Thursday, August 30, 2012

कौन माया कोडनानी !


आज भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री माया कोडनानी सुर्खियों मे हैं. भारत का कोई अखबार या चैनल ऐसा नहीं है जहां माया बहन सुर्खियों में न हों. माया कोडनानी और ३१ अन्य को अहमदाबाद की एक विशेष अदालत ने २००२ के दंगों के लिये दोषी पाया है.
अदालत कल उन्हे सजा सुनायेगी. पर नरोडा पाटिया हत्या कांड मे ९५ व्यकतियों की मॄत्यु हुई थी और इन ३२ को उसके लिये दोषी पाया गया है. कम से कम आजीवन कैद और अधिक से अधिक फांसी की सजा हो सकती है माया बहन को.
वे १९९८ से अहमदाबाद के नरोडा क्षेत्र की विधायक हैं.इससे पहले वे पार्षद भी रह चुकी हैं. वे भाजपा की शहर अध्यक्ष भी रह चुकी हैं. २००७ मे तीसरी बार विधायक चुने जाने के बाद वे मंत्री भी बनाई गई थी. २००९ मे जब नरोडा कांड मे उनका नाम खुल कर बाहर आया तब वे भूगर्भ मे चली गई और आखिरकार पुलिस द्वारा गिरफतार होने पर उन्हे इस्तीफा देना पडा. हालाकि पेशे से डॉक्टर माया बहन जमानत पर रिहा हो गई.
उन्हें दोषी करार किया जाना अपने मोदीजी की सरकार के लिये एक झटका था. वैसे मोदीजी के कई समर्थकों का मानना है कि चुनावी वर्ष मे २००२ के दंगों के भूत का इस प्रकार का जागना  अपने मोदीजी के भाग्य का एक बार फिर जागना है. २००७ मे भी अखिरी दिनों मे कौमवादी मुद्दे ने बाजी काफी पलट दी थी.
खैर चुनाव को तो अभी तीन चार महिने हैं. अभी तो बात है माया बहन और विश्व हिन्दू परिषद के नेता बाबू बजरंगी के भविष्य की. ३२ दोषियों में बाबू बजरंगी भी शामिल हैं.
माया बहन की हालत सबसे खराब है. जिस दल के साथ भगवा हाथ मे लिये हुए वे बडी हुई है, वही उनसे किनारा कर रहा है. गुजरात मे तो भाजपा यानी अपने मुख्य मंत्री मोदीजी . मोदीजी तो माया बहन के बारे मे कुछ नहीं बोले हैं पर उनकी सरकार के प्रवक्ता जय नारायण्जी ने स्पष्ट कर दिया है कि माया बहन और सरकार का कोई लेना देना नहीं है. कारण ? २००२ के दंगों के वक्त वे मंत्री नहीं थी!
अब बोलिये आप क्या कहेंगे इस तर्क/कुतर्क को. २००२ मे मोदीजी तो मुख्यमंत्री थे. उन्ही की पार्टी की माया बहन और कई अन्य को अदालत ने दोषी पाया है. पर इस मुद्दे पर तो साफ है कि माया बहन कौन. बेचारी माया बहन जिनके भरोसे झंडा उठाया था वही किनारा कर रहे हैं.

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