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Saturday, May 21, 2016

कांग्रेस को केतकर बूस्टर डोज

कुमार केतकर 
कुमारआजकल अपने कांग्रेसी मित्रों की हालत खस्ता है। एक ओर निराशाजनक चुनावी परिणाम तो दूसरी ओर भाजपाईयों का आक्रमक प्रचार प्रहार। किस तरह से इस शाब्दिक दंगल में खुद को बचाते हुए भाजपाईयों को परास्त करें? आज सबसे बड़ी जरुरत है कांग्रेसियों का मनोबल बढाने की। पर किसी को भी समझ में नहीं आता कि यह कैसे करें।
अपने मुम्बई स्थित वरिष्ठ पत्रकार कुमार केतकर ने अपने लेक्चर से यह काम किया। राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर अहमदाबाद में आयोजित कार्यक्रम में उनका लेक्चर था। विषय था राजीव गांधी 25 वर्ष बाद। हालांकि विषय राजीव गांधी था, वे पूरी कांग्रेसी विचारधारा और आज की परिस्थिति पर बोले। जम कर बोले, तथ्यों के साथ बोले व्यंग्यता शैली की छटा में बोले। सभास्थल तालियों से गूंजता रहा।
केतकरजी ने बताया कि किस प्रकार 1985 में टेलीफोन विभाग को डाक विभाग से अलग कर राजीवजी ने संचार क्रांति की नींव डाली और उसे आगे बढ़ाया। इसकी वजह से अमरीका में भारतीयों का बाजार बढ़ा। भारतीय आईटी प्रोफेशनलों की अमरीकी बाजार में जो आज बोलबाला है उसका श्रेय राजीव गांधी को ही जाता है।
यह बात अलग है कि आज यही अप्रवासी भारतीय कांग्रेस और गांधी के दुश्मन बने हुए है। वे गांधी से अधिक गोडसे की प्रशंसा करते हैं।
केतकरजी ने बताया कि जो कोकोकोला के विरोध में प्रदर्शन करते थे वही आज विदेशी निवेश लाने के लिए जुटे हुए हैं। उसे वे अब गर्व की बात कहते हैं।
उन्होने खचाखच भरे सभागृह में कांग्रेसियों को भाजपाईयों का सामना करने के लिये काफी मसाला भी दिया।
डिजीटल इन्डिया के लिए केतकरजी के पास एक अच्छा उदाहरण है। आज जिस तरह से छोटे बच्चे मोबाइल और कम्प्यूटर का उपयोग करते हैं वह बतलाता है कि यह डिजीटल इन्डिया है। भाजपा और मोदी के डिजीटल इन्डिया के नारे में केवल खोखलापन है।
मोदीजी की मन की बात के बारे में उन्होंने गांधीजी के मौन की बात आगे रख दी। बोले उस जमाने में न तो इन्टरनेट था न ही वॉट्सएप। गांधीजी केवल हिन्दी, गुजराती और अंग्रेजी ही जानते थे। फिर भी हर भाषा के लोग उसके साथ जुड़े हुए थे। वे मौन रख उनके मन की बात लोगों तक पहुंचाते थे।
आसाम में बांग्लादेशियों के विरोध के मुद्दे पर उनका कहना है कि आरएसएस अखंड भारत चाहता है। अर्थात पाकिस्तान और बांग्लादेश दोनों ही भारत में वापिस। फिर भाजपा बांग्लादेश का मुद्दा क्यों उठाती है।
आपात स्थिति का उल्लेख कर इन्दिरा गांधी को तानाशाह कहा जाता है, और बदनाम किया जाता है। उन्होंने उस समय की परिस्थिति को देखते हुए संविधान के प्रावधान का उपयोग कर आपातस्थिति की घोषणा की थी। वह लोकतांत्रिक कदम था।
बोफोर्स के नाम पर राजीव गांधी को बदनाम करने वाले आज यह कह रहे हैं कि बोफोर्स एक अच्छी गन है।उन्होने कुछ दिन पूर्व के मनोहर पारीकर के बयान का उल्लेख किया।
मोदीजी की डिग्री के बारे में उन्होने एक नया सुर्रा छोड़ा। उनकी डिग्री में कम्प्युटर का उपयोग उस जमाने में जब कम्प्युटर बाजार में आया ही नहीं था।
आज जिस तरह से नेहरू के विचार और उनके नाम से जुड़ी संस्थाओं पर आक्रमण किया जा रहा है, उसका उल्लेख करते हुए केतकरजी का कहना है कि इस सबको नेहरू या गांधी परिवार की दृष्टि से मत देखो। यह सब हमारे स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को खत्म करने के लिए किया जा रहा है।

