम जाने ! ! !

पांच करोड़ का चुनावी चक्कर

कुछ नम्बर हिट हो जाते हैं सही समझे , लकी नम्बर । हमारे नरेंदर भाई के लिए पांच करोड़ शायद ऐसा ही लकी नम्बर है । तभी तो जहाँ जाते हैं पांच करोड़ की बात करतें हैं। उनका सब कुछ पांच करोड़ के लिए ही हैं। वे सब काम पांच करोड़ जनता के लिए करते हैं।

अपने कांग्रेसी भाईयों ने भी करोड़ों की बात करनी शुरू कर दीं है। हर मीटिंग मे वो भी अब पांच करोड़ की बात करते हैं । नरेंदर भाई पांच करोड़ जनता बोलते हैं तो अपने कांग्रेसी नेता कहते हैं कि नरेंदर भाई पांच करोड़ जनता के नहीं पर पांच करोड़ पतियों के हैं। अब तो हर सभा में कांग्रेसी नरेंदर भाई के पांच करोड़पतियों की ही बात करतें हैं।

कांग्रेसी कहते हैं कि भाई नरेंदर पांच करोड़पतियों को प्लेन मे बैठा घूमते रहते हैं। अपने खजुराहो वाले शंकरसिंह वाघेला यह कहते नही थकते की अरे करोड़पतियों तुम्हारी खैर नही। अब हमारी सत्ता आने वाली हैं । इतने भी केसरी मत बनो कि हमारे पास आना मुश्किल हो जाये।

यह बात अलग हैं कि जिन करोड़पतियों की बात वाघेला करते हैं वो वाघेला की प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकारों को खाना परोसते नजर आतें हैं ! एक दिन हम वाघेला जीं से पूछ बैठे , भैये ये पांच करोड़पति हैं कौन। आप बार बार पांच करोड़पति बोलते हैं पर नाम नही बतलाते हैं । वो तपाक से बोले सभी जानते हैं । हमने जब बार बार पूछा, तो बोले अरे ये सब छोडो और बताओ की क्या चल रहा है। एक करोड़पति मिल गए। हमने पूछा कि ये करोड़पति का क्या चक्कर है। बोले, पूछो वाघेलाजी से । हमने कहा कि वो तो कुछ बोलते ही नही। तब फिर क्यों चक्कर में पड़ते हो जिस दिन वाघेला जीं नाम बता दें , हम से मिल लेना । साफ था की वाघेलाजी नाम नही बताएँगे । बोलेंगे जरूर।

गुजरात में यह चुनाव का साल हैं और मोदीजी और वाघेलाजी दोनो को चुनाव लड़ना है और दोनो को ही वोट और नोट दोनो ही चाहिऐ । पांच करोड़ जनता के वोट और पांच करोड्पतियो के नोट।

ये है पांच करोड़ का चुनावी चक्कर।

Monday, May 28, 2007

भाई का सत्ता मे रहने का रिकार्ड

कोई कुछ भी कहे, एक बात तो माननी पडेगी । अपने नरेंद्रभाई भले ही किसी बात मे नंबर वन हों या ना हों एक बात में तो वो नंबर वन हैं । गुजरात के अभी तक के चौदह मुख्यामंत्रिओं मे वो पहले मुख्यमंत्री हैं जो सत्ता में इतने टिके हैं। उन्होनें सत्ता में टिके रहने का हितेंद्र देसाई और मधाव्सिंह सोलंकी का रिकार्ड तोड़ डाला है।
अपने नरेंद्रभाई की तोड़ डालने की कला कौन नही जानता । पूछो अपने केशुभाई से , अपने सुरेशभाई से पुलिसवाले अपने जसपाल भैया से। वड़ोदरा में एक तरफ वो बैठे हैं तो दूसरी तरफ अपने नयी नयी विद्रोही आत्मा नलिन भट्ट । किसी जमाने में इन सबकी तूती बोलती थी । और अब हाई कमांड को चिट्ठियाँ लिखने के अलावा और क्या कर सकते हैं ये भाजपा के दिग्गज।
खैर अपन बात कर रहे थे अपने गुजरात के पाँच करोड़ के अपने भाई नरेंद्रभाई की। कई बार सोचता हूँ की यह पांच करोड़ पांच करोड़ ही क्यों हैं। नरेंद्रभाई की पिन पाँच करोड़ पर ही क्यों अटकी हुई है। क्या वो गिनती भूल गएँ हैं , या फिर उनकी सरकार नें जनसँख्या नियंत्रण का ऐसा फार्मूला दूंद लिया है जिससे गुजरात की जनसँख्या बस पाँच करोड़ पर अटक कर रह गई है। जितने पैदा होते हैं उतने ही मर जातें हैं ! कुछ भी हों , अपने नरेन्द्र भाई तो नरेन्द्र भाई हैं । वो कुछ भी कर सकते हैं ।
खैर अपन बात कर रहे थे अपने नरेंद्रभाई के मुख्यमंत्री कार्यालय में रिकार्ड दिन । २१ मई की नरेंद्रभाई ने सभी के रिकार्ड तोड़ दिए। २०६२ दिन पूरे कर लिए मुख्यमंत्री कार्यालय में। १० जून को उनका सम्मान होगा अहमदाबाद में। साफ हैं अपने भाजपाई बताएँगे की अपने नरेंद्रभाई ने क्या क्या झंडे कहां कहां गाडे हैं । उनके राजनीतिक पी आर ओ राजकोट वाले हितेशभाई ने तो सब को ए मेल कर कर के ढोल पीटना शुरू कर दिया है।
खैर अपन वो बता रहे हैं जिसका ढोल अपने यार लोग दबी जुबान से पीटेंगे ।
इन दिनों में मोदीजी ने पार्टी में कितनों का सफाया कर दिया हैं। कितने आई ए एस नौकरी छोड़ गएँ हैं। कितने बिस्तर तैयार कर बैठे हैं। राह देख रहें हैं की अगर मोदीजी नहीं जातें हैं तो वो खुद ही दिल्ली चलें जायेंगे । यह कहना पड़ेगा की अभी तक कोई भी मुख्यमंत्री इतना विवादास्पद नहीं हुआ हुआ है।
अपने मोदी भाई का विवाद खडे करने का अपना ही अंदाज हैं। बडे पर तीर दागो और बडे हों जाओ । कॉंग्रेस में अपने मोदीजी सोनिया गाँधी से नीचे तो बात ही नही करते। गुजरात कॉंग्रेस के नेता तो कहीं हैं ही नही । प्रदेशाध्यक्ष भरत सोलंकी , प्रतीपक्ष के नेता अर्जुन भाई का तो कोई क्लास ही नहीं । सीधे पाकिस्तान के जनरल मुशर्रफ के लेवल पर ही निशाना। वहां से कोई जवाब नहीं और यहाँ वाह वाह। आ सकता है कोई अपने मोदीजी की टक्कर में। यूँ ही नही बनते रिकार्ड। जय नरेन्द्र भाई । जय नरेन्द्र भाई की पाँच करोड़ की जनता .
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