केतकरजी का संकेत स्पष्ट था। जिस प्रकार मोदी विरोध को देश विरोध बताया जाता है उसी प्रकार से कांग्रेस विरोध, नेहरू गांधी विरोध को देश की स्वतंत्रता का विरोध चित्रित करो।

Friday, April 15, 2016

भाजपाइयों का मीडिया प्रेम

मीडिया और भाजपा। एक अलग ही रिश्ता है भाजपा का मीडिया के साथ। एक विपक्ष के स्तर से सत्ता पर आई भाजपा से बेहतर मीडिया पावर को कौन जानता हैबेचारे कांग्रेसी वर्षों की सत्ता को भाजपा की मीडिया पावर की धुलाई में खो बैठे।

अपने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी ने मीडिया उपयोग की नई प्रणाली शुरू की। मीडिया से मिलो मत, मीडिया का उपयोग करो। अपने भाषणों का प्रहार लोगों पर करो मीडिया के जरिये। पर मीडिया से सीधा मिलना टालो।
पर अब शायद स्थिति भाजपा के हाथ से सरकती जा रही है। राज्यों के चुनावों में खराब स्थिति इसका प्रबल संकेत है। दूसरी ओर भाजपा की टीका वाले समाचार सुर्खियों में छाये जा रहे हैं। साफ है मीडिया के साथ दोस्ती के अलावा कोई चारा नहीं। मीडिया से मिलना जरूरी है।
अगले वर्ष के चुनावों को ध्यान में रख अपनी मुख्यमंत्री आनन्दीबहन पटेल ने गुजरात में मीडिया प्रेम का नया अध्याय शुरू कर दिया है। नये प्रदेशाध्यक्ष विजय रूपाणी के माध्यम से। इसकी शुरूआत आज रामनवमी के दिन पत्रकार स्नेह मिलन से की।
भाजपा हो और हिन्दुत्व की बात न हो यह कैसे सम्भव है। साफ है रामनवमी का दिन इसी विचार को लोगों के दिमाग में बैठाता है। आनन्दीबहन और रूपाणीजी के साथ हाजिर थे चेहरे पर कॉलगेट मुस्कराहट चिपकाए नए प्रवक्ता पर राजनीति के पुराने खिलाड़ी भरत पंड्या।
साथ ही थी भाजपा की पूरी मीडिया टीम, दिग्गज यमल व्यास से लेकर नवोदित विक्रम जैन और किशन सोलंकी ।क्राउन होटल के मालिक संघवी और नरहरी के अमीन खास हितेश पोची और अपने SMS वाले जयंतिलाल भी हाजिर थे इस विस्तृत मीडिया स्नेह मिलन टीम में।
भाजपा नेताओं ने जाहिर किया कि भाजपा और पत्रकार सभी के दिल में गुजरात का हित है इसलिए हाथ मिलायें। आज की प्रचलित भाषा में कहें तो अपने भाजपाई मित्रों ने MOU की घोषणा कर दी। यह बात अलग है कि इकतरफा प्रेम की इकतरफा घोषणा।
जो भी बोले वो अपने भरतभाई ही बोले। प्रवक्ता जो ठहरे। कल को कुछ उल्टा हो जाये तो आनन्दीबहन और रूपाणीजी आसानी से बच सकें।  पत्रकारों की एक दुखती रग पर हाथ रख उन्होंने भाजपाई संवेदना के सुर छेड़े। पत्रकारों के लिए हेल्थ कैम्प के विचार की घोषणा के साथ। वैसे हर साल विधानसभा के बजट सत्र के दौरान एक हैल्थ कैम्प का आयोजन होता ही है।
भरत भाई ने कुछ पत्रकारों का नाम ले कहा कि हाल ही में कैसे उन बेचारों को हार्ट अटैक, कैंसर आदि जैसे भयानक  रोगोंका सामना करना पड़ा। तो MOU के तहत हो गई भाजपा स्वास्थ्य सुरक्षा कवच घोषणा।
भई MOU की घोषणा भले इकतरफा हो, अमल में तो दोनों का साथ जरूरी है। नहीं तो गुजरात सरकार के MOU जैसा हाल हो!
पार्टी के मीडिया सेल में हेमन्त भट्ट और पराग शेठ जैसे पत्रकार फ्रेंडली डॉक्टर हों और सरकार के पास स्वास्थ्य सेवाएं हो तो स्वास्थ्य सुरक्षा कवच की बात पर सभी को विश्वास करना ही पड़ेगा। वैसे भी महंगाई के जमाने में इस प्रकार की सेवा हर कोई चाहेगा।छोटी मोटी बीमारी में ही हजारों घुस जाते हैं, हार्ट अटैक, कैंसर आदि जैसे भयानक  रोगों में तो लाखों।  
एक बात निश्चित है। गुजरात की आज की परिस्थिति देखते हुए यह मीडिया प्रेम 2017 के चुनावों तक तो चलेगा ही। वैसे भाजपा अहमदाबाद नगर निगम चुनावों में चुनाव से पहले वार्ड आधारित स्वास्थ्य कैम्प कर लोक स्वास्थ्य सुरक्षा कवच का प्रयोग सफलता पूर्वक कर चुकी है।
भारत माता की जय।
हां इसके बिना तो भाजपा संबन्धित कोई भी कार्य पूरा ही नहीं हो सकता।

Friday, July 27, 2007

गुजरात में जनसंघ ने छेडी भाजपा के विरुद्ध जंग

गुजरात में चुनावी दौड में जनसंघ ने भी उसके घोडे उतारने की तैयारीयां शुरु कर दी है। उसके प्रदेश अध्यक्ष गोपाल भाई पटेल ने हाल ही में एक फ़ोर कलर पुस्तिका भी प्रकाशित भी की है। इसमे जनसंघ और हिन्दुत्व के बारे में कई लेख भी है।

सबसे अधिक ध्यान खेंचने वाला एक रंगीन चार्ट है जो यह बताता है कि भाजप उसकी मूल संस्था जनसंघ से कितना अलग और गिरा हुआ है। स्थापक के बारे में लिखा गया है कि जनसंघ की स्थापना भारत केसरी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और राजश्री बलराज मधोक जैसे महानुभावो ने की तो भाजप की स्थापना अटल आडवानी की जुगल जोडी ने की।

दल के ध्वज के बारे में इनका कहना है कि जनसंघ का ध्वज शत प्रतिशत शुद्ध भगवा है जबकि भाजपा के झंडे में ३३ प्रतिशत हरा रंग मुस्लिम तुष्टिकरण का संकेत है। जनसंघ के प्रेरणा स्त्रोत है डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीनदयाल उपाध्याय जैसे हिन्दुवादी नेता जबकि भाजपा के प्रेरणा स्त्रोत है गांधी, नेहरु, जयप्रकाश नारायण और सिकंदर बख्त जैसे नेता।

लक्ष्य के बारे में उनका कहना है कि जनसंघ का लक्ष्य हिन्दु राष्ट्र बनाना है और भाजपा का लक्ष्य मुस्लिम तुष्टिकरण कर किसी भी किंमत पर सत्ता हांसिल करना। जनसंघ के पास बलराज मधोक और प्रफ़ुल गोरडिया जैसे प्रतिभा संपन्न स्वच्छ, निडर और बहादुर नेता है तो भाजपा बाजपाइ, आडवानी जैसे सत्ता लोलुप, स्वार्थी, भ्रष्टाचारी और बिनकार्यक्षम शासन प्रणाली नेताओ का शंभु मेला है।

भैया चुनाव है, इस वर्ष चुनाव है ।

Monday, July 23, 2007

गुजरात भाजपा की महाभारत के पात्र

गुजरात भाजपा मे चल रहे महाभारत को कौन नही जानता। कल ही आला कमान ने पांच बागियो को निलम्बित कर दिया। इन पांच पांडवों से पहले दो तो निलम्बित की सूची मे है ही। आप कह सकते हैं- सप्तरंगी विरोध बागियों का । यदि आप लिंग भेद ढूंढना चाहते हैं तो आप सफ़ल नही होंगे। इसमे दुर्गा स्वरूप रमीलाबेन देसाई भी है।

अब जब महाभारत चल रही है तो पात्र तो होंगे ही। बागी गोरधन झडफ़िया ने इन पात्रों की जो सूची जारी की है वह आज के गुजरात के अखबारों मे काफ़ी चमक रही है।

इस महाभारत के धृतराष्ट्र हैं, पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी , दुर्योधन हैं, मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ,भीष्म है पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल ।पूर्व केंद्रिय कपडा मंत्री काशीरम राणा को दिया गया है द्रोणाचार्य का नाम और पूर्व मुख्य मंत्री सुरेश महेता बने है कृपाचार्य ।
प्रदेश अध्यक्ष पुरुशोत्तम रूपाला हैं इस महाभारत के कर्ण और प्रभारी ओम माथुर बने शकुनी मामा ।पूर्व मंत्री गोरधन झडफ़िया है युधिष्टर और पूर्व मंत्री बेचर भादाणी का पात्र है भीम का , बावकु उघाड को दिया गया है नाम सहदेव, विधायक बालु तंती की भूमिका है नकुल की , विधायक सिद्धार्थ परमार को नाम दिया गया है अभिमन्यु। कार्यकर्ता बने है द्रौपदी और गुजरात की जनता कृष्ण।
रमीलाबेन को कोई पात्र नही दिया गया है शायद इस्लिये कि वे स्वयं को रणचंडी घोषित कर चुकी है।

कुछ सुर्खिया भी जोरदार हैं:

भाजपा मे महाभारत, पांच पांड्वों को बाहर निकाल दिया

अरुण जेटली ने पहले माधुपुरा बैंक डुबोई अब भाजपा डुबोयेगा

जरासंध मोदी के अत्याचार बहुत हुए अब उसका वध जरूरी, सांसद कथीरिया

पार्टी शुद्ध हुई अब चुनाव की तैय्यारी करो, रूपाला

Monday, July 9, 2007

गुजरात भाजपा में आ बैल मुझे मार

चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

पिछले कुछ महिनों से गुजरात भाजपा यादवास्‍थली बन गई है। कौन क्‍या है यह तो नहीं मालूम पर बागी भाजपाई लालकृष्‍ण आडवाणी को खुल कर धृतराष्‍ट्र पुकार रहे हैं। नरेन्‍द्रमोदी के मोह में अंधे धृतराष्‍ट्र। पर हम ईमानदारी से कहें कि हमारे मुख्‍यमंत्री नरेन्‍द्र मोदीजी के लिये अभी कोई प्रचार पात्र नहीं चुना गया है।

बागी अपने को बहुसंख्‍यक बतलाते हैं। पर, अगर प्रदेशाध्‍यक्ष पुरुषोतम रुपाला की बात माने तो वे पौने पांच साल में पांच के साडे पांच नहीं हुए हैं। पर उन्‍होंने उन्‍हें कभी पांडव नहीं कहा। कहें भी कैसे? यदि बागी पांडव बने, तो बाकी सब कौरव। आडवाणीजी तो धृतराष्‍ट्र घोषित ही किये जा चुके हैं। अब दुर्योधन की घोषणा होनी बाकी है।

हर रोज बागियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। पहले अपने मुख्‍यमंत्रीजी को ही गाली बकते थे। प्रचार के भूखे, भाजपा को खत्‍म करने वाले और हिटलर जैसी अभिव्‍यक्‍तियों का उपयोग करते थे। अब तो धीरु गजेरा खुल कर आडवाणी को धृतराष्‍ट्र कह रहे हैं।

पिछ्ले तीन साल में तीन विधायकों को निलम्‍बित और कुछ और को पार्टी से निकाल देने वाले नेता चुपचाप छाती पर वार सह रहे हैं। रुपालाजी का कहना है कि असंतुष्‍ट कांग्रेस और एनसीपी दोनों से सौदेबाजी कर रहे है और वे चाहते हैं कि उन्‍हें भाजपा दल से खदेडे। इससे वो अपना मार्केट बढाना चाहते हैं। उनकी भाषा में बागी पार्टी से निकाले जानेका टाईटल क्लीयरन्स सर्टीफ़िकेट की जुगाड में है।

इधर अपने मोदीजी का गुट भी सुर्रे छोडता रहता है वह भी चाहता है कि ये पांडव चालू रहें। उनका मानना है कि इससे लोग उन्‍हें परख लेंगे। खुद ही थक कर खतम हो जायेंगे।

कुछ दिन पहले बावकूभाई उधाड को नोटिस ठोक दिया था। कल अमरेली में मोदीजी के विश्‍वस्‍त दिलीप संघाणी ने विधायक धीरु गजेरा के भाई पर आरोप लगाया कि उन्‍होंने उन्‍हें फ़ोन पर जान से मार डालने की धमकी दी। इधर बागी कहते है कि मोदी ने केडर बेज्ड पार्टी को प्राइवेट लि. कंपनी बना दिया है।

गुजरात में लोग आजकल शंकरसिंह वाघेला को याद करते है। कोई शोर शराबा नही। ले गये विधायको को काम कला कृति के लिये मशहुर खजुराहो के मंदिर दिखलाने और कर दिया केशुभाई सरकार का काम तमाम। यहा तो महीनो से युध्ध वृंद बज रहे है, नतीजा कुछ भी नही।

दोनों पक्ष लगे हुए कि कैसे अगला उन पर वार करे। बागी इस्‍तीफ़ा दे अपनी राह चुन सकते हैं पर वे डटे हुए है। मोदी गुट उन्‍हें बाहर निकाल आडवाणी को धृतराष्‍ट्र बनने से बचवा सकता है, पर वह भी कह रहा है आ बैल मुझे मार। किसी दिन कोई बैल तो दूसरे को मार ही देगा। सभी को इन्‍तजार है कि कौन किसको मारता है।
